कर्नाटक में मुस्लिम कोटा पर SC के दखल से चुनावों में बीजेपी पर क्या असर होगा?
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर भाजपा ने बड़ी उम्मीद से मुस्लिम आरक्षण कोटा खत्म किया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

कर्नाटक चुनाव में भाजपा को मुस्लिम आरक्षण कोटा खत्म करने से बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। 10 मई को चुनाव है और सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई तक इस कोटा को खत्म करने के फैसले पर तामील करने से ही रोक दिया है। मतलब, इससे उसे जो चुनावों में फायदा मिलने की उम्मीद थी, उसपर ग्रहण लग गया है।

मुस्लिम कोटा पर भाजपा का चुनावी एजेंडा फेल?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का 4% आरक्षण कोटा खत्म करने को भाजपा बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही थी। कांग्रेस ने जब इसे सत्ता में आने पर वापस लाने का दावा करना शुरू किया तो सत्ताधारी दल ने उसपर तुष्टिकरण के आरोप लगाने शुरू कर दिए । लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के दखल से लगता है कि भाजपा का सारा चुनावी एजेंडा धरा का धरा रह जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई तक नहीं लागू करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से कह दिया है कि 9 मई तक मुसलमानों का 4% कोटा खत्म करने के फैसले को लागू न करे। जबकि, 10 मई को ही राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने हैं। बीजेपी सरकार ने मुसलमानों का 4% कोटा इस आधार पर खत्म करने का फैसला लिया है कि संविधान धार्मिक आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता।

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लिंगायत और वोक्कालिका वाला झुनझना फेल!
इसके साथ ही बीजेपी सरकार ने बड़ा दांव यह चला था कि मुसलमानों को जो पूर्ववर्ती सरकार ने 4% कोटा दिया था, उसमें से 2-2 फीसदी राज्य के दो प्रभावी वोट बैंक लिंगायत और वोक्कालिका समाज को देने का निर्णय लिया था। इन दोनों का वोट क्रमश: 17% और 14% बताया जाता है।

सुनवाई पूरी होने का इंतजार-सीएम बोम्मई
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सीएम बसवराज बोम्मई ने धारवाड़ में कहा है कि 'हमने फैसला किया कि जबतक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती हम इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे। अदालत ने आरक्षण पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन जबतक मामला तय नहीं हो जाता, हम इसे लागू नहीं करेंगे।'

9 मई तक जारी रहेगा मुस्लिम कोटा- सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा कि मुसलमानों का 4% कोटा 9 मई तक जारी रहेगा, बिना किसी पूर्वाग्रह के, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।
दरअसल, 24 मार्च के अपने आदेश में कर्नाटक सरकार ने मुसलमानों का शिक्षण संस्थानों में नामांकन और सरकारी नौकरियों में चार फीसदी आरक्षण कोटा खत्म करके उसे वोक्कालिगा और लिंगायत को दे दिया था। लेकिन, 13 अप्रैल को यह मामला सुप्रीम कोर्ट की नजर में आया और उसने इस मसले पर चुनाव से पहले लिए गए इस फैसले पर सवाल भी खड़े किए।

बीजेपी के सामने खड़ी हो सकती है मुश्किल
जबसे बोम्मई सरकार ने कर्नाटक में यह कदम उठाया है भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने इसे भुनाने की कोशिश की है। गृहमंत्री अमित शाह तक ने भी इसको लेकर बयान दिए हैं। अब जब सुप्रीम कोर्ट के दखल की वजह से यह फैसला असमंजस की स्थिति में चला गया है तो बीजेपी सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है।

भाजपा के लिंगायत वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस पहले ही जोर लगा रही है। जबकि, वोक्कालिघा में भाजपा कितनी पकड़ बना पाई है, इसका लिटमस टेस्ट होना अभी बाकी है। ऐसे में पार्टी ने जो दो-दो फीसदी आरक्षण वाला जो दांव चला था, वह फिलहाल कारगर होता नहीं दिख रहा है।












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