कर्नाटक में अब ओल्ड पेंशन स्कीम की सुगबुगाहट, अगली कैबिनेट बैठक में होगा विचार
कर्नाटक में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की गारंटी लागू करने के बाद अब कांग्रेस की सिद्दारमैया सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) पर भी विचार करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि अगली कैबिनेट बैठक में इसपर चर्चा की जाएगी।
राज्य सरकार के कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधि मंडल से बैठक के बाद सीएम ने कहा कि 7 जुलाई को पेश होने वाली कांग्रेस सरकार की पहली बजट में इसे लागू करने की घोषणा के बारे में कैबिनेट में कोई निर्णय लिया जाएगा।

'एनपीएस रद्द करने से 19,000 करोड़ रुपए उपलब्ध होंगे'
कर्नाटक राज्य न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शांताराम तेजा ने कहा कि एनपीएस को कैंसिल करने से कुल 19,000 करोड़ रुपए उपलब्ध होंगे, जिसका इस्तेमाल सरकार विकास कार्यों के लिए कर सकती है।
ओपीएस के तहत अंतिम सैलरी की आधी पेंशन मिलेगी
पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद उनकी आखिरी सैलरी की आधी पेंशन मिलेगी। इसके अलावा साल में दो बार महंगाई भत्ता भी मिलेगा। इसके लिए कार्यरत रहते उनके वेतन से कोई कटौती भी नहीं की जाएगी।
एनपीएस में होती है वेतन से कटौती
वहीं नई पेंशन योजना (एनपीएस)के तहत कर्मचारियों को इसके लिए अपनी सैलरी में से 10% योगदान देना पड़ता है, जिसे विभिन्न फंड में निवेश किया जाता है। कर्मचारियों को इसका रिटर्न रिटायरमेंट के बाद मिलता है।
कांग्रेस ने चुनाव घोषणापत्र में किया था ओपीएस बहाल करने का वादा
2006 के बाद जिन कर्मचारियों की ज्वाइनिंग हुई है, उनके लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान अपने घोषणापत्र में किया था। पार्टी ने राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी नई पेंशन योजना को खत्म कर दिया है। इन राज्यों में भी कांग्रेस की ही सरकारें हैं।
कर्नाटक में ओल्ड पेंशन स्कीम 31 मार्च, 2004 को बंद कर दी गई थी। इस साल 10 मई को हुए विधानसभा चुनावों से पहले कर्मचारी संगठनों ने नई पेंशन योजना के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने ओपीएस को बहाल करने से इनकार कर दिया था।












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