Karnataka new CM: क्या है AHINDA फॉर्मूला जिसके दम पर सिद्धारमैया ने पाई सीएम की कुर्सी?
Karnataka new CM: कांग्रेस को पांच साल बाद दोबारा बड़ी बहुमत मिली है तो उसमें AHINDA वोट बैंक का बहुत बड़ा रोल है। यही वजह है कि इसके अगुवा बन चुके सिद्दारमैया पर पार्टी ने फिर से भरोसा जताया है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के पांच दिन बाद आखिरकार यह तय हो गया है कि सिद्दारमैया ही प्रदेश के 30वें मुख्यमंत्री होंगे। सिद्दारमैया कर्नाटक के बड़े जनाधार वाले नेता हैं और AHINDA फॉर्मूले के माध्यम से वोट बटोरने में माहिर माने जाते हैं। उन्होंने इसी के दम पर 2013 में भी कांग्रेस को वहां भारी बहुमत से सत्ता दिलाई थी।

AHINDA फॉर्मूले की वजह से सिद्दारमैया को मिली कुर्सी
कर्नाटक में बहुत बड़ी जीत के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर सीएम पद को लेकर विभिन्न जाति समूहों का चौतरफा दबाव था। लेकिन, पार्टी आला कमान ने आखिरकार सिद्दारमैया पर ही भरोसा जताया है। क्योंकि, इसबार भी कर्नाटक में कांग्रेस की बड़ी जीत के पीछे AHINDA फॉर्मूले की कामयाबी को बड़ा कारण माना जा रहा है।

इस बार भी इस समीकरण ने किया कांग्रेस के पक्ष में काम
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन जिस तरह का रहा है, उससे लगता है कि AHINDA समीकरण ने इस बार भी पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में काम किया है और अपना वोट शेयर लगभग बरकरार रखते हुए भी भाजपा बुरी तरह से चुनाव हारी है।

कांग्रेस को भविष्य के लिए मजबूत दिख रहा है यह वोट बैंक
वैसे तो कांग्रेस ने तटीय कर्नाटक और बॉम्बे कर्नाटक क्षेत्रों में भी इस बार अच्छा किया है। लेकिन, AHINDA वोट बैंक वाले इलाके में पार्टी के पक्ष में हुई वोटिंग इतनी बड़ी जीत की वजह मानी जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्दारमैया पर दांव लगाने का फैसला यह सोचकर लिया है कि शायद उनकी वजह से यह जातिगत और धार्मिक गठजोड़ आगे भी उसके साथ रह सकता है।

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AHINDA फॉर्मूला क्या है ?
अगर शाब्दिक अर्थ में जाएं तो AHINDA तीन कन्नड़ शब्दों का मेल है। यहां A का मतलब है-अल्पसंख्यातरु (सीधे शब्दों में कहें तो मुसलमान)। आगे का तीन अक्षर एकसाथ है- HIN, इसका मतलब कन्नड़ के हिंदुलिदावारु से है, यानि पिछड़ी जातियां और आखिर के दो अक्षर हैं- DA, मतलब कन्नड़ में दलितारु या दलित वर्ग से है।

देवराज ऊर्स ने दिया था AHINDA का फॉर्मूला
कर्नाटक की राजनीति में यह सामाजिक-राजनीतिक विचार बहुत ही आजमाया हुआ हथियार है। AHINDA का विचार सबसे पहले देवराज ऊर्स ने सामने रखा था। वह प्रदेश के पहले पिछड़ा नेता थे। सिद्दारमैया ने भी उन्हीं के फॉर्मूले को आजमाया और 2013 में पहली बार अपने दम पर भाजपा को सत्ता से दूर कर दिया।

2005 से ही सिद्दारमैया कर रहे हैं AHINDA राजनीति
AHINDA के प्रति चुनावी आकर्षण सिद्दारमैया में तभी पैदा हो गया था, जब वह पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के संरक्षण में सियासी पहुंच बनाने की कोशिश में जुटे हुए थे। 2005 में वे हुबली मे आयोजित एक विशाल AHINDA रैली में शामिल हो गए, जिससे वोक्कालिगा बहुल जेडीएस की पावरफुल लॉबी इतनी नाराज हुई कि उन्हें जेडीएस से बाहर कर दिया गया।

AHINDA फॉर्मूला कांग्रेस के लिए साबित हुआ ट्रंप कार्ड
इसके कुछ ही समय बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2013 में कांग्रेस ने कर्नाटक में 224 में से 122 सीटें जीतीं, जिसका श्रेय पूरी तरह सिद्दारमैया को दिया गया। क्योंकि उनका AHINDA फॉर्मूला पहली बार वहां कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुआ था। वह पूरे पांच साल तक सीएम रहे, जो कि 40 साल का रिकॉर्ड है।












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