कर्नाटक के मंत्री कृष्ण बैरे गौड़ा ने पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए क्या है पूरा मामला
Karnataka News: कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्ण बैरे गौड़ा ने बेंगलुरु में एक महत्वपूर्ण जमीन घोटाले का खुलासा किया है। जिसमें उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 1976 में गंगेनहल्ली गांव के पास 1.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। लेकिन 2007 में एक अज्ञात व्यक्ति राजशेखरैया जो जमीन से कोई संबंध नहीं रखता। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को एक याचिका दी। जिसमें इस जमीन की पहचान करने की मांग की गई थी।
मंत्री गौड़ा ने कहा कि हम नहीं जानते कि यह राजशेखरैया कौन है। लेकिन हम यह निश्चित रूप से कह सकते हैं कि उसका इस जमीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने जमीन के डीनोटिफिकेशन की याचिका दी और तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने उस पर कार्रवाई के लिए फाइल मांगी। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से फाइल में लिखा था कि जमीन BDA द्वारा अधिग्रहीत की जा चुकी है और डीनोटिफिकेशन का कोई सवाल नहीं है।

मंत्री गौड़ा ने आगे बताया कि जब कुमारस्वामी ने इस फाइल की मांग की तो उनकी सास ने मूल जमीन मालिकों के साथ जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से उस संपत्ति के स्वामित्व के लिए एक समझौता किया। इसी बीच कुमारस्वामी की सरकार गिर गई और बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने। येदियुरप्पा ने इस फाइल को मंगवाया। लेकिन तत्कालीन प्रमुख सचिव ज्योति रामलिंगम ने स्पष्ट रूप से लिखा कि इस जमीन का अधिग्रहण पहले ही हो चुका है और इसे डीनोटिफाई करने का कोई आधार नहीं है।
इसके बावजूद येदियुरप्पा ने इस जमीन को डीनोटिफाई कर दिया और कुछ समय बाद यह जमीन कुमारस्वामी के साले के नाम पर आ गई। मंत्री गौड़ा ने इसे सार्वजनिक हित के खिलाफ धोखाधड़ी बताया और कुमारस्वामी से सवाल किया कि क्या आपने एक अज्ञात राजशेखरैया की याचिका स्वीकार की थी। क्या यह सही है कि आपकी सास ने उसी समय इस जमीन के लिए GPA के तहत समझौता किया। क्या यह सही है कि अधिकारियों की स्पष्ट सिफारिश के बावजूद इस जमीन को डीनोटिफाई किया गया और क्या यह सही है कि अंततः यह जमीन आपके साले के पास आई।
मंत्री कृष्ण बैरे गौड़ा ने इस मामले को कर्नाटक के लोगों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि लोकायुक्त इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने येदियुरप्पा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने लोकायुक्त की जांच को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसे 2021 में खारिज कर दिया गया था और उन पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।
मंत्री गौड़ा ने लोकायुक्त से अनुरोध किया कि इस मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी की जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि इस घोटाले के सभी पहलुओं का खुलासा हो सके।












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