कर्नाटक लोकायुक्त ने 13 सरकारी अधिकारियों से जुड़े 54 स्थानों पर छापेमारी की
कर्नाटक लोकायुक्त ने शुक्रवार को राज्य के पांच जिलों में 13 सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर बड़े स्तर पर छापेमारी की। ये कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामलों की जांच का हिस्सा थी। तलाशी के दौरान अधिकारियों को 50 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति का पता चला। लोकायुक्त की टी ने ये छापे बेंगलुरु, तुमकुरु, शिमोगा, यादगिरी और कलबुर्गी में मारे गए।

हाई-प्रोफाइल मामले
छापेमारी में लीगल मेट्रोलॉजी के डिप्टी कंट्रोलर अतहर अली के पास सबसे ज्यादा अवैध संपत्ति पाई गई। उन्होंने कथित तौर पर 8.63 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। उनकी संपत्ति में चार प्लॉट, 5.82 करोड़ रुपये के तीन घर, 25.19 लाख रुपये की नकदी, 2.08 करोड़ रुपये के गहने, 11 लाख रुपये के वाहन और 37.45 लाख रुपये के घरेलू सामान शामिल हैं।
मंगलुरु शहर के नगर आयुक्त सीएल आनंद ने 2.78 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की थी। उनकी संपत्ति में तीन घर और 4.7 एकड़ कृषि भूमि शामिल है।
अन्य अधिकारी भी निशाने पर
बेंगलुरु ग्रामीण जिले में हेब्बागोडी सिटी म्यूनिसिपल काउंसिल कमिश्नर और केएएस अधिकारी के नरसिम्हा मूर्ति के परिसरों की भी तलाशी ली गई। इसके अलावा, यादगीर जिला पंचायत परियोजना निदेशक बलवंत राठौड़ और बेंगलुरु ग्रामीण जिले में वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी आर सिद्दप्पा के परिसरों पर भी छापेमारी की गई।
बता दें वाणिज्यिक कर संयुक्त आयुक्त रमेश कुमार और शिवमोग्गा जिले के भद्रावती तालुक में अंतरगंगे ग्राम पंचायत के अध्यक्ष नागेश बी गौड़ा भी लोकायुक्त के निशाने पर हैं।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक सीटी मुद्दू कुमार की भी जांच की गई। इन्वेस्ट कर्नाटक फोरम में मुख्य परिचालन अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर उनके पास 7.41 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति पाई गई। उनकी संपत्तियों में तीन घर, 6.20 एकड़ कृषि भूमि, एक फार्महाउस और 88.76 लाख रुपये के आभूषण शामिल हैं।
बागवानी विभाग के उप निदेशक प्रकाश और मंड्या के श्रम अधिकारी चेतन कुमार भी उन लोगों में शामिल थे जिनके परिसरों की आज तलाशी ली गई।
एक अधिकारी ने बताया, "अधिकारियों ने आज सुबह 100 से अधिक जासूसों के साथ 54 स्थानों पर छापेमारी शुरू की।"
आनंद कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (केएएस) के वरिष्ठ ग्रेड अधिकारी हैं, जिन्हें जून 2023 में मंगलुरु सिटी कॉर्पोरेशन कमिश्नर के पद पर नियुक्त किया गया था। उनका तबादला 4 जुलाई को किया गया था, लेकिन उन्होंने इसके खिलाफ राज्य सरकार से अपील की। इसके बाद 9 जुलाई को उनका तबादला रद्द कर दिया गया।
लोकायुक्त की कार्रवाई, विभिन्न अधिकारियों द्वारा रखी गई बड़ी मात्रा में अघोषित संपत्ति का खुलासा करके राज्य सरकार के भीतर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए चल रहे प्रयासों को उजागर करती है।












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