Lok Sabha Election 2024: प्रज्वल रेवन्ना पर कार्रवाई में क्यों हुई देरी, कांग्रेस सरकार को किस बात का था डर?
Karnataka Lok Sabha Election 2024: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने सेक्स वीडियो मामले में जेडीएस सांसद और लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना (अब पार्टी से निलंबित) के खिलाफ कार्रवाई में जानबूझकर देर की। इसको लेकर कांग्रेस और बीजेपी में जबर्दस्त बहसबाजी चल रही है।
आरोप लग रहे हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्दारमैया सरकार ने तबतक रेवन्ना पर कार्रवाई शुरू नहीं की, जब तक राज्य में 26 अप्रैल को पहले चरण का मतदान का कार्य पूरी नहीं हो गया। जबकि, वो अश्लील वीडियो पहले से ही वायलल थे, जिसको लेकर रेवन्ना गंभीर आरोपों के घेरे में हैं।

पहले चरण के चुनाव से पहले कार्रवाई में था वोट बैंक वाला जोखिम!
टीओआई की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले बताया गया है कि दरअसल कांग्रेस सरकार ने कार्रवाई में इसलिए देर की, क्योंकि वह वोक्कालिगा वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहती थी, जो कि पहले चरण के चुनाव वाली कुछ सीटों पर काफी निर्णायक भूमिका में थे।
वोक्कालिगा नाराज होते तो चुनाव में कांग्रेस को हो सकता था नुकसान
खासकर इसलिए कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया कुरुबा जाति से हैं और अगर रेवन्ना पर समय रहते ऐक्शन लिया गया होता तो इससे कांग्रेस को चुनावों में नुकसान हो सकता है। क्योंकि, रेवन्ना भी वोक्कालिगा समुदाय से हैं।
पहले चरण के चुनाव के बाद शुरू हुई कार्रवाई
पहले चरण में दक्षिण कर्नाटक की जिन सीटों पर चुनाव हुए, उसमें रेवन्ना परिवार के तीन लोग मैदान में हैं। प्रज्वल रेवन्ना इस बार एनडीए उम्मीदवार के तौर पर हासन से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पिता एचडी रेवन्ना होलेनरसीपुर सीट से जेडीएस एमएलए हैं।
रेवन्ना पिता-पुत्र पर नौकरानी और उसकी बेटी के यौन शोषण का आरोप
शुक्रवार को वोक्कालिगा बहुल दक्षिण कर्नाटक में चुनाव संपन्न हुआ और रविवार को जो एफआईआर दर्ज हुई उसमें पिता और बेटे दोनों का नाम शामिल किया गया है। उनकी एक पूर्व नौकरानी ने उसे और उसकी बेटी के यौन शोषण का आरोप लगाया है।
समय रहते कार्रवाई होती तो रेवन्ना का विदेश भागना था मुश्किल
इसी वजह से सिद्दारमैया सरकार सवालों के घेरे में आ गई है कि उसने इतने गंभीर मामले में दखल देने के लिए चुनाव खत्म होने का इंतजार क्यों किया, जिससे आरोपी रेवन्ना को देश से भाग निकलने का मौका मिल गया। जबकि, पेन ड्राइव वाले क्लिप तो 26 अप्रैल से पहले ही वायरल हो चुके थे।
रेवन्ना को सीएम से समझौते के बाद विदेश भगाया- बीजेपी
बीजेपी का आरोप है कि सरकार की कार्रवाई में रेवन्ना और नेताओं की दोस्ती की झलक मिल रही है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दावा किया है कि प्रज्वल को 'सीएम (सिद्दारमैया) और रेवन्ना के बीच एक समझौते' के बाद विदेश जाने की अनुमति दी गई।
उन्होंने कहा, 'अपनी खामियों को छिपाने के लिए राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगा रही है...हममें से किसी ने प्रज्वल के पार्टी से निलंबन का विरोध नहीं किया। फिर भी कांग्रेस एनडीए पर आरोप लगा रही है।'
कांग्रेस, बीजेपी पर लगा रही है आरोप
वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कलबुर्गी की एक रैली में इस मामले में प्रधानमंत्री पर चुप रहने का आरोप लगाया है, क्योंकि लोकसभा चुनावों में इस बार बीजेपी और जेडीएस के बीच गठबंधन है।
कर्नाटक में सत्ता में होते हुए भी कांग्रेस ने कार्रवाई क्यों नहीं की- अमित शाह
इसके जवाब में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि यह तो राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने गुवाहाटी में कहा, 'हम पूछना चाहते हैं कि कर्नाटक में सत्ता में होते हुए भी कांग्रेस ने कार्रवाई क्यों नहीं की। प्रियंका को सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से पूछना चाहिए।'
डीके शिवकुमार ने माना की कार्रवाई में देरी हुई!
वहीं, शिवकुमार ने यह कहकर कार्रवाई में देरी पर अपनी सरकार के बचाव की कोशिश की है कि सिर्फ मौखिक आरोपों पर ऐक्शन नहीं लिया जा सकता, जबतक कि पीड़िताओं की ओर से वास्तविक शिकायत न दर्ज करा दी जाए।
कांग्रेस, जेडीएस की जगह बीजेपी पर क्यों है हमलावर?
इस मामले में एक दिलचस्प राजनीति हो रही है। आरोपी जेडीएस का नेता और उम्मीदवार है। लेकिन, कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता सीधे बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को इसमें घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, जेडीएस पर जरा भी हमलावर नहीं हैं। जबकि, आरोपी के विदेश भागने के लिए उसकी अपनी सरकार पर ही उंगलियां उठ रही हैं।
जेडीएस पर हमला करने से कांग्रेस को अपनी सरकार को हो सकता है खतरा?
इसके पीछे भी यही वजह लगता है कि कांग्रेस पार्टी जेडीएस को निशाना बनाकर कर्नाटक में वोक्कालिगा समाज को नाराज नहीं करना चाहती। वैसे भी डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का मंसूबा बार-बार जाहिर होता रहा है, जो इसी समाज से आते हैं।
जबकि, सीएम की कुर्सी अभी कुरुबा जाति के नेता के पास है, जिसके साथ वोक्कालिगा नेता की सरकार में दबे-छिपे वर्चस्व की लड़ाई चलती रहती है। मतलब, कांग्रेस नहीं चाहती कि इस विवाद की वजह से उसकी अपनी सरकार पर किसी तरह का संकट आए।
दूसरी तरफ बीजेपी पर आरोप लगाकर कांग्रेस देशभर में चुनावों के दौरान उसे महिला-विरोधी पार्टी प्रोजेक्ट करना चाहती है, क्योंकि रेवन्ना हासन में उसकी सहयोगी जेडीएस के उम्मीदवार हैं।












Click it and Unblock the Notifications