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मुहर्रम: बेरहम पिता ने नवजात बच्चे को केले के पत्ते से लपेटकर जलते कोयले पर लिटाया

हुबली। कर्नाटक के हुबली में धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर एक नवजात बच्चे को केले के पत्ते से लपेटकर जलते कोयले पर लिटाया गया। हुबली के नजदीक धारवाड़ इलाके में हुए इस रीति-रिवाज को मोहर्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि बच्चे की मन्न्त पूरी होने को बाद उसे इसी तरह केले के पत्ते से लपेटकर जलते कोयले पर लिटाए जाने का रिवाज है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस रिवाज में शामिल होने के देश भर से हजारों लोग आते हैं।

मुहर्रम: एक पिता ने अपने नवजात बच्चे को जलते कोयले पर लिटाया

यह इस तरह का पहला मामला नहीं है जहां इस तरह से अंधविश्वास से भरे रस्मों रिवाजों को मासूम की जान से खिलवाड़ कर निभाया जाता हो। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ गांवों में तो बच्चों को 15 मीटर उंचे छत से नीचे बिस्तर पर फेंके जाने की परंपरा है। अभी हाल ही में धार्मिक आस्था के नाम पर एक और हतप्रभ करने वाली खबर तमिलनाडु के मदुरई से आई थी जहां लड़कियों को देवी बनाने के नाम पर अर्द्धनग्न हालत में रखा जाता था।

क्यों मनाया जाता है मोहर्रम?

मोहर्रम' का इस्लाम धर्म में बहुत महत्व है। सन् 680 में इसी माह में कर्बला नामक स्थान मे एक धर्म युद्ध हुआ था, जो पैगम्बर हजरत मुहम्म्द साहब के नाती और यजीद (पुत्र माविया पुत्र अबुसुफियान पुत्र उमेय्या) के बीच हुआ। यजीद के कमांडर ने हज़रत इमाम हुसैन और उनके सभी 72 साथियो (परिवार वालो) को शहीद कर दिया था। जिसमें उनके छः महीने का पुत्र हज़रत अली असग़र भी शामिल थे। इसलिए तभी से तमाम दुनिया के मुसलमान इस महीने में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का ग़म मनाकर उन्हें याद करते हैं।

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