HD Deve Gowda की नसीहत- कांग्रेस विपक्षी एकता से पहले अपना कुनबा ठीक करने पर फोकस करे
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ओपिनियन पोल में कांग्रेस को आगे दिखाया जा रहा है। विपक्षी एकता की कवायद के बीच पूर्व पीएम और वेटरन कन्नडिगा सह पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा ने कांग्रेस को अपना कुनबा ठीक करने की नसीहत दी है। जानिए

कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Elections) को लोक सभा चुनाव 2024 से पहले काफी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश हो रही है। इसी बीच देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कांग्रेस को अपना कुनबा संभालने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को एकजुट करने से पहले कांग्रेस को अपने दल की आंतरिक चीजों को ठीक करना चाहिए।
दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा से अयोग्य करार दिया गया है। कार्रवाई के बाद कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही है। साथ ही कई विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस समेत कई अपोजिशन लीडर्स को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप लगाए हैं। इसी बीच कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर सामने आए ओपिनियन पोल में दिखाया जा रहा है कि कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना है। कर्नाटक के चुनाव पर पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने कहा कि कर्नाटक 2024 में होने वाले संसदीय चुनाव की दिशा तय करेगा।
क्या JDS को कांग्रेस के नेतृत्व पर ऐतराज
चुनाव से पहले विपक्षी एकता बनाने की चर्चा और कवायद के बीच जनता दल (सेक्युलर) के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने रविवार को कहा कि कांग्रेस को पहले अपना घर ठीक करना चाहिए। समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ एक इंटरव्यू में देवेगौड़ा ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों के सामने कई विकल्प हैं और इस देश के पास नेतृत्व का खजाना है।
JDS के खिलाफ चतुर प्रचार
देवेगौड़ा कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव में जेडीएस की संभावनाओं से उत्साहित हैं। उम्र संबंधी बीमारियों के कारण सक्रिय चुनाव प्रचार से दूर हटे देवेगौड़ा ने कहा कि दो राष्ट्रीय दलों - भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर के बावजूद JDS के पास सत्ता में आने का शानदार मौका है। JDS की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए देवेगौड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी "एक समावेशी सामाजिक और विकास दृष्टि- पंचरत्न कार्यक्रम" के नाम पर वोट मांग रही है। जेडीएस पुराने मैसूरु क्षेत्र तक ही 'सीमित' है, यह "राष्ट्रीय दलों का चतुर प्रचार" है। राष्ट्रीय पार्टियां लंबे और झूठे दावे करती हैं।
जेडीएस की रणनीति क्या है
JDS की रणनीति और अभियान का फोकस क्या रहेगा? इस सवाल पर देवेगौड़ा ने कहा, उनकी पार्टी पूरे कर्नाटक में अच्छा प्रदर्शन करेगी। बहुत सारे लोग दो राष्ट्रीय दलों पर फोकस कर रहे हैं, नतीजे चौंकाने वाले होंगे। हम विभाजनकारी एजेंडे के लिए वोट नहीं मांग रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और अपने बेटे डी कुमारस्वामी के बारे में देवेगौड़ा ने कहा, उन्होंने पंचरत्न कार्यक्रम के लिए राज्यव्यापी दौरा पूरा किया है। JDS को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। हमारी पार्टी की रणनीति बहुत सरल है- कड़ी मेहनत करें, ईमानदार रहें, लोगों को झांसा न दें, उन्हें विभाजित न करें।
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ऐसी धारणा है कि JDS पुराने मैसूरु से आगे विस्तार नहीं कर पाई है, उस मोर्चे पर जेडीएस क्या कर रही है? इस सवाल पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, हम केवल मैसूर क्षेत्र तक ही सीमित हैं, यह राष्ट्रीय दलों का चतुर प्रचार है। हमारे पास हमेशा राज्य भर और अलग-अलग समुदायों के विधायक रहे हैं। इसे समझने के लिए 1999 के बाद से विधायकों और उनके निर्वाचन क्षेत्रों की सूची देखनी पड़ेगी। मैसूर क्षेत्र से JDS को अधिकतम समर्थन मिला है। इस बार हम राज्य के सभी क्षेत्रों में पहले से कहीं अधिक सफल होंगे।
60 साल का करियर गवाह है
बकौल देवेगौड़ा, एक मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में मैंने सबके लिए काम किया है। मैंने कभी क्षेत्रों के बीच भेदभाव नहीं किया। निहित स्वार्थ के साथ झूठ फैलाया गया। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "अपने करियर में मैंने झूठ का मुकाबला करने के लिए महंगी पीआर एजेंसियों को कभी काम पर नहीं रखा। भगवान और जिन लोगों ने मुझे 60 से अधिक वर्षों तक देखा है, वे सच्चाई जानते हैं।"
इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री देवेगाड़ा ने कुछ और सवालों के भी जवाब दिए--
सवाल: JDS ने स्वतंत्र सरकार बनाने के लिए 123 सीटों का लक्ष्य रखा है। कुछ आलोचकों का कहना है कि यह अवास्तविक है। क्या आपको विश्वास दिलाता है कि यह प्राप्त करने योग्य है?
देवेगौड़ा का जवाब: हमारी मेहनत और विकास का विजन हमें आत्मविश्वास देता है। मैं अपने आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों की सनक की परवाह नहीं करता।
सवाल: राष्ट्रीय पार्टियों- बीजेपी और कांग्रेस के बारे में आपका क्या ख्याल है, और क्या उन्होंने कर्नाटक में सत्ता में रहते हुए परफॉर्म किया है?
देवेगौड़ा का जवाब: मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हमारे नेता एचडी कुमारस्वामी और सीएम इब्राहिम (जेडीएस प्रदेश अध्यक्ष) इस पर उचित विश्लेषण पेश कर सकते हैं। मैं इतना ही कह सकता हूं कि राष्ट्रीय दलों को बड़े-बड़े दावे करने और झूठे दावे करने की आदत हो गई है। लोगों ने उनके सर्कस और झूठ को देखा है।
सवाल: कर्नाटक चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं और इसके परिणाम का राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है?
देवेगौड़ा का जवाब: कर्नाटक इस साल अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ 2024 में होने वाले संसदीय चुनावों के लिए भी टोन सेट करेगा। यहां के चुनावों ने हमेशा ऐसा किया है और इस बार भी होगा।
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कार्यकाल के 9 साल पूरे होने पर उनके प्रदर्शन और उनके शासन में भारत में लोकतंत्र के बारे में चल रही बहस पर आपकी क्या राय है?
देवेगौड़ा का जवाब: मैंने राज्य सभा में सभी मुद्दों पर चर्चा के दौरान भाग लिया, चाहे वह कृषि मुद्दे हों, कृषि कानून हों, कोविड-19 हो, केंद्रीय बजट हो, अर्थव्यवस्था हो, उत्तर पूर्व, कश्मीर मुद्दा हो, मैंने विस्तार से बात की है। यह संसद में और मेरे सोशल मीडिया अकाउंट पर ऑन रिकॉर्ड है। अगर कोई उन्हें देखने की परवाह करता है तो उन्हें पता चल जाएगा कि केंद्र में बीजेपी सरकार के बारे में मेरा आकलन क्या है। मैंने हमेशा अपने काम को गंभीरता से लिया है और 91 साल की उम्र में भी करता रहूंगा। इस देश में कांग्रेस पार्टी ही एकमात्र विपक्षी पार्टी नहीं है।
सवाल: आपको क्या लगता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए विपक्षी एकता बनाने में कांग्रेस को क्या भूमिका निभानी चाहिए? मानहानि के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सांसद के रूप में राहुल गांधी की अयोग्यता पर आपका क्या विचार है?
देवेगौड़ा का जवाब- मैं अलग से कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरी पार्टी के वरिष्ठ नेता इस पर पहले ही बोल चुके हैं। मैं बस इतना कह सकता हूं कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रश्न: क्या आपको अब भी लगता है कि जनता परिवार और तीसरे मोर्चे के फिर से उभरने की संभावना है, या यह एक बंद अध्याय हो चुका है?
देवेगौड़ा का जवाब- सब कुछ संभव है। सब कुछ से मेरा मतलब सब कुछ है। मैं तीसरे या चौथे मोर्चे में विश्वास नहीं करता, मेरा मानना है कि हम जो भी करेंगे, हम इस देश और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सबसे पहले मोर्चा बनेंगे।












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