Karnataka election results: कर्नाटक में मिली इस हार से भाजपा को लेने होंगे ये बड़े सबक
karnataka defeat Lessons for BJP: कर्नाटक में मिली बुरी हार से भाजपा को ये सबक लेना क्यों है जरूरी जानिए?

karnataka defeat Lessons for BJP : कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 के परिणाम आ चुके हैं। कांग्रेस इस चुनाव में जहां बहुतायत ये अधिक सीटें जीत कर दोबारा सरकार बनाने जा रही है। वहीं हिमाचल विधानसभा हारने के बाद कर्नाटक जैसा अहम राज्य भी गवां चुकी है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में भाजपा कार्यालय पर मातम छाया हुआ है।
चुनाव की शुरूआत में माना जा रहा था कि भाजपा कर्नाटक में 30 से 40 सीटों तक ही जीत हासिल कर पाएगी हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर्नाटक में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में ताबड़तोड़ प्रचार किया जिसकी वजह से भाजपा 63 सीटो पर जीत हासिल कर सकी।
भाजपा के प्रदर्शन में उम्मीद से अधिक इस सुधार का श्रेय काफी हद तक प्रधान मंत्री की रैलियों और बी एस येदियुरप्पा को दिया गया। कई लिंगायतों में भाजपा के लिए मतदान के रूप में समाप्त हुआ, लेकिन पार्टी ने आम तौर पर उन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है जहां लिंगायत समुदाय का वर्चस्व है।
जाति-धर्म की राजनीति को जनता ने नकारा
भाजपा ने चुनाव से ठीक पहले लिंगायत समुदाय को खुश करने के लिए मुसलमानों का चार प्रतिशत आरक्षण समाप्त करके लिंगायत और वोकलिंगा समुदाय को दो दो प्रतिशत आरक्षण दिया था। इससे एक तरफ भाजपा ने मुसलमान वोटरों को नाराज कर दिया वहीं दूसरी ओर इन दोनों समुदायों ने भी भाजपा का खुलकर साथ नहीं दिया।
भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोपोंं पर कुछ खास नहीं किया
कर्नाटक चुनाव में भाजपा को इस हार से कई सबक सीखने को मिले हैं। जिलमें सबसे पहला कि भाजपा ने बोम्मई सरकार पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को दूर करने के लिए कुछ खास नहीं किया। वहीं जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले भाजपा को नेतृत्व के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए थी।
राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए कांग्रेस का बढ़ा मनोबल
कर्नाटक में मिली हार का असर इसी साल मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों पर पड़ सकता है जहां भाजपा के शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे जैसे नेताओं का अभी तक दबदबा है। कर्नाटक में मिली हार से इन आगामी चुनावों में मजबूती मिल सकती है।
कांग्रेस में दिखा काम करने की भूख लेकिन...
वहीं कांग्रेस ने अपने अभियान और चुनाव प्रचार से ये जता दिया किय वो उन्हें काम करने की भूख है, वहीं भाजपा के चुनाव अभियान में ऐसा कुछ स्पष्ठ नहीं था। जानकारों की माने अगर भाजपा 2023 में राजस्थान और मध्य प्रदेश के चुनावों में ऐसा ही करेगी तो वहां पर भी भाजपा को सबक मिल सकता है।
एकजुट होकर काम करने की जरूरत है
भाजपा को भी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। कर्नाटक जो भाजपा के लिए एक अहम राज्य है और लोकसभा में भाजपा के पास 28 में से 26 सीटें हैं। कनार्टक के भाजपा नेतृत्व ने 2019 में जैसा प्रदर्शन किया वैसा ही आगामी लोकसभा चुनाव में भी दोहराना बेहद जरूरी है। केंद्रीय नेतृत्व पर बहुत अधिक निर्भर रहना चाहिए। इसे जल्दी से एक साथ काम करने और तुरंत जमीन पर उतरने और 2024 में होने वाले चुनावों की तैयारी करने की आवश्यकता होगी।
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