क्या मैसूर जमीन घोटाले में मुख्यमंत्री पर कसता जा रहा है कानूनी शिकंजा? सिद्दारमैया की बढ़ी चुनौती
Karnataka News: मैसूर के कथित जमीन घोटाले में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एक शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें सिद्दारमैया और 9 अन्य लोगों के खिलाफ मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी से (MUDA) मुआवजा लेने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
मैसूर थाने में सिद्दारमैया और उनकी पत्नी के खिलाफ शिकायत
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्दारमैया, उनकी पत्नी पार्वती, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी देवराज और अन्य 6 लोगों के खिलाफ यह शिकायत की गई है।

यह शिकायत सोशल ऐक्टिविस्ट स्नहेमयी कृष्णा ने दर्ज कराई है। मल्लिकार्जुन स्वामी देवराज को मूल जमीन का मालिक बताया जा रहा है, जिन्होंने अपनी बहन यानी सिद्दारमैया की पत्नी को गिफ्ट में वह जमीन दी थी।
यह शिकायत मैसूर के विजयनगर थाने में दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने इस कथित जमीन घोटाले में डिप्टी कमिश्नर, तहसीलदार, डिप्टी रजिस्ट्रार और एमयूडीए के अधिकारियों के भी कथित रूप से शामिल होन का आरोप लगाया है।
फर्जी दस्तावेज के आधार पर करोड़ों की जमीन हड़पने की शिकायत
पुलिस में शिकायत के साथ ही इस मामले में कर्नाटक के राज्यपाल, मुख्य सचिव और राजस्व विभाग के प्रिंसिपल सचिव को भी चिट्ठी लिखी गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर और करोड़ों रुपए की जमीन हड़पकर एमयूडीए के साथ धोखाधड़ी की गई है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने की निष्पक्ष जांच की मांग
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी इसे 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला बताकर निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती के नाम पर बहुत ही बेशकीमती जमीन ट्रांसफर होने को लेकर सिद्दारमैया पर निशाना साधा था।
सीबीआई को देने से डर क्यों रहे हैं- बीजेपी
बीजेपी इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर रही है, लेकिन कांग्रेस सरकार इससे हिचक रही है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोका ने एक्स पर सीएम से सवाल किया है, '..अगर आप में जरा सी भी ईमानदारी है, अगर आपकी कोई अंतर्रात्मा है, एमयूडीए स्कैम को तत्काल सीबीआई जांच के लिए सौंप दीजिए। जब उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है तो आप इसे सीबीआई को देने से डर क्यों रहे हैं...?'
वे सबकुछ सीबीआई को क्यों सौंपना चाहते हैं- मुख्यमंत्री
वहीं अपनी सफाई में सिद्दारमैया का कहना है, 'प्लॉट इस समय होल्ड पर है और सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ है। प्लॉट आवंटन में जो शामिल थे, उनका ट्रांसफर हो चुका है और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एक फाइनल निर्णय लिया जाएगा।' वहीं भाजपा के आरोपों और सीबीआई जांच की मांग पर उनकी सफाई है, 'वे सबकुछ सीबीआई को क्यों सौंप देना चाहते हैं?'
कांग्रेस के कार्यकाल में कोई घोटाला नहीं- डीके शिवकुमार
इस मामले में उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी सिद्दारमैया के बचाव में कुद पड़े हैं। उन्होंने एमयूडीए की ओर से जमीन आवंटन में किसी तरह के घोटाले के आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है।
उनके मुताबिक कांग्रेस के कार्यकाल में किसी भी तरह का घोटाला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'प्रदेश ने जितने भी घोटाले देखे हैं, वे बीजेपी के कार्यकाल के दौरान हुए हैं। हम सत्र के दौरान सभी आरोपों का जवाब देंगे।'












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