Karnataka CM: डीके ने लोकसभा चुनाव में 20 सीटें जीतने का किया है दावा, कांग्रेस को 3 जातियां दे सकती हैं झटका
कर्नाटक कांग्रेस में जातिगत आधार पर सीएम पोस्ट के लिए जिस तरह की लड़ाई चली है, उससे लोकसभा चुनाव में पार्टी की बड़ी जीत के मंसूब को झटका लग सकता है। तीन जातियां नाराज हो सकती हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस की बड़ी जीत पार्टी के लिए जितनी उत्साहित करने वाली है, उसका भविष्य उतना ही सुकून देने लायक नहीं लग रहा है। खासकर जिस तरह से इसबार राज्य में जातिगत आधार पर मुख्यमंत्री पद के लिए गोलबंदी हुई है, वह इसके राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत बेहतर नहीं कहा जा सकता है।
डीके शिवकुमार लोकसभा को लेकर किया है बड़ा दावा
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने चुनाव परिणाम आते ही दावा किया था कि कर्नाटक में कांग्रेस को 20 सीटें दिलाने को वह चुनौती के तौर पर लेते हैं। लेकिन, उसके बाद के दो-तीन दिन के घटनाक्रम ने पार्टी में जातिगत दरारा को स्पष्ट रूप से चौड़ा करने का काम किया है। राज्य में लोकसभा की 28 सीटें हैं।
चार जातिगत कैंपों की ओर से सीएम पद की दावेदारी
फिलहाल सूत्रों से जानकारी है कि आलाकमान ने सिद्दारमैया को सीएम बनाने पर ही अपना फैसला सुनाया है। इससे पहले जब बेंगलुरु से दिल्ली तक डीके शिवकुमार और सिद्दारमैया में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए खींचतान चल रही थी, तब पार्टी में कम से कम दो और भी जातिगत कैंपों की ओर से खुलकर इस पद दावेदारी की गई। सिद्दारमैया कुरुबा जाति से आते हैं और शिवकुमार वोक्कालिगा समाज से और दोनों ही जातिगत कैंपों की ओर से साफ अल्टीमेटम दिया गया है।
सभी जातियों की ओर से पार्टी नेतृत्व को अल्टीमेटम
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुरुबरा संघ ने कांग्रेस हाई कमान को साफ धमकी दी कि यदि सिद्दारमैया विधायक दल के नेता नहीं चुने जाते तो वह विरोध शुरू कर देंगे। दूसरी ओर वोक्कलिगा समाज से आने वाले डीके शिवकुमार के लिए वोक्कालिगा संघ ने पहले दिन से बैटिंग की है।
कुरुबरा संघ और वोक्कालिगा संघ की ओर से धमकी
कुरुबरा संघ के महासचिव डी वेंकटेश्वरमूर्ति ने कहा था, 'अभी तक हमने प्रदर्शन की कोई योजना नहीं बनाई है, लेकिन अगर कांग्रेस हाई कमान ने सिद्दारमैया को नजरअंदाज किया तो हम ऐसा करेंगे।' वहीं वोक्कालिगा संघ ने भी धमकी दे रखी है कि अगर डीके को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो वह विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे।
दलित कैंप की ओर से भी की गई सीएम पद की दावेदारी
उधर दलित कैंप की ओर से भी सीएम पद की मांग खुलकर की गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी सीएम जी परमेश्वरा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा है कि 'कांग्रेस को वोट देने वाले दलितों के लिए यह स्वाभाविक है कि वह प्रतिनिधित्व की मांग करें।....'
लिंगायतों की ओर से खड़गे को लिखी गई चिट्ठी
कांग्रेस नेतृत्व को टेंशन देने वाला चौथा ग्रुप लिंगायतों का है, जो यूं तो बीजेपी का समर्थक रहा है, लेकिन अबकी बार लिंगायत बहुल सीटों पर भी बीजेपी की करारी हार हुई है। दिग्गज कांग्रेस एमएलए शमनूर शिवशंकरप्पा की अगुवाई में एक लिंगायत समूह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़ेगे को चिट्ठी लिखकर लिंगायत को ही सीएम बनाने की मांग की।
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सिद्दारमैया के नाम पर मुहर, फिर बाकियों का क्या?
लिंगायत मुख्यमंत्री की दावेदारी प्रदेश में हमेशा से होती रही है, क्योंकि इनकी आबादी सभी जाति समूहों में सबसे ज्यादा मानी जाती है।अब अगर कांग्रेस नेतृत्व ने यदि पूर्व सीएम और कुरुबा नेता सिद्दारमैया के नाम पर मुहर लगा दी है तो बाकी जातिगत कैंपों से क्या कहेगी?
क्योंकि, जातिगत आधार पर इस तरह की दावेदार पार्टी के भविष्य के चुनावी सेहत के लिए ठीक नहीं लग रही है। ऊपर से चुनौती खुद ही लोकसभा चुनाव में 20 सीटें जीतने की ले रखी है।












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