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कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया का भाजपा पर तीखा हमला, कहा- 'राहुल गांधी के आरक्षण बयानों पर झूठ फैला रही भाजपा'

Karnataka News: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को भाजपा नेताओं की आलोचना करते हुए उन पर राहुल गांधी द्वारा दिए गए आरक्षण संबंधी बयानों को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। सिद्धारमैया ने उनके विरोध की तुलना कसाई द्वारा पशु क्रूरता का विरोध करने से की है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि जब पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू की थी तो भाजपा ने कमंडल आंदोलन चलाया। जिसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के जरिए लोगों को भ्रमित करना था।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक में भाजपा ने स्थानीय निकायों में आरक्षण का विरोध किया था और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका भी दायर की थी। यह याचिका स्वर्गीय न्यायमूर्ति रामा जॉइस के नेतृत्व में दायर की गई थी। सिद्धारमैया ने कहा कि भाजपा हमेशा से देशभर में आरक्षण नीतियों का विरोध करती आई है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में सिद्धारमैया ने कहा कि भाजपा नेताओं के पास राहुल गांधी के बयान को सही ढंग से समझने की क्षमता और बुद्धि नहीं है।

siddaramaiah

उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, रोजगार और संसाधनों तक समान अवसर सुनिश्चित करना है। यह सिर्फ राहुल गांधी की बात नहीं है। मैं भी इसके लिए खड़ा हूँ। इसे आरक्षण विरोधी बयान कैसे माना जा सकता है।

आपको बता दें कि राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिका के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में बातचीत के दौरान भारत में आरक्षण के भविष्य पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि जब भारत एक निष्पक्ष देश बन जाएगा। तब हम आरक्षण समाप्त करने के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन फिलहाल भारत एक निष्पक्ष देश नहीं है।सिद्धारमैया ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे देश में मौजूद सामाजिक असमानता के लिए जिम्मेदार हैं।

सिद्धारमैया ने कहा कि भाजपा की वैचारिक जननी आरएसएस ने अपनी स्थापना के बाद से ही जाति व्यवस्था का समर्थन किया है। आज जागरूकता बढ़ने के कारण भाजपा नेताओं में आरक्षण का खुलकर विरोध करने का साहस नहीं है।

सीएम सिद्धारमैया ने सुप्रीम कोर्ट की जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिश को भी रेखांकित किया। ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या समान अवसर प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नेता और केंद्र सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध हैं तो उन्हें तुरंत देशव्यापी जाति जनगणना करनी चाहिए। उनका मानना है कि यह जनगणना यह निर्धारित करने के लिए आवश्यक है कि आरक्षण का लाभ समाज के सबसे पिछड़े वर्गों तक पहुंच रहा है या नहीं।

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