Caste Census: कर्नाटक में कांग्रेस को जाति जनगणना की रिपोर्ट जारी करने से कौन रोक रहा है?

Karnataka Politics: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से जाति जगणना का राग जोरदार तरीके से छेड़ा है। यूपी के प्रयागराज में उन्होंने संविधान सम्मान सम्मेलन नाम के एक कार्यक्रम में जाति जनगणना की फिर से जबर्दस्त तरीके से वकालत की है।

लेकिन, तथ्य यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पास जाति जगणना से जुड़ी एक रिपोर्ट लंबित पड़ी हुई है, लेकिन वह उसे जारी करने में हिचकिचाती रही है।

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राहुल के 'मिशन' को निष्क्रिय क्यों कर रहे हैं सिद्दारमैया?
राहुल गांधी ने प्रयागराज में कहा है कि 'जाति जनगणना उनके जीवन का मिशन है।' वह ये भी कह रहे हैं कि 'मैं इसकी राजनीतिक कीमत चुकाने के लिए तैयार हूं।'

एक तरफ राहुल इतनी बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, दूसरी तरफ सिद्दारमैया सरकार इस विषय पर पूरी तरह से निष्क्रिय है, जिसने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है।

कर्नाटक सरकार की देरी से राहुल की विश्वसनीयता पर सवाल!
कर्नाटक कांग्रेस के भीतर कुछ लोगों को अब लग रहा है कि कर्नाटक जाति जनगणना और सामाजिक आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट जारी होने में जितनी देरी होगी, इससे राहुल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे।

10 महीने से ज्यादा हो चुके हैं। 9 अक्टूबर, 2023 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने जाति जनगणना को पार्टी का आधिकारिक स्टैंड घोषित किया था। वहीं पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने भी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट जल्द जारी करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने फिर भी हिम्मत दिखाने से अबतक परहेज ही किया है।

कर्नाटक के एक कांग्रेस नेता का कहना है, 'सिद्दारमैयाजी अभी भी इंतजार कर रहे हैं, जबकि उनकी सरकार के दूसरे कार्यकाल के भी 15 महीने गुजर चुके हैं, कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष को जाति जनगणना के नतीजों को औपचारिक तौर पर सौंपने के लिए कहें, जिसे सिद्धारमैयाजी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2014-15 में शुरू करवाया था।'

रिपोर्ट से कर्नाटक में राजनीतिक संतुलन बिगड़ने की आशंका?
लेकिन, जब कांग्रेस नेता से यह सवाल हुआ कि राहुल गांधी मुख्यमंत्री से क्यों नहीं कह रहे हैं कि आयोग की रिपोर्ट जारी करवाएं तो उनके पास स्पष्ट जवाब नहीं था। हालांकि, ज्यादातर लोग मानते हैं कि सीएम सिद्दारमैया जब चाहें रिपोर्ट जारी हो सकती है, लेकिन उनका कहना है कि देरी के पीछे इस रिपोर्ट में छिपे कुछ ऐसे तथ्य हो सकते हैं, जिससे राजनीतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा है।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट के संभावित नतीजों को लेकर कर्नाटक कैबिनेट और पार्टी के अंदर गहरे मतभेद हैं। उन्हें डर है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर पार्टी की सरकार को कुछ प्रमुख जातियों की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है और शायद यही वजह है कि कांग्रेस सरकार उसे जारी करने से अबतक हिचकिचाती रही है।

रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस सरकार में ही दिख रहे हैं मतभेद!
कर्नाटक के एक नेता के मुताबिक पिछले कार्यकाल में जब सिद्दारमैया ने जाति जनगणना करवाने का फैसला लिया था, तब सरकार में अकेले उनकी तूती बोलती थी। लेकिन, अब रिपोर्ट जारी करने से पहले उन्हें अन्य मंत्रियों और नेताओं को भी विश्वास में लेना पड़ रहा है, जिनमें से संभवत: कई को अनौपचारिक तौर पर रिपोर्ट की डिटेल मालूम है।

पहले से कुछ रिपोर्ट आती रही हैं, जिसमें दावा किया गया है कि संभावित तौर पर इसमें कर्नाटक की दोनों ही प्रभावशाली समुदायों लिंगायत और वोक्कालिगा की संख्या कम दिखाई गई है और इसी वजह से कांग्रेस सरकार के हाथ बंधे हुए दिख रहे हैं।

सिद्दारमैया अपने बचाव में ले सकते हैं कोई बड़ा फैसला
हालांकि, अभी मैसूर अर्बन एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA Scam) से जुड़े जमीन घोटाले में सिद्दारमैया के नाम आने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।

ऐसे में अटकलें लग रही हैं कि हो सकता है कि वह जाति जनगणना की रिपोर्ट को अपने राजनीतिक करियर को बचाने के लिए एक सियासी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन, जबतक यह रिपोर्ट अटकी रहेगी, राहुल गांधी कि विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे।

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