भाजपा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार किया है। इसको लेकर भाजपा ने शिकायत दर्ज कराई है।
दरअसल यतींद्र सिद्धारमैया ने दावा किया है कि चुनाव से पहले मडीवाला समुयाद के लोगों को लोहे का बक्सा और कुकर देने का वादा किया। उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जोकि काफी वायरल हुआ, जिसके बाद वह विवादों में घिर गए।

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी शिकायत में कहा है कि हाल ही में सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र का बयान सामने आया है। जिसमे उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया है कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र जहां से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया विधायक हैं, वहां हजारों कुकर और लोहे के बक्से बांटे गए ताकि इससे उन्हें चुनाव जीतने में मदद मिल सके।
यह चौंकाने वाले बात है कि मुख्यमंत्री ने किस तरह से वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव जीता है। इस तरह के तरीके अपनाकर चुनाव जीतना मुख्यमंत्री के लिए बिल्कुल सही नहीं है। हम अपील करते हैं कि चुनाव आयोग सिद्धारमैया के चयन को रद्द किया जाए। इससे अच्छा सबूत और क्या हो सकता है जहां खुद ये इसे स्वीकार कर रहे हैं।
जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमे यतींद्र कहते हैं कि चुनाव से पहले समुदाय को मजबूत करने के लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमे हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मेरे पिता सिद्धारमैया भी शामिल हुए थे।
दावा किया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के दौरान लोगों को कुकर और लोहे का बक्सा वितरित किया गया था। यतींद्र कहते हैं कि मेरे पिता ने सुनिश्चित किया है कि नंजप्पा समुदाय को यह तोहफा वितरित किया जाए। मुझे इस कार्यक्रम में हिस्सा लेना था लेकिन मैं शामिल नहीं हो सका। इससे साफ है कि मेरे पिता इस समुदाय के साथ खड़े हैं।
वहीं यतींद्र का कहना है कि वितरित की गई वह मेरी जीत को सुनिश्चित करने के लिए था ना कि मेरे पिता की जीत के लिए। यह कार्यक्रम आचार संहिता लागू होने से पहले किया गया था। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने ने चुनाव आयोग से शिकायत की है और अपील की है कि यतींद्र के बयान का संज्ञान लिया जाए।
बता दें कि सिद्धारमैया के खिलाफ पहले ही चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई गई है। बोम्मई ने कहा कि अगर यतींद्र के दावों में ठोस सबूत नजर आते हैं तो उनके खिलाफ चुनाव आयोग को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए, यह एक गंभीर अपराध है।












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