कर्नाटक में 200 यूनिट फ्री बिजली तो जुलाई से मिलेगी, उससे पहले ही लगा जोर का झटका

कर्नाटक में मुफ्त बिजली योजना जुलाई के बिलिंग साइकिल से लागू होने वाली है। लेकिन, सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली अप्रैल से ही महंगी कर दी गई है। इसका भुगतान बकाए के साथ करना होगा।

Karnataka free Electricity

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने चुनावी वादे के मुताबिक हर महीने 200 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा तो कर दी है। लेकिन, इसके साथ ही कई ऐसी शर्तें जुड़ गई हैं, जिससे प्रति यूनिट बिजली काफी महंगी हो गई। बड़ी बात ये है कि राज्य के उपभोक्ताओं को फ्री बिजली के लिए अभी जुलाई की बिलिंग साइकिल का इंतजार करना है, लेकिन बढ़े हुए दाम अप्रैल से ही बकाए के साथ चुकाना पड़ जाएगा।

कुछ उपभोक्ताओं को बहुत महंगी पड़ेगी मुफ्त की बिजली
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्दारमैया सरकार ने राज्य में हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली उपभोक्ताओं को देने का ऐलान तो किया है। लेकिन, यह इतना भी आसान नहीं होने वाला। यह कई शर्तों के साथ लागू होने वाला है और जो बिजली फ्री यूनिट के दायरे से बाहर होगी, वह काफी महंगी हो जाएगी।

पूरा बिल आने पर ही अंदाजा लगेगा
दरअसल, कर्नाटक में उपभोक्ताओं को बिजली की फ्री यूनिट के अलावा भुगतान करना होगा। एक बिजली सप्लाई कंपनी उपभोक्ताओं के द्वारा 12 महीने में इस्तेमाल की गई बिजली के मासिक औसत के हिसाब से ही मुफ्त बिजली के अलावा 10% बढ़ाकर देगी। यानि अगर किसी की औसत मासिक खपत 100 यूनिट ही है तो उसे 110 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी। अगर खपत इससे ज्यादा होती है तो उपभोक्ता को बाकी का भुगतान करना होगा।

औसतन 70 पैसे प्रति यूनिट बढ़ गई कीमत
इस जटिल हिसाब को जबतक समझ पाएंगे, तबतक उपभोक्ताओं की उलझन बढ़ गई है। उससे भी बड़ा झटका ये है कि कांग्रेस सरकार के आए हुए लगभग दो हफ्ते ही हुए हैं और बिजली के दाम में काफी बढ़ोतरी हो गई है। बिजली आपूर्ति कंपनियों ने रेगुलेटर कर्नाटक इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (KERC) के आदेश के अनुसार सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमतों में औसतन 70 पैसे का इजाफा कर दिया है।

59 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त देना होगा
बिजली की कीमतों में यह बढ़ोतरी ईंधन और बिजली खरीद लागत को एडजस्ट करने के लिए ली जाने वाली 59 पैसे प्रति यूनिट के अतिरिक्त है। यह 1 जून से प्रभावी हो चुका है। इसको लेकर उपभोक्ताओं के कुछ वर्ग में खलबली मची हुई है और उन्हें लग रहा है कि अगले महीने जो बिल आएगा, उसमें बकाया भी जुड़ेगा तो वह बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।

अप्रैल से ही करना होगा बढ़े हुए दाम का भुगतान
बिजली क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एडजस्टमेंट लागत हर महीने ऊपर-नीचे हो सकता है। क्योंकि, यह ऊर्जा की उपलब्धता और बाजार दर पर निर्भर है। सीधी सी बात है कि मुफ्त बिजली योजना भाग्य ज्योति जुलाई के बिलिंग साइकिल से लागू होने जा रही है, लेकिन सभी वर्ग के उपभोक्ताओं की बिजली अप्रैल महीने से ही महंगी कर दी गई है।

कर्नाटक में औसतन 1.29 रुपए प्रति यूनिट महंगी कर दी गई बिजली
इन बढ़ोतरियों का परिणाम ये होगा कि सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को औसतन 1.29 रुपए प्रति यूनिट ज्यादा का भुगतान करना होगा। अगर उद्योगों और कारोबार जगत की बात करें तो उन उपभोक्ताओं को और भी बड़ी चपत लगने की तैयारी करनी पड़ सकती है।

छोटे-लघु उद्योगों के लिए महामारी के बाद बड़ा झटका
बेंगलुरु में लघु उद्योग संघ कसिया में एनर्जी कमिटी के चेयरमैन श्रीनाथ भंडारी का कहना है कि मुश्किल से चार महीने हुए हैं, जब छोटे-मोटे मैन्युफैक्चरर कोविड महामारी की मार से उबरे हैं। अभी जो बिजली की कीमतें बढ़ी हैं, उसकी वजह से बेंगलुरु में बनने वाले एक्सपोर्ट आइटम वैश्विक बाजार में टिक नहीं पाएंगे। बेंगलुरु में करीब 20,000 स्मॉल स्केल यूनिट हैं, जबकि पूरे राज्य में इनकी संख्या करीब 6.5 लाख है।

विपक्षी बीजेपी ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए 2.89 फीसदी प्रति यूनिट ज्यादा वसूलने वाली है।

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