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Kargil Vijay Diwas पर सेना का डिजिटल तोहफ़ा, अब शहीदों को ऑनलाइन दें श्रद्धांजलि, जानिए पूरा प्रोसेस

Kargil e-Shradhanjali Portal: कारगिल विजय दिवस भारतीय सैन्य इतिहास में गर्व और वीरता का प्रतीक है। यह दिन उन बहादुर सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। अब इस गौरवपूर्ण अवसर को और व्यापक जन-भागीदारी से जोड़ते हुए भारतीय सेना ने तकनीक की मदद से एक नई पहल की है। सेना ने 'ई-श्रद्धांजलि पोर्टल' लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से देशवासी डिजिटल रूप में शहीदों को नमन कर सकते हैं।

यह पहल न केवल युवाओं और नागरिकों को सैन्य इतिहास से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि यह वीरों की स्मृति को सम्मानित करने का आधुनिक तरीका भी बनकर उभरा है।

Kargil e-Shradhanjali Portal

इन योजनाओं का किया गया शुरुआत

ई-श्रद्धांजलि पोर्टल (e-Shradhanjali Portal)

अब नागरिक घर बैठे ही शहीद जवानों को डिजिटल श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। मेमोरियल तक पहुंचने की बाध्यता खत्म करते हुए यह पोर्टल जनता को सैन्य बलों के बलिदान से जोड़ने का एक संवेदनशील प्रयास है।

QR कोड आधारित ऑडियो गेटवे

इस पहल के तहत 1999 के कारगिल युद्ध की वीरगाथाओं को QR कोड स्कैन करके सुना जा सकता है।
सेना अधिकारी के अनुसार, "यह एक वर्चुअल म्यूजियम जैसा अनुभव होगा, जहां लोग हेडफोन के माध्यम से शौर्य की कहानियां सुन पाएंगे।"

इंडस व्यूपॉइंट (Indus Viewpoint)

यह स्थान आम नागरिकों को बटालिक सेक्टर के एलओसी (LoC) तक जाने की अनुमति देगा, जिससे वे महसूस कर सकें कि हमारे सैनिक कितनी विषम परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। बटालिक, जो कि कारगिल युद्ध का प्रमुख रणक्षेत्र रहा है, अब एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

ई-श्रद्धांजलि पोर्टल से ऑनलाइन श्रद्धांजलि कैसे दें?

पोर्टल पर जाएं

सबसे पहले, भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए www.eshradhanjali.gov.in वेबसाइट पर जाएं।

शहीद जवान का नाम खोजें

पोर्टल पर दिए गए सर्च बॉक्स में शहीद सैनिक का नाम, रैंक, या युद्ध का नाम (जैसे कारगिल युद्ध) दर्ज करें।

प्रोफाइल पर क्लिक करें

सर्च परिणामों में संबंधित शहीद का विवरण आएगा। उस पर क्लिक करके आप उनके संक्षिप्त जीवनवृत्त, शौर्यगाथा, और फोटो देख सकते हैं।

श्रद्धांजलि अर्पित करें

'श्रद्धांजलि दें' या "Pay Tribute" बटन पर क्लिक करें। आप वहां एक संदेश, नाम, और यदि चाहें तो फोटो भी जोड़ सकते हैं।

साझा करें

श्रद्धांजलि देने के बाद आप इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं ताकि और लोग भी प्रेरित हो सकें।

वॉर मेमोरियल पहुंच कर केंद्रीय मंत्री ने दी श्रद्धांजलि

भारत की सैन्य इतिहास में 26 जुलाई एक ऐसा दिन है जो साहस, बलिदान और अदम्य जज़्बे की गाथा को सजीव करता है। कारगिल विजय दिवस, न केवल उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का दिन है जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी, बल्कि यह देश की अस्मिता और अखंडता की रक्षा के लिए अडिग खड़े रहने वाले सपूतों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी अवसर है।

इसी अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने द्रास वॉर मेमोरियल पर जाकर उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

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मुंहतोड़ जवाब मिलेगा- सेना प्रमुख

26वें कारगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, 'जो भी ताकतें भारत की संप्रभुता, अखंडता और जनता को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचेंगी, उन्हें भविष्य में भी मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। यही न्यू नॉर्मल इंडिया है।" उन्होंने कहा कि भारत अब आधुनिक, विकसित और भविष्य-केंद्रित शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है।

जनरल द्विवेदी ने बताया, 'मैंने नई ब्रिगेड की स्थापना को स्वीकृति दी है, जिसमें मेकनाइज्ड इन्फेंट्री, बख्तरबंद इकाइयां, तोपखाना, स्पेशल फोर्सेस, और लॉजिस्टिक व कॉम्बैट सपोर्ट शामिल होंगे। स्पेशल फोर्सेस की एक नई इकाई भी स्थापित की गई है जो सीमा पर दुश्मन को चौंकाने के लिए हर समय तैयार रहेगी। इससे हमारी सैन्य ताकत कई गुना बढ़ेगी।'

विकसित भारत 2047 में सेना की भूमिका

जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सेना सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं कर रही, बल्कि विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में भी अहम भूमिका निभा रही है, खासकर लद्दाख जैसे सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्यों में सहयोग कर रही है।

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