'सर हिमालय का न झुकने दिया': 19 साल के योगेंद्र यादव को लगी थीं 17 गोलियां फिर भी दुश्मनों को भून डाला

'सांस थमती गई नब्ज जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गये सर हमारे तो कुछ गम नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया ...'

कुछ ऐसा ही नजारा था आज से 26 साल पहले जब हमारी धरती पर दुश्मनों ने अपने नापाक कदम जमाने की कोशिश की थी, तब हमारे रणबांकुरों ने ना केवल उन्हें धूल चटाई बल्कि उन्हें ऐसा खदेड़ा, जिसे वो कभी भी भूल नहीं पाएंगे। जब-जब मां भारती की ओर दुश्मनों ने अपनी गंदी निगाहों से देखा है तब-तब देश के सपूतों ने उन आंखों को ही फोड़ दिया है । ऐसे ही एक वीर का नाम है 'योगेंद्र सिंह यादव' , जिन्होंने 19 साल की उम्र में उस अदम्य साहस का परिचय दिया जिसे शब्दों में बयां कर पाना भी काफी मुश्किल है।

'ना आवाज निकल रही थी और ना ही कुछ समझ आ रहा था'

'ना आवाज निकल रही थी और ना ही कुछ समझ आ रहा था'

यादव के शरीर में 17 गोलियां लगी थी, पूरा शरीर दर्द और खून से लहू-लुहान था, ना आवाज निकल रही थी और ना ही कुछ समझ आ रहा था और शायद इसी वजह से दुश्मन को भी लगा कि वो मर चुके हैं और वो आगे बढ़ गया लेकिन उसे क्या पता कि जिसके पास का मां भारती का आशीष हो, वो कैसे इतनी जल्दी दुनिया को अलविदा कह सकता है, योंगेंद्र यादव के साथ भी वो हुआ और उन्होंने उस हालत में भी ग्रेनेड उठाकर दुश्मनों का खात्मा कर दिया।

पांच रुपए के सिक्के ने बचाई जान

पांच रुपए के सिक्के ने बचाई जान

जब ये बात वीर योगेंद्र सिंह यादव ने सोनी टीवी के मशहूर शो' कौन बनेगा करोड़पति' में बताई तो हर किसी की आंखें छलछला उठीं, रोगटें खड़े हो गए और सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उन्होंने बताया कि 'हम टाइगर हिल द्रास सेक्टर में लड़ रहे थे। दोनों तरफ आतंकवादियों के बंकर थे। मुझ पर ग्रेनेड फेंका गया और फायरिंग हुई। मैं बुरी तरह से घायल हुआ, मेरे साथी मेरी आंखों सामने शहीद हो गए। दुश्मनों ने हमें चारों तरफ से घेर लिया था, हम पर गोलियां चलाई गईं लेकिन किस्मत थी कि ऊपर छाती वाली पॉकेट में रखे पर्स में पांच रुपए के सिक्के भी थे। गोली उन सिक्कों से टकराई और मेरे सीने तक नहीं पहुंची, मैं गिर पड़ा, उन्हें लगा कि मैं जिंदा नहीं हूं।'

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    चार-पांच को वहीं भून दिया...

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    लेकिन तब मैंने अपने पास पड़े हैंड ग्रेनेड से पिन निकालकर उन पर ऊपर फेंका और पास पड़ी राईफल से चार-पांच को वहीं भून दिया और फिर मुझे कुछ याद नहीं, आंख खुली तो अस्पताल में था और शरीर में काफी दर्द हो रहा था, पूछने पर पता चला कि शरीर में सारे जगह फ्रैक्चर है और वो श्रीनगर के एक अस्पताल में 3 दिन से भर्ती हैं और तभी उन्हें सूचना दी गई कि टाइगर हिल पर सफलतापूर्वक भारत के सैनिकों ने तिरंगा फहरा दिया है।

    19 साल की उम्र में मिला परमवीर चक्र

    19 साल की उम्र में मिला परमवीर चक्र

    मालूम हो कि यादव 19 साल की उम्र में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के सैनिक हैं।गौरतलब है कि 1999 में कारगिल-द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों से भारत को वापस लेने के लिए भारतीय सेना द्वारा 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया गया था। सेना के जवानों ने 26 जुलाई 1999 को पाकिस्तान को हराया था। तब से देश के इन महान वीरों की याद में हर साल 26 जुलाई को 'कारगिल विजय दिवस' मनाया जाता है।

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