मिलिए मां-बाप को कंधे पर बैठाकर 'कांवड़ यात्रा' कराने वाले बेटे से, लोगों ने कहा- '21 वीं सदी के श्रवण कुमार'
नई दिल्ली, 21 जुलाई। इन दिनों भगवान शिव का प्रिय मास सावन चल रहा है, इस दौरान 'कांवड़ यात्रा' भी हो रही है, वैसे तो शिवभक्ति में डूबे भक्तों की कई तस्वीरें और वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं लेकिन एक तस्वीर ने हर किसी को भावविभोर कर दिया है और वो तस्वीर है आज के श्रवण कुमार की। दरअसल इन दिनों सोशल पर एक ऐसे कांवड़िए की तस्वीर चर्चा का विषय बनी है, जो अपने बुजुर्ग माता-पिता की पालकी को कंधों पर रखकर 'कांवड़ यात्रा' करा रहा है।

आईपीएस अशोक कुमार ने शेयर किया है Video
इस कांवड़िए के वीडियो को आईपीएस अशोक कुमार ने शेयर किया है। उन्होंने इसके बारे में ट्वीटर पर लिखा है कि 'जहां आजकल बूढ़े मां-बाप का तिरस्कार होता है, उन्हें घर से निकाल दिया जाता है या अपने साथ रहने नहीं दिया जाता.. वहीं आज इसका विपरीत दृश्य देखने को मिला। लाखों शिवभक्तों के बीच एक श्रवण कुमार भी है जो पालकी में अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को लेकर कांवड़ यात्रा पर आया है..मेरा नमन!' हालांकि कांवड़िए की पहचान नहीं हो पाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ Video
आईपीएस अशोक कुमार के शेयर करते ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग इस पर कमेंट करने लगे। कुछ यूजर्स ने लिखा कि ' सच में नमन है ऐसे बेटे को', तो किसी ने लिखा कि ' वाह सर जी यह दृश्य को देखकर मन गदगद हो गया, कभी स्कूल में किताब में पढ़ा था जो आज साक्षात देख लिया, कितने भाग्यशाली हैं, ऐसे मां बाप , जिनको ऐसा पुत्र प्राप्त हुआ। ||ॐ नमः शिवाय ॐ||'

'21 वीं सदी के श्रवण कुमार'
तो किसी ने लिखा कि '21 वीं सदी के श्रवण कुमार', तो किसी ने लिखा "सलाम।" आपको बता दें कि इस वायरल वीडियो को अभी तक 10 हजार से अधिक बार देखा जा चुका है।
श्रवण कुमार ही पहले कांवड़ यात्री थे
मालूम हो कि त्रेता युग में श्रावण मास में ही श्रवण कुमार ने कांवड़ यात्रा शुरू की थी। इस बात का उल्लेख 'वाल्मीकि रामायण' में भी है और इस तरह से श्रवण कुमार ही पहले कांवड़ यात्री थे।

'माता-पिता भगवान से कम नहीं'
श्रवण कुमार जैसा बेटा पूरी दुनिया में दूसरा नहीं हुआ। कहते हैं मां-बाप के पैरों में जन्नत होती है और उसी जन्नत को उन्होंने पूजा था लेकिन आज के युग में ऐसा बेटा हो सकता है, ये सोचना भी मुश्किल है लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल इस क्लिप ने ये साबित कर दिया कि दुनिया में अभी भी ऐसे लोग हैं, जिनके लिए उनके माता-पिता भगवान से कम नहीं।
अनाज, पानी और नमक का सेवन वर्जित
गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा काफी कठिन होती है, इस यात्रा में कांवड़ व्रत रखता है और नंगे पैर चलता है। यात्रा के दौरान अनाज, पानी और नमक का सेवन सख्त वर्जित होता है। कांवरिया बस भोलेनाथ का नाम जपते हुए आगे बढ़ते रखते हैं।
26 जुलाई तक चलेगी 'कांवड़ यात्रा'
आपको बता दें कि इस बार 'कांवड़ यात्रा' 14 जुलाई से शुरू हुई है और ये 26 जुलाई तक चलेगी। दो साल तक कोरोना की वजह से कांवड़ यात्रा नहीं हो पाई थी, इसलिए इस बार भक्तगण दोगुने जोश से इस यात्रा में भाग ले रहे हैं।
पवित्र गंगा से शिव का अभिषेक
आपको बता दें कि शिव भक्त हरिद्धार से पवित्र गंगा को कांवड़ में लेकर पदयात्रा के जरिए अपने घर वापस लौटते हैं इसलिए इस यात्रा को 'कांवड़ यात्रा' बोला जाता है। ये पवित्र नगरी से लाए गंगाजल से अपने शिव का अभिषेक करते हैं, तब जाकर इनकी पूजा पूरी होती है।












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