उदयपुर में कन्हैया लाल हत्याकांड: राजस्थान में कर्फ़्यू का मतलब क्या है?

राजस्थान के उदयपुर में निकाली गयी रथ यात्रा
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राजस्थान के उदयपुर में निकाली गयी रथ यात्रा

2 अप्रैल को करौली, 2 मई को जोधपुर और 28 जून को उदयपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा की गूंज पूरे भारत में सुनाई दी.

ज़ाहिर है, अपने मध्यकालीन इतिहास और संस्कृति के अलावा शांति के लिए जाना गया राजस्थान अब लगातार बड़ी घटनाओं के लिए एकाएक चर्चा और सोशल मीडिया ट्रेंड में आ जाता है.

लेकिन लगातार तीन महीनों में इन तीन बड़ी घटनाओं के बावजूद राजस्थान प्रशासन का रवैया अब भी उतना सख़्त नज़र नहीं आ रहा जितना इन हालातों में होना चाहिए.

सवाल उठ रहे हैं कि सख़्ती सिर्फ़ कागज़ों और सरकारी निर्देशों में ही क्यों की जा रही है?

क्या राज्य की सुरक्षा से ज़्यादा ज़रूरी भी कोई कार्यक्रम या आयोजन हो सकते हैं जहां हज़ारों की संख्या में भीड़ एकजुट होने दी जाए?

उदयपुर में धारा 144 लागू

कन्हैया लाल हत्याकांड के बाद से ही उदयपुर शहर के सात थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया है. धारा 144 लागू है और चप्पे चप्पे पर पुलिस बल तैनात हैं.

कन्हैया लाल की हत्या की रात से ही पूरे राजस्थान में मोबाइल इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गईं थी और उदयपुर में कर्फ़्यू लगा दिया गया था.

इसके अगले दिन दोपहर में उदयपुर के अशोक नगर इलाक़े में कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार होना था. कर्फ़्यू के बावजूद, प्रशासन के सामने, क़रीब 2,000 लोग मोटरसाइकिलों पर कन्हैया लाल के नाम के नारे लगाते हुए श्मशान घाट तक पहुंचे थे.

वहां से निकलते हुए मेहराज सिंह से बीबीसी ने पूछा, "क्या कर्फ़्यू में छूट है?"

उनका जवाब था, "एक राजस्थानी की बर्बरतापूर्ण हत्या की गई है. उसको श्रद्धांजलि देने से कौन किसे रोक सकेगा."

कन्हैया की हत्या के तीसरे दिन भी उदयपुर में कर्फ़्यू ज़ारी था लेकिन कुछ संगठनों ने 30 जून को शहर में एक 'मौन जुलूस' निकालने की घोषणा इस वादे के साथ की कि जुलूस सिर्फ़ टाउन हॉल से निकल कर ज़िला कलेक्ट्रेट तक पहुंच के ख़त्म हो जाएगा.

यहां कुछ शरारती तत्वों ने जुलूस पर पत्थर भी फेंके. पुलिस को हल्का बल प्रयोग करते हुए भीड़ को सम्भालना पड़ा.

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उदयपुर में रैली के दौरान की एक तस्वीर
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उदयपुर में रैली के दौरान की एक तस्वीर

बदला लेने के नारे

हक़ीक़त ये थी कि इस जुलूस में लोग, ख़ास तौर से युवा और कुछ महिलाएँ, धार्मिक नारेबाज़ी कर रहीं थीं और कन्हैया लाल की हत्या का 'बदला लेने की' धमकियाँ भी दे रहीं थी.

जुलूस में हिस्सा लेने पहुंची मृगाक्षी कुमारी ने कहा, "कोई ये न समझे कि हम कायर हैं. जब-जब हमारे घर, लोगों पर हमला होगा उसका तीन गुना जवाब भी देंगे."

ग़ौरतलब है कि ये सब कुछ उदयपुर कलेक्ट्रेट के ठीक सामने वाली सड़क पर हो रहा था और 'मौन जुलूस' नारे लगाने वाले एक समूह में तब्दील हो चुका था. उदयपुर में उस समय भी कर्फ़्यू लागू था.

कोरोना वायरस के कारण बीते दो साल से उदयपुर में रथ यात्रा नहीं निकाली गई थी. लेकिन, अब ऐसे माहौल में शुक्रवार को उदयपुर में रथ यात्रा निकालने के लिए कर्फ़्यू और धारा 144 में ढील दी गई.

सवाल उठना लाज़मी है कि पुलिस प्रशासन की सख़्ती के बीच इस तनावपूर्ण माहौल में लगातार हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरना क्या उचित है?

जवाब देते हुए उदयपुर के संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट ने बीबीसी को बताया, "सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह कॉन्फिडेंट है. कलेक्टर और एसपी भी शांति व्यवस्था और सुरक्षा के लिए सभी धर्मों के लोगों से बात कर यात्रा को लेकर विश्वस्त हैं. इसलिए रथ यात्रा को परमिशन दी गई है."

राजेंद्र भट्ट ने कहा, "पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात हैं. ड्रोन से निगरानी की जाएगी. जितनी देर और जिस मार्ग से यात्रा निकलेगी उस मार्ग पर ही कर्फ्यू और धारा 144 में ढील दी गई है."

बहराल, बीबीसी की टीम ने रथ यात्रा के साथ कई घंटे बिताए. ड्रोन तो नहीं दिखा और न ही इस बात पर कोई पाबंदी दिखी कि आख़िर कितने लोग रथ यात्रा में शामिल हो सकते हैं. झुंड के झुंड अलग-अलग रास्तों से आकर यात्रा में शामिल होते हुए नाच-गाकर निकल रहे थे और आगे दूसरे शामिल हो रहे थे.

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उदयपुर में रैली के दौरान की एक तस्वीर
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उदयपुर में रैली के दौरान की एक तस्वीर

पुलिस प्रशासन पर सवाल

राजस्थान प्रदेश की बात हो तो सिर्फ़ उदयपुर में ही नहीं बल्कि साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा देख चुके कुछ दूसरे ज़िलों में भी पुलिस प्रशासन के रवैए पर सवाल उठे हैं.

करौली और जोधपुर में सांप्रदायिक दंगों के बाद कर्फ्यू लगाया गया था, धारा 144 लगाई गई और इंटरनेट बंद किया गया. दोनों ही जगह हालात कई दिनों तक तनावपूर्ण रहे. इस दौरान भी वहां भीड़ सड़कों पर उतरी, विरोध और धरने प्रदर्शन हुए.

करौली में रामनवमी पर शोभायात्रा समेत सभी धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगाई गई. लेकिन, जोधपुर में ईद से पहले की रात हुए दंगे के बाद ईद की नमाज़ की परमिशन दी गई, जिसमें हज़ारों लोग एकजुट हुए.

यहां ईद की नमाज़ के बाद फिर भीड़ अनियंत्रित हो गई और आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की शिकायतें दर्ज हुईं. आख़िरकार इन घटनाओं के बाद पुलिस को कर्फ्यू लगाना पड़ा.

फ़िलहाल पूरे राजस्थान में धारा 144 लागू है. जानकार बताते हैं कि यह पहली बार है जब पूरे राज्य में एक साथ इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

इन सबके बीच 27 जुलाई को जोधपुर में अग्निपथ योजना के विरोध में आरपीपी की युवा आक्रोश रैली हुई. इसमें क़रीब 20 हज़ार लोग एकजुट हुए. ऐसे में धारा 144 लगाने और उसका पालन कराने पर सवाल उठे हैं.

धारा 144 के बाद भी राज्य के जयपुर, सीकर, जैसलमेर, पाली, जोधपुर, उदयपुर समेत अधिकतर ज़िलों में मौन जुलूस निकालने और विरोध प्रदर्शन के लिए भीड़ एकजुट भी हुई है.

https://www.youtube.com/watch?v=nlC-H8x1cTA

निशाने पर गहलोत सरकार

उधर, राजस्थान में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने करौली में दंगों के बाद रामनवमी की शोभायात्रा पर पाबंदी लगाने और जोधपुर में दंगे के बाद सुबह ईद पर लोगों को एकजुट होने से नहीं रोके जाने और फिर हिंसा हो जाने पर कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधा था.

उदयपुर में गंभीर घटना के बावजूद तनावपूर्ण माहौल में भी रथयात्रा निकालने के पीछे राज्य सरकार पर विपक्ष का दबाव माना जा रहा है.

वरिष्ठ राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषक प्रताप भानु मेहता ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में लिखे आलेख में इस बात के लिए चेताया भी है , "चाहे वो कोई भी राजनीतिक दल हो. कन्हैया की हत्या जैसे मामले को दोबारा न होने देने के लिए एक दृढ़ विश्वास चाहिए जो सरकारों के फ़ैसलों में दिखे. तभी कुछ सार्थक हो सकेगा. वरना तो राजस्थान में भी चुनाव आने वाले हैं."

वहीं, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास कर्फ्यू और धारा 144 के बीच तनावपूर्ण माहौल में हज़ारों की संख्या में सड़कों पर लोगों के उतरने को लोगों का विरोध बता रहे हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=la77pjzmEXM

मंत्री खाचरियावास ने बीबीसी से कहा, "रथ यात्रा निकालने से किसी तरह का माहौल ख़राब नहीं होगा."

उन्होंने कहा, "लोग कन्हैया की हत्या का दरअसल विरोध कर रहे हैं कर्फ़्यू पर इसका असर नहीं पड़ेगा. इस घटना के विरोध में जितने भी बंद आयोजित हुए उसमें हिंदू-मुसलमान दोनों ने ही अपनी इच्छा से शांतिपूर्ण बंद का समर्थन किया. मुख्यमंत्री खुद उदयपुर हो कर आए हैं, जनता को सरकार पर भरोसा है. प्रदेश में किसी तरह का माहौल ख़राब नहीं होगा."

तनावपूर्ण माहौल में बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर निकलने को लेकर विपक्षी भाजपा की रणनीति भी साफ़ दिख रही है.

कर्फ्यू के दौरान जगन्नाथ रथयात्रा को इजाज़त दिए जाने की बहस पर भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार में गृह मंत्री और फ़िलहाल नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने बीबीसी से कहा, "रथयात्रा निकालने के लिए परमिशन दी गई है. नारे नहीं लगाने या जो भी नियम होंगे उसी आधार पर यात्रा निकाली गई. क्या सिर्फ़ हिंदुओं के त्योहारों पर ही कर्फ्यू लगा देना सही है?"

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