Justice Surya Kant Historical Decisions: जस्टिस सूर्यकांत के 10 ऐतिहासिक फैसलों ने हिलाई राजनीति
Justice Surya Kant Historical Decisions: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ ली। हरियाणा के छोटे से शहर हिसार के साधारण परिवार से निकले इस जज ने मेहनत और ईमानदारी से न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का रास्ता तय किया, बल्कि उनके 10 बड़े फैसलों ने केंद्र-राज्य सरकारों के बीच तीखी बहस छेड़ दी।
अनुच्छेद 370 से लेकर पेगासस जासूसी, OROP योजना, AMU के अल्पसंख्यक दर्जे, PM सिक्योरिटी चूक, प्रोफेसर महमूदाबाद की अंतरिम जमानत, भूमि अधिग्रहण के 'बेल्टिंग मेथड', सोशल मीडिया पर फ्री स्पीच, महिला सरपंच की बहाली, और बैर एसोसिएशन में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण-इन फैसलों ने राजनीतिक हलचल मचा दी। आखिर कौन हैं ये जस्टिस सूर्यकांत, जिनका कार्यकाल न्यायिक इतिहास में नया अध्याय लिख सकता है? आइए, उनके 10 फैसलों पर डालते हैं नजर, जो देश की सियासत को दिशा देने वाले साबित हुए...

Justice Surya Kant Profile: हिसार की मिट्टी से सुप्रीम कोर्ट तक: जस्टिस सूर्यकांत की प्रेरणा सोर्स
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवार गांव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने कभी कल्पना भी न की होगी कि वो हरियाणा के पहले CJI बनेंगे। 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद, 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से लॉ की डिग्री ली। उसी साल हिसार जिला कोर्ट में वकालत शुरू की, लेकिन 1985 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। संवैधानिक, सिविल और सर्विस मामलों में महारत हासिल करने वाले सूर्यकांत कई यूनिवर्सिटी, बोर्ड और बैंकों के लीगल एडवाइजर बने। उनकी काबिलियत देखते हुए हरियाणा सरकार ने उन्हें एडवोकेट जनरल बनाया।
2004 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने, जहां उन्होंने जेल रिफॉर्म्स और जेंडर जस्टिस पर लैंडमार्क फैसले दिए। 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। यहां 300 से ज्यादा बेंच पर बैठे, 1000 से अधिक फैसलों में योगदान दिया। 2024 से सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमिटी के चेयरमैन और नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। मई 2025 में NALSA चेयरमैन बने। उनका कार्यकाल सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और प्रशासनिक सुधारों पर फोकस करता दिखता है। जस्टिस सूर्यकांत का सफर मेहनत का प्रतीक है- एक ऐसे जज जो 'सोशल एम्पैथी' और 'कॉन्स्टिट्यूशनल क्लैरिटी' का बैलेंस रखते हैं।
Justice Surya Kant 10 Impactful Rulings: सियासी हलचल के सूत्रधार, जो बदल देंगे देश की दिशा
जस्टिस सूर्यकांत के फैसले न सिर्फ कानूनी किताबों में दर्ज हैं, बल्कि उन्होंने राजनीतिक बहसों को नई ऊंचाई दी। यहां उनके 10 प्रमुख फैसलों की झलक, जो केंद्र-राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने और सामाजिक बदलाव लाने वाले साबित हुए:-
- अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन (दिसंबर 2023): पांच जजों की संविधान पीठ का हिस्सा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने के केंद्र के फैसले को वैध ठहराया। इस फैसले ने विपक्षी दलों में भारी हंगामा मचाया और संघीय ढांचे पर बहस छेड़ दी।
- PM सिक्योरिटी चूक जांच समिति (2022): नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा लापरवाही पर जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अगुवाई वाली बेंच में शामिल होकर पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की। इससे केंद्र और पंजाब सरकार के बीच सियासी जंग तेज हो गई, और 'फेडरल सिक्योरिटी' मुद्दा गरमाया।
- OROP योजना को वैध ठहराया: सशस्त्र बलों के लिए 'वन रैंक वन पेंशन' योजना को संवैधानिक करार दिया। साथ ही, महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन के बराबर मौके देने पर सुनवाई की, जिसने लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया और वीर नारियों के अधिकारों पर चर्चा छेड़ी।
- AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार (2024): सात जजों की बेंच में हिस्सा लेकर 1967 के फैसले को पलट दिया। 1981 के दो जजों के रेफरल को 'बैड इन लॉ' बताते हुए चीफ जस्टिस के बेंच रोस्टर अधिकार पर जोर दिया। इससे शैक्षणिक संस्थानों के दर्जे पर नई सियासी बहस शुरू हुई।
- पेगासस जासूसी मामले में सख्त रुख (2021): पेगासस स्पाइवेयर जांच वाली बेंच में शामिल होकर साइबर एक्सपर्ट कमिटी गठित की। 'नेशनल सिक्योरिटी' के नाम पर मनमानी न करने का आदेश दिया, जिसने प्राइवेसी राइट्स पर देशव्यापी डिबेट छेड़ी और विपक्ष ने इसे 'सरकारी जासूसी' का सबूत बताया।
- प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत (21 मई 2025): हजरियाना पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट (ऑपरेशन सिंदूर) पर गिरफ्तारी के खिलाफ जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह के साथ बेंच ने अंतरिम जमानत दी। लेकिन पासपोर्ट जमा और सोशल मीडिया पर सख्त शर्तें लगाईं। कोर्ट की 'हम जानते हैं कैसे डील करें' वाली भाषा ने अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर विवाद खड़ा कर दिया।
- भूमि अधिग्रहण 'बेल्टिंग मेथड' को मान्यता (2025): राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास जमीन के मूल्यांकन में 'प्रॉक्सिमिटी प्रीमियम' को वैध ठहराया। इससे मुआवजे में पारदर्शिता आई, लेकिन आलोचकों ने छोटे किसानों को नुकसान का हवाला देकर सियासी हमला बोला।
- सोशल मीडिया पर फ्री स्पीच केस (2025): बेंच ने ऑनलाइन टिप्पणियों पर 'कॉशन एंड रेस्ट्रेंट' का आदेश दिया। 'हिडन मीनिंग' वाली पोस्ट्स को शांति भंग मानते हुए अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाया, जिसे विपक्ष ने 'सेंसरशिप' करार दिया।
- महिला सरपंच की बहाली और जेंडर बायस पर चेतावनी: पंचायती राज में एक महिला सरपंच को गलत तरीके से हटाए जाने पर बहाल किया। जेंडर बायस को नकारा, जिसने ग्रामीण लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों पर नई बहस छेड़ी।
- बैर एसोसिएशन में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण (2025): सुप्रीम कोर्ट बैर एसोसिएशन सहित सभी बार में महिलाओं को एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का ऐतिहासिक आदेश दिया। इससे लीगल फील्ड में जेंडर इक्वालिटी को झटका लगा, और राजनीतिक दलों ने इसे 'महिला सशक्तिकरण' का समर्थन किया।
क्यों खास हैं जस्टिस सूर्यकांत? न्यायिक क्रांति के नए दौर का संकेत
जस्टिस सूर्यकांत सिर्फ एक जज नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के सेतु हैं। उनके फैसले मानवाधिकार, जेंडर जस्टिस, जेल रिफॉर्म्स (जैसे कैदियों को कंजुगल विजिट्स), और पर्यावरण (चार धाम प्रोजेक्ट में सेफगार्ड्स) पर फोकस करते हैं। 80 से ज्यादा जजमेंट्स लिखे, 1000 से अधिक में योगदान।
CJI बनते ही हरियाणा को पहला CJI मिलेगा। उनका 15 महीने का कार्यकाल संवेदनशील मुद्दों- जैसे CAA, इलेक्टोरल बॉन्ड्स, और मेंटल हेल्थ डिस्क्रिमिनेशन- पर नई दिशा दे सकता है। क्या ये फैसले सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत बनाएंगे, या सियासी तनाव बढ़ाएंगे? वक्त ही बताएगा, लेकिन जस्टिस सूर्यकांत का आगमन न्याय व्यवस्था के लिए उम्मीद की किरण है।
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