Samvidhaan Hatya Diwas पर बोले मल्लिकार्जुन खड़गे, संविधान के साथ हत्या जैसा शब्द जोड़ना अंबेडकर का अपमान

Samvidhaan Hatya Diwas: भारत सरकार ने 1975 में आपातकाल लगाए जाने की याद में 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में घोषित किया है। शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उस दौरान लोकतंत्र का गला घोंटने और मीडिया को दबाने का आरोप लगाया है ।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि पिछले 10 वर्षों में आपकी सरकार ने हर दिन "संविधान हत्या दिवस" ही तो मनाया है। आपने देश के हर गरीब व वंचित तबके से हर पल उनका आत्मसम्मान छीना है। खड़गे ने भाजपा शासित राज्यों की कई घटनाओ का ज़िक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने मणिपुर की घटना के हवाले कहा कि जब मणिपुर पिछले 13 महीनों से हिंसा के चपेट में है और आप वहाँ कदम तक रखना नहीं पंसद करते...तो वो संविधान की हत्या नहीं तो और क्या है ? मोदी जी, आपको मुँह से संविधान की बातें अच्छी नहीं लगती।

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खड़गे ने अपनी लम्बी छोड़ी सोशल मीडिया पोस्ट के अंत में लिखा कि मोदी जी, BJP-RSS संविधान को मिटाकर, मनुस्मृति लागू करना चाहती है। जिससे दलितों, आदिवासियों, व पिछड़े वर्ग के अधिकारों पर कुठाराघात किया जा सके। तभी वो "संविधान" जैसे पवित्र शब्द के साथ "हत्या" जैसा शब्द जोड़कर बाबासाहेब डॉ अंबेडकर का अपमान कर रही है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आपातकाल को कांग्रेस पार्टी द्वारा लाया गया एक काला अध्याय बताया। हालांकि, विपक्ष ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे सुर्खियां बटोरने की चाल बताया है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह मौजूदा मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि 5 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपनी तानाशाही मानसिकता को दर्शाते हुए देश में आपातकाल लगाकर भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था। लाखों लोगों को अकारण जेल में डाल दिया गया और मीडिया की आवाज को दबा दिया गया। भारत सरकार ने हर साल 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय किया है। यह दिन उन सभी लोगों के विराट योगदान का स्मरण करायेगा, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के अमानवीय दर्द को झेला था।

पीएम मोदी ने अमित शाह की पोस्ट को साझा करते हुए लिखा है कि 25 जून को संविधान हत्देया दिवस देशवासियों को याद दिलाएगा कि संविधान के कुचले जाने के बाद देश को कैसे-कैसे हालात से गुजरना पड़ा था। यह दिन उन सभी लोगों को नमन करने का भी है, जिन्होंने आपातकाल की घोर पीड़ा झेली। देश कांग्रेस के इस दमनकारी कदम को भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में हमेशा याद रखेगा।

'संविधान हत्या दिवस' की घोषणा हाल ही में हुए चुनावों के दौरान विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच की गई है। इंडिया गठबंधन से जुड़े घटक दलों का दावा था कि भाजपा सरकार 400 सीटें जीतने पर संविधान और आरक्षण नीतियों के साथ छेड़छाड़ करना चाहती है।

यह भी जानना जरुरी है कि इस साल 25 जून को इमरजेंसी की 49वीं बरसी थी। इससे एक दिन पूर्व यानी 24 जून को 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में विपक्षी सांसदों ने संविधान की कॉपी लेकर शपथ ली थी। इसे लेकर पीएम मोदी ने कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा कि इमरजेंसी लगाने वालों को संविधान पर प्यार जताने का अधिकार नहीं है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 26 जून को इमरजेंसी की 49वीं बरसी पर आपातकाल को लेकर निंदा प्रस्ताव पेश किया।

ज्ञात हो कि सम्पूर्ण भारत में 25 जून 1975 को 21 महीने के लिए इमरजेंसी लगाई गई थी। उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इमरजेंसी के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद रेडियो के माध्यम से इंदिरा गांधी ने आपातकाल का ऐलान किया था।

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