One Nation One Election: 'संसद को है संविधान संशोधन का अधिकार', जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने स्पष्ट की स्थिति
One Nation, One Election: देश में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' (One Nation, One Election) को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद जेपीसी के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने इस प्रस्तावित विधेयक की संवैधानिक वैधता को लेकर उठ रहे सभी सवालों पर विराम लगा दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के पास संविधान में संशोधन करने की पूर्ण शक्ति है और यह सुधार किसी भी तरह से लोकतंत्र या संघीय ढांचे (Federal Structure) का उल्लंघन नहीं करता है। बैठक में इस मुद्दे पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें न्यायविदों ने भी अपनी राय रखी। पीपी चौधरी ने इस कदम को देश के हित में एक 'ऐतिहासिक चुनावी सुधार' करार दिया है, जो राष्ट्र की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा।

संवैधानिक वैधता पर न्यायमूर्ति की मुहर
जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बैठक के विवरण शेयर करते हुए बताया कि कई सदस्यों ने इस बिल की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) पर चिंताएं जताई थीं। हालांकि, बैठक में मौजूद जस्टिस गवई ने इन आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि यह बिल पूरी तरह से सटीक है और संसद की विधायी क्षमता (Competence of Parliament) के दायरे में आता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान में संशोधन करना संसद का मौलिक अधिकार है और यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ नहीं है।
लोकतंत्र और संघीय ढांचे को खतरा नहीं
विपक्ष द्वारा अक्सर यह तर्क दिया जाता रहा है कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से राज्यों की स्वायत्तता और संघीय ढांचे पर चोट पहुंचेगी। इस पर पीपी चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "इसमें लोकतंत्र या संघीय ढांचे का कोई उल्लंघन नहीं है। यह एक बहुत बड़ा चुनावी सुधार (Electoral Reform) है।" उन्होंने साफ किया कि यह सुधार किसी विशेष दल के लिए नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाया जा रहा है।












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