जिगिषा घोष मर्डर केस में सजा का ऐलान, दो को फांसी और एक को उम्रकैद
नयी दिल्ली। साल 2009 में साउथ दिल्ली के बहुचर्चित जिगिषा घोष हत्याकांड में सजा का ऐलान हो गया है। साकेत कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए तीन लोगों में से दो को फांसी की सजा और एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनायी है।

जिन आरोपियों को फांसी की सजा दी गई है उनके नाम रवि कपूर और अमित शुक्ला हैंं। वहीं उम्रकैद पाने वाले आरोपी का नाम बलजीत मलिक है। कोर्ट ने रवि पर 20 हजार, अमित पर 1 लाख और बलजीत पर तीन लाख का जुर्माना भी लगाया है।
क्या करती थी जिगिषा और कैसे हुई थी हत्या?
वसंत विहार इलाके में सीपीडब्ल्यूडी कॉलोनी में रहने वाली जिगिषा घोष नोएडा के एक BPO 'हेविट असोसिएट्स' में ऑपरेशनल मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। जिगिषा के पिता जगन्नाथ घोष केंद्र सरकार के नगर विकास मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर पद पर थे।
उसके साथ लाडो सराय का अमित शुक्ला और मसूदपुर का बलजीत मलिक उर्फ पॉपी भी थे। रवि की नजर कैब से उतरी अकेली लड़की पर पड़ी। उसके पास बैग था और दोनों हाथों में सेलफोन लिए वह किसी से फोन पर बात कर रही थी।
लूट के इरादे से हुआ जिगिषा का अपहरण और फिर हत्या
ड्राइविंग सीट पर बैठे रवि ने अमित को लड़की के पास यह कहकर भेजा कि पता पूछने के बहाने उसे कार तक ले आए। अमित ने जिगिषा से पता पूछा लेकिन कोई जवाब ना मिलने पर वह वापस आ गया।
उसके बाद रवि और बलजीत गए और जबरन जिगिषा को कार में घसीट लिया। जिगिषा ने जब विरोध किया था तो आरोपियों ने उसपर बंदूक तान दी थी। उसके बाद जिगिषा के कार्ड से 40 हजार रुपए निकाले गए।
तीन दिन बाद हरियाणा से मिला था जिगिषा का शव
पैसा निकाल लेने के बाद रवि ने गला दबाकर जिगिषा की हत्या कर दी। मर्डर से पहले हत्यारों ने जिगिषा के शरीर से जेवर उतार लिया था। उसके बाद हरियाणा के सूरजकुंड के पास स्थित मानव रचना इंस्टीट्यूट के पास लाश को कंटीले तारों से पार फेंक दिया गया। तीन दिन बाद उसका शव मिला था।












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