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झारखंड : पांच साल सीएम ने किया संथाल पर फोकस, रिकॉर्ड 135 दौरे क्या दिलाएंगे आदिवासी बहुल इलाके में बढ़त?

नई दिल्ली- झारखंड में 20 दिसंबर को पांचवें और आखिरी दौर के लिए वोटिंग होगी। इस चरण में संथाल परगना इलाके की 18 में से 16 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। यह क्षेत्र संथाल आदिवासी बहुल प्रदेश है और परंपरागत तौर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन, पिछले पांच वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कड़ी मेहनत से इस बार यहां का चुनावी समीकरण पूरी तरह पलट दिया है। 5 साल में रघुबर सरकार ने इस इलाके के विकास पर किस कदर फोकस किया है, इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री यहां कम से कम 135 बार दौरों पर आए हैं और हर बार यहां के विकास के लिए कोई नई सौगात देकर गए हैं। पांच वर्षों में सीएम रघुबर दास ने इस इलाके के लिए क्या-क्या काम किए हैं, इसपर चर्चा करने से पहले आइए एक नजर डाल लेते हैं कि यहां मौजूदा राजनीतिक समीकरण कैसा है।

संथाल परगना में ऐसा है चुनावी समीकरण

संथाल परगना में ऐसा है चुनावी समीकरण

20 दिसंबर को संथाल परगना की 18 में से 16 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने वाला है। ये सीटें यहां की देवघर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, दुमका और जामताड़ा जिलों में हैं। संथाल परगना क्षेत्र को झारखंड के आदिवासियों का हार्टलैंड कहते हैं। इस बार बीजेपी यहां की सभी 16 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है, जबकि गठबंधन के तहत जेएमएम-11 और कांग्रेस-4 सीटों पर मैदान में है। वहीं ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन 12 सीटों पर दांव लगा रही है। अगर, 2014 के नतीजों पर गौर करें तो इस इलाके की सभी 18 सीटों में से बीजेपी ने 7, जेएमएम ने 6 कांग्रेस ने 3 और बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) ने 2 सीटें जीती थीं। मौजूदा चुनाव में यहां तीन फैक्टर काम कर रहे हैं- पहला, जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं, झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) का रंग फीका दिख रहा है और मुख्यमंत्री रघुबर दास के काम के दम पर बीजेपी अपने पूरे रंग में नजर आ रही है। ऊपर से नए नागरिकता कानून के चलते पश्चिम बंगाल से सटे राजमहल, पाकुड़, शिकारीपाड़ा, महेशपुर और जामताड़ा में बांग्लादेशी घुसपैठियों और शरणार्थियों के गणित ने भाजपा को नैतिक ताकत दी है। क्योंकि, इन इलाकों में ऐसे लोगों की भारी तादाद मौजूद है।

संथाल परगना के विकास पर सीएम का रहा फोकस

संथाल परगना के विकास पर सीएम का रहा फोकस

राज्य में 2014 के बाद भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के बाद से मुख्यमंत्री ने संथाल परगना पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। शिक्षा हो या स्वास्थ्य। आधारभूत संरचना हो या आदिवासी विकास। पिछले पांच सालों में सभी क्षेत्रों में भरपूर विकास करने का दावा किया जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री रघुबर दास ने संथाल परगना के पांचों जिलों के कुल 135 दौरे किए। मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा 68 बार दुमका, 23 बार पाकुड़, 18 बार गोड्डा, 15 बार साहिबगंज और 11 बार जामताड़ा आकर यहां की विकास योजनाओं पर लगातार नजर रखी। इसी का नतीजा है कि क्षेत्र में व्यापाक बदलाव आया है। संथाल परगना के लोगों की जिंदगी पहले से आसान हुई है। लोगों को आवागमन के लिए अच्छी सड़कें, हर घर बिजली, हर गरीब को आवास, पेयजल और सिंचाई की सुविधाओं में इजाफा हुआ है। पहली बार यहां सभी आदिम जनजाति के परिवारों को मुख्यमंत्री डाकिया योजना तहत 35 किलो अनाज हर माह उनके घर तक पहुंचाने का कार्य सरकार ने शुरू किया गया है। इस योजना से 73,386 परिवार लाभांवित हो रहे हैं। 136 करोड़ रुपये की लागत से 2,251 आदिम जनजाति टोलों के लिए पेयजल आपूर्ति की योजना चलायी जा रही है। संथाली ओलचिपी लिपि को सरकारी मान्यता दी गयी और इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है। संथालों के प्रमुख तीर्थ स्थल लुगुबुरु घंटबाड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर यहां लगने वाले मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिया गया है।

रघुबर के विजन से आधारभूत संरचना में भारी विस्तार और सुधार

रघुबर के विजन से आधारभूत संरचना में भारी विस्तार और सुधार

पिछले पांच साल में संथाल परगना क्षेत्र में 4531.65 किमी सड़कें बनीं हैं। साथ ही 59 बड़े पुल और मुख्यमंत्री ग्राम सेतू योजना के तहत 172 पुल अलग बनाये गए हैं। लोगों को स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 1382.85 करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति योजनाएं शुरू की गयी हैं। सिंचाई के क्षेत्र में भी काफी कार्य हुए हैं। इस समय संथाल परगना में 556 सिंचाई योजनाएं चल रही हैं। 252.40 करोड़ रुपये की लागत से 59,578 हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की परियोजना पर काम जारी है। संथाल परगना में 4,25,201 नए बिजली कनेक्शन देकर हर घर बिजली पहुंचाने की योजना पूरी कर ली गयी है। निर्वाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र में 46 सब स्टेशन और ग्रिड बनवाए जा रहे हैं। साथ ही 8,680 नए ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक हर बेघर को घर देने के आह्वान को पूरा करने के लिए संथाल परगना में अब तक 1,48,848 आवासों का निर्माण कर के सौंप दिया गया है। एक लाख और आवासों का निर्माण जारी है।

सीएम की वजह से पहुंची हर जरूरतमंद को सहायता

सीएम की वजह से पहुंची हर जरूरतमंद को सहायता

भारतीय जनता पार्टी की सरकार अंत्योदय के मूल सिद्धांत पर काम करने वाली सरकार होने का दावा करती रही है। इसी को ध्यान में रखकर रघुबर दास सरकार ने सामाजिक कल्याण की दिशा में काफी कार्य किए जाने का दावा किया गया है। मसलन, हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचायी गयी है। माता-बहनों को सम्मान की जिंदगी देने के उद्देश्य से हर घर में शौचालय बनाने का कार्य झारखंड में पूर्ण कर लिया गया है। संथाल परगना का पूरा क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो चुका है। पिछले पांच साल के दौरान 7,82,443 शौचायलों का निर्माण कराया गया है। इसी प्रकार महिलाओं को धुएं और बीमारियों से बचाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत संथाल परगना के पांच जिलों में 7,90,552 महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया गया है। यही नहीं झारखंड अकेला राज्य है, जहां चूल्हा और पहली दो रिफिल भी फ्री दी जा रही है। पिछले पांच साल में 4,83,948 नए लाभांवितों को जोड़ते हुए राशन कार्ड दिए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत संथाल परगना में 16.93 लाख लोगों को गोल्डन कार्ड जारी किया जा चुका है। इस योजना से अब तक 68,283 लोग बीमारी का मुफ्त इलाज करा चुके हैं।

किसानों को मिल रही है किस्त

किसानों को मिल रही है किस्त

किसानों को छोटे-छोटे कार्यों में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना शुरू की गयी है। इसमें किसानों को न्यूनतम 11 हजार रुपये से 31 हजार रुपये तक की सहायता राशि मिल रही है। इन योजनाओं के तहत संथाल परगना के 3.47 लाख से ज्यादा किसानों को लाभ मिल रहा है। किसानों को पशुपालन में भी सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। इसके तहत 13 हजार लाभांवितों को सूकर, बकरा, कुक्कट और बतख पालन से जोड़ा गया है। साथ ही 36.85 लाख पशुओं को मुख्त टीकाकरण किया गया है।

महिला सशक्तिकरण पर रहा सीएम का पूरा जोर

महिला सशक्तिकरण पर रहा सीएम का पूरा जोर

प्रदेश की रघुबर सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए सखी मंडल का गठन कर उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा है। संथाल परगना के पांच जिलों में 6.12 लाख महिलाएं सखी मंडल से जुड़ी हैं। अब तक 1.10 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा गया है। साथ ही 23,702 सखी मंडलों को बैंक के माध्यम से लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन जिलों में 12,605 महिलाओं को 90 प्रतिशत अनुदान पर गायें उपलब्ध करायी गयी हैं। इसके साथ ही महिलाओं को संपत्ति की मालकिन बनाने के लिए एक रुपये में संपत्ति के रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। अब तक 12 हजार महिलाएं इसका लाभ उठाते हुए संपत्ति की स्वामी बन चुकी हैं। सुकन्या योजना के तहत 21,109 बेटियों को लाभ मिल रहा है। संथाल परगना में 2.47 लाख लोगों को वृद्धा पेंशन, 28,685 लोगों को आदिम जनजाति पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा भी विभिन्न पेंशन योजनाओं से राज्य में कुल 4.39 लाख से ज्यादा लोग लाभांवित हो रहे हैं।

जलमार्ग और हवाई मार्ग का विस्तार

जलमार्ग और हवाई मार्ग का विस्तार

परिवहन को सुचारू बनाने और देवभूमि बाबा बैद्यनाथ धाम तक आवाजाही को सुगम बनाने के लिए क्षेत्र में नए हवाई अड्डों के साथ ही साहिबगंज में गंगा नदी पर जलमार्ग से यातायात शुरू किया जा चुका है। अब यहां से देश के दूसरे राज्यों और बांग्लादेश-म्यांमार तक लोग जलमार्ग से व्यापार कर सकेंगे। दुमका और देवघर में हवाई अड्डों का निर्माण अंतिम चरण में है।

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