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झारखंड FLASH BACK : मांडू की पहली महिला विधायक जिनकी जीवनी ‘आपहुदरी’ है पॉलिटिक्स और सेक्स का कॉकटेल

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नई दिल्ली। झारखंड के मांडू विधानसभा सीट पर तीसरे चरण के तहत 12 दिसम्बर को मतदान होना है। इस सीट पर भाजपा के जयप्रकाश पटेल का मुकाबला झामुमो के राम प्रकाश भाई पटेल से है। दोनों सगे भाई हैं। इनके चचेरे भाई चंद्रनाथ पटेल झाविमो से मैदान में हैं। तीन भाइयों के बीच मुकाबला होने से मांडू की हर तरफ चर्चा है। लेकिन इस सीट के चर्चित होने की एक और भी वजह है। भारत की चर्चित और विवादास्पद साहित्यकार रमणिका गुप्ता मांडू की पहली महिला विधायक रही हैं। इसी वर्ष मार्च में उनका 89 साल की उम्र निधन हुआ है। रमणिका गुप्ता ने अपनी जीवनी 'आपहुदरी’ में भारत के पूर्व वित्त मंत्री नीलम संजीव रेड्डी (बाद में राष्ट्रपति भी हुए), बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय, कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष के साथ गुजरे अपने अंतरंग क्षणों का जिक्र कर के भूचाल ला दिया था। 'आपहुदरी’ पोलिटिक्स और सेक्सुअलिटी का कॉकटेल है। रमणिका गुप्ता ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, सत्ता पाने के लिए हर एक को कुछ न कुछ देना पड़ता है। पुरुष धन देते हैं और स्त्री अपना देह। पंजाब की रहनेवाली रमणिका गुप्ता कैसे झारखंड (तब बिहार) के मांडू से विधायक बनीं, इसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है।

कौन थीं रमणिका गुप्ता ?

कौन थीं रमणिका गुप्ता ?

रमणिका गुप्ता पटियाला, पंजाब की रहने वाली थीं। उनके पिता डॉक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल प्यारेलाल बेदी एक सैन्य अधिकारी थे। रमणिका शुरू से विद्रोही और आजाद तबियत वाली महिला थीं। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने 1948 में सिविल सेवा के एक अधिकारी वेद प्रकाश गुप्ता से अंतर्जातीय प्रेम विवाह कर लिया था। वेद प्रकाश उस समय अंबाला में सहायक नियोजन पदाधिकारी थे। शादी के बाद रणणिका ने बीए, एमए और बीएड की पढ़ाई पूरी की। 1960 में वेद प्रकाश असिस्टेंट लेबर कमिश्नर बन कर धनबाद आये। वेदप्रकाश के इस ताबादले ने रमणिका को धनबाद में एक नया जीवन दिया। तब तक वे दो पुत्रियों और एक पुत्र की मां बन चुकी थीं। उनके पति वेद प्रकाश चूंकि बड़े श्रम अधिकारी थे इस लिए मजदूर संघों के नेता और कोयला खदानों के मालिक अक्सर उनसे मिलने के लिए आया करते थे। राजनेताओं का भी आना-जाना लगा रहता था। महत्वाकांक्षी रमणिका धीरे-धीरे मजदूरों और ट्रेड यूनियन की राजनीति में दिलचस्पी लेने लगी। वे पढ़ी लिखी थीं और भाषण बहुत अच्छा देती थीं। कुछ समय बाद वे सक्रिय राजनीति में आ गयीं।

1968 में रमणिका हार गयीं थी मांडू उपचुनाव

1968 में रमणिका हार गयीं थी मांडू उपचुनाव

रमणिका गुप्ता का राजनीतिक सफर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से शुरू हुआ था। रमणिका का कर्पूरी ठाकुर से परिचय था। 1968 में मांडू के विधायक राजा कामाख्या नारायण सिंह के इस्तीफे की वजह से वहां उपचुनाव करना पड़ा था। मांडू तब बिहार विधानसभा की सीट थी। इस चुनाव में संसोपा ने रमणिका गुप्ता को यहां से खड़ा किया था। पहले चुनाव में उन्होंने कांटे का मुकाबला दिया लेकिन करीब 700 वोटों से हार गयीं। रमणिका गुप्ता ने बाद में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गयीं। कांग्रेस ने उन्हें 1972 में एमएलसी बना दिया। 1974 में वे फिर कांग्रेस से एमएलसी बनीं। 1979 तक वे बिहार विधान परिषद की सदस्य रहीं। फिर उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी।

मांडू की पहली महिला विधायक रमणिका

मांडू की पहली महिला विधायक रमणिका

1980 के बिहार विधानसभा चुनाव में रमणिका गुप्ता को जनता पार्टी सेक्यूलर चौधरी गुट ने उम्मीदवार बनाया। उन्हें औरत का चुनाव चिह्न मिला था। रमणिका ने मांडू के गोमिया में पानी के लिए लंबे समय तक धारदार आंदोलन चलाया था। इलाके की गरीब और आदिवासी औरतें उन्हें पानी वाली रानी कह कर बुलाती थीं। उनका चुनाव चिह्न ‘औरत' महिलाओं के दिल में बैठ गया। रमणिका ने तब बिहार के मंत्री और मजबूत नेता तपेश्वर देव को हरा दिया था। रमणिका एक साहित्यकार थीं। वे किसी एक सीमा में बंध कर रहना पसंद नहीं करती थीं। उन्होंने जनता पार्टी सेक्यूलर भी छोड़ दी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गयीं। माकपा के टिकट पर उन्होंने 1985 में भी मांडू से विधानसभा का चुनाव लड़ा। लेकिन हार गयीं। इसके बाद वे राजनीति से दूर होती गयीं और साहित्य की दुनिया में रम गयीं।

राजनीति में सेक्स

राजनीति में सेक्स

रमणिका गुप्ता ने ‘आपहुदरी' के नाम से अपनी जीवनी लिखी है जिसका प्रकाशन 2015 में हुआ था। इस किताब के बोल्ड कंटेंट ने साहित्य और राजनीति की दुनिया में खलबली मचा दी थी। उन्होंने खुद के अनुभव के आधार पर इस सच को बहुत बेबाकी से सामने रखा है कि कैसे बड़ा से बड़ा नेता भी औऱत को भोग की वस्तु ही समझता। दूसरी तरफ उन्होंने इस सच को भी रेखांकित किया है कि कैसे एक महात्वाकांक्षी औरत सियासत में जगह बनाने के लिए अपनी देह का मर्जी से इस्तेमाल करती है। जब इस किताब का प्रकाशन हुआ था तब उनकी उम्र 85 साल थी। जिस कालखंड में उन्होंने नेताओं के साथ अपने अंतरंग क्षणों का जिक्र किया है उस समय उनकी उम्र 40 के आसपास थी। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि जब नीलम संजीव रेड्डी वित्त मंत्री थे तब वे उनके सामने बिना कपड़ों के खड़ा हो गये थे और जबरन संबंध बनाया था। इसी तरह उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री केबी सहाय के बारे में लिखा है एक बार वे उनसे मिलने गयीं थीं। कांग्रेस में शामिल होना चाहती थीं। केबी सहाय उन्हें एकांत में ले गये और कहा जो जी चाहे मांग लो। रमणिका के मुताबिक उनके कागज पर हस्ताक्षर करने के बाद केबी सहाय ने उन्हें आलिंगन में लेकर चूम लिया था। फिर जब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष से मिलने गयीं तो उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और वे बच नहीं पायी। इस किताब में रमणिका गुप्ता ने राजनीति और सेक्स की भ्रष्ट युगलबंदी पर बहुत कुछ लिखा है।

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English summary
Jharkhand FLASHBACK Biography of first female MLA Ramnika Gupta of Mandu assembly seat
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