झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: IAS अफसरों और व्यापरियों के ठिकानों पर ED का छापा, मनी लॉन्ड्रिंग के तार उजागर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को झारखंड और छत्तीसगढ़ में आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे सहित कई सरकारी अधिकारियों और शराब व्यापारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हुई है, जिसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच की जा रही है। छापेमारी रांची और रायपुर में 15 स्थानों पर की गई, जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने सुरक्षा व्यवस्था की।
ईडी की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू हुई है। इस एफआईआर में झारखंड के आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, रायपुर के मेयर अइजाज़ ढेबर के भाई अनवर ढेबर और छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुणपाती त्रिपाठी के नाम शामिल हैं।

क्या है विनय कुमार चौबे की भूमिका?
विनय कुमार चौबे, जो 1999 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, वर्तमान में झारखंड पंचायती राज विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रधान सचिव और 2022 की आबकारी नीति के कार्यान्वयन के दौरान आबकारी सचिव के पद पर भी कार्य किया था। ईडी ने उनके परिसरों की तलाशी ली, जिसमें उनके साथ ही आबकारी विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह और शराब व्यापारियों के परिसरों पर भी छापेमारी की गई।
झारखंड शराब नीति पर आरोप
एफआईआर में आरोप है कि 2022 की झारखंड शराब नीति अवैध रूप से शराब सिंडिकेटों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई थी। इसमें कहा गया है कि इस नीति के तहत राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ। यह भी आरोप है कि छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने झारखंड में इस नीति को लागू करने में सहयोग किया, ताकि अवैध लाभ कमाया जा सके।
गिरफ्तारियां और जांच
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने टुटेजा, ढेबर, त्रिपाठी और अन्य को गिरफ्तार किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ईडी की इस कार्रवाई से चुनावी माहौल पर भी असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि यह मामला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता से संबंधित है।
ईडी द्वारा की गई यह छापेमारी शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में एक बड़ा कदम है। झारखंड और छत्तीसगढ़ के इन अधिकारियों और व्यापारियों पर लगे आरोपों की सत्यता की पुष्टि होने पर कानूनी कार्रवाई होगी। वहीं, आगामी चुनाव के मद्देनजर यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।












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