शवों को चार्टेड विमान से पवित्र भूमि इज़राइल में भेजने के लिए लगभग 50000 खर्च कर रहे हैं यहूदी
नई दिल्ली। अप्रैल महीने की शुरुआत में इज़राइली नागरिक चिया नेचामा हाल्बर्टम की लंबी बीमारी के बाद अमेरिका के न्यू जर्सी में निधन हो गया। इसमें कोई सवाल नहीं था कि वह इजराइल के पवित्र भूमि में अपने पति के साथ दफनाया जाएंगी, लेकिन Covid19 महामारी के बीच और इजराइल के कड़े क्वैरेंटीन उपायों के बीच यह संभव नहीं था।

क्योंकि महामारी को रोकने के लिए लागू वैश्विक लॉकडाउन में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में प्रतिबंध के चलते एयरलाइन उद्योग को पूरी तरह बंद था। इसलिए बड़ा सवाल था कि चिया नेचामा हाल्बर्टम के पार्थिव शरीर को इजराइल के पवित्र भूमि पर कैसे ले जाना संभव होगा, लेकिन इसका जबाव बना एक निजी जेट विमान, जिसकी मदद से उनके शव बेन-गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अंततः उतारा गया।

गौरतलब है कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए यहूदी राष्ट्र इजराइल के साथ-साथ पूरी दुनिया में लॉकडाउन लागू हैं, जिससे वैश्विक यात्राएं पूरी तरह से बंद हैं, जिससे इजराइल में यहूदी नागरिकों को दफनाने की लागत में तेजी से वृद्धि हो गई है। फिर चाहे इसके लिए फैमली चार्टर विमान अथवा एल अल विमानों का उपयोग क्यों न किया जाए।

दरअसल, विमानों को इजराइल तक उड़ाने के सामान्य खर्च के साथ उसमें कई अन्य अतिरिक्त संभावित खर्च जुड़ जाते हैं, जिसमें परिवार के सदस्यों द्वारा दफनाने और यात्रा करने की फीस भी शामिल हैं। महामारी ने भले ही बुरी तरह से प्रभावित संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप की रूढ़िवादी समुदायों को मृतकों को दफनाने की प्रथा को खत्म कर दिया है, लेकिन फिर भी इजराइल इससे हतोत्साहित नहीं हुआ।

मध्य-मार्च व मध्य-अप्रैल के बीच 151 यहूदियों की लाशें इजराइल भेजी गईं
इजरायल के धार्मिक सेवा मंत्रालय द्वारा इजराइली पब्लिकेशन कैलकॉलिस्ट को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अब तक विदेश में मृत हुए कुल 151 यहूदियों की लाशें मध्य-मार्च और मध्य-अप्रैल के बीच निजी या वाणिज्यिक उड़ानों में इज़राइल में दफनाने के लिए भेजी जा चुकी है। हालांकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में लाशों को दफनाने के लिए इजराइल भेजने की संख्या में बड़ी वृद्धि देखी गई है।

इजराइल में अभी 2:00 बजे यहूदियों की अंत्येष्टि किए जा रहे हैं
हालांकि कब्रिस्तानों को लिए कानूनी समस्याओं से बचने के लिए इजराइल की लोकप्रिय डायस्पोरा में अंतिम संस्कार के लिए यहूदियों को समय बदलना पड़ा है। यरूशलेम के ओलिव्स पर्वत पर स्थित कब्रिस्तान की देखभाल करने वाली संस्था इंटरनेशनल कमेटी फॉर हर हेज़िटिम के सह-अध्यक्ष मेन हैचैम लुबिंस्की ने बताया कि इजराइल में अब हम 2:00 बजे अंत्येष्टि कर रहे हैं।

यहूदियों के पवित्र भूमि इज़राइल में दफन होने की लालसा सदियों पुरानी है
यहूदियों के पवित्र भूमि इज़राइल में दफन होने की लालसा सदियों पुरानी है।इजराइल से बहिर्गमन के दौरान इस्राएलियों ने भी जोसफ की अस्थियों को इजराइल की पवित्र भूमि को पुनः स्थापित करने के लिए जोसेफ की अस्थियों को मिश्र से बाहर ले जाने के लिए ऐसा किया था, जिसका परमेश्वर ने उनसे वादा किया था।

आधुनिक यहूदी धार्मिक और वैचारिक कारणों से परंपरा का निर्वहन करते हैं
क्वींस कॉलेज में समाजशास्त्र के प्रोफेसर और रूढ़िवादी यहूदियों के प्रमुख विशेषज्ञ सैमुअल हेइलमैन ने कहा कि आधुनिक यहूदी धार्मिक और वैचारिक दोनों ही कारणों से इस सपने को साकार करते हैं। वहीं, ज़ायोनीवादियों का मानना है कि यदि आपके माता-पिता वहांदफन हैं तो इजराइल के जीवित लोग भी मृतकों के संस्कार का पालन करेंगे।

जो लोग विदेशों में दफन हैं, उन्हें पुनरुत्थान के लिए उठने 40 साल लगेंगे
हेइलमैन ने बताया कि इजराइल में एक परंपरा है कि जब मृतकों के पुनरुत्थान की बारी आती है, तो यरूशलेम और उसके आसपास के लोगों में तुरंत उठ जाएगा,और जो लोग विदेशों में दफन हैं, उन्हें पुनरुत्थान के लिए उठने 40 साल लगेंगे।

महामारी में भी इजरायली अभ्यास बनाए रखने के प्रति दृढ़ संकल्प हैं
शायद ही कारण है कि महामारी के दौरान भी इजरायली लोग यह अभ्यास बनाए रखने के प्रति दृढ़ संकल्प हैं और चार्टर्ड उड़ानों से मृत परिजनों के शवों को इजराइल की भूमि पर दफनाने के लिए भेजे जाते हैं, जो बिल्कुल सामान्य बात नहीं है।












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