Jet Fuel Price Hike: अब और महंगा होगा हवाई सफर? जेट फ्यूल महंगा होने से यात्रियों की जेब पर कितना पड़ेगा असर
Jet Fuel Price Hike: ग्लोबल ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण भारतीय विमानन क्षेत्र में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली है। बुधवार, 1 अप्रैल को सरकारी तेल कंपनियों ने हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 114.5% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की घोषणा की है।
इस भारी उछाल के साथ दिल्ली में एटीएफ की कीमत ₹2,07,341.22 प्रति किलोलीटर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है।

यह भारतीय नागरिक उड्डयन के इतिहास में पहली बार है जब हवाई ईंधन की कीमतें ₹2 लाख प्रति किलोलीटर के जादुई आंकड़े को पार कर गई हैं। इससे पहले का उच्चतम स्तर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ₹1.1 लाख प्रति किलोलीटर दर्ज किया गया था।
घरेलू एयरलाइंस के लिए क्या है सरकार का 'सुरक्षा कवच'
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए इस तूफान के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू हवाई यात्रियों और एयरलाइंस को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में दरें दोगुनी हो गई हों, लेकिन इसका पूरा बोझ घरेलू उड़ानों पर नहीं डाला जाएगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श के बाद, सरकारी तेल विपणन कंपनियों (PSU OMCs) ने घरेलू एयरलाइंस के लिए केवल 25% (लगभग ₹15 प्रति लीटर) की आंशिक और चरणबद्ध बढ़ोतरी लागू की है। यह राहत केवल घरेलू रूट्स के लिए है।
भारत में ईंधन भरवाने वाली विदेशी एयरलाइंस को बढ़ी हुई पूरी कीमत चुकानी होगी, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में प्रचलित अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुरूप है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर बताया कि यह कदम घरेलू हवाई यात्रा की लागत को स्थिर रखने और आम नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटके से बचाने के लिए उठाया गया है।
क्यों आई Jet Fuel की कीमतों में 'सुनामी'?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, एटीएफ की कीमतें 2001 से विनियमित (Deregulated) हैं और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। ग्लोबल एनर्जी मार्केट में पैदा हुई इस असाधारण स्थिति के कारण एटीएफ की कीमतों में 100% से अधिक की वृद्धि की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी।
Jet Fuel Price Hike से एयरलाइंस के लिए बढ़ी चुनौतियां
भले ही सरकार ने घरेलू उड़ानों को बड़ी राहत दी है, लेकिन विमानन क्षेत्र के लिए चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। युद्ध की वजह से कई देशों का हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद है, जिसके कारण पश्चिमी गंतव्यों के लिए उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत पहले ही बढ़ गई है। किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 40% होता है। 1 मार्च को भी कीमतों में 5.7% की वृद्धि हुई थी, और अब इस ऐतिहासिक उछाल ने कंपनियों के मुनाफे पर भारी दबाव बना दिया है।
कमर्शियल रसोई गैस भी हुई महंगी
तेल कंपनियों ने एटीएफ के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी (19 किलो) के दाम भी ₹195.50 प्रति सिलेंडर बढ़ा दिए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल का सीधा असर अब रसोई गैस के कमर्शियल सिलेंडरों पर भी साफ दिखने लगा है। सरकार के इस पार्शियल इंक्रीज के फैसले से उम्मीद है कि टिकटों के दाम में वैसी बेतहाशा वृद्धि नहीं होगी जैसी अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखते हुए अनुमानित थी।












Click it and Unblock the Notifications