2024 में वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे नीतीश! इन सीटों से भी चुनाव लड़ने का ऑफर, PM मोदी के लिए यह सोच रही है JDU
नीतीश कुमार के उत्तर प्रदेश की किसी सीट से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा फिर से तेज हो गई है। इस बार यूपी जेडीयू ने बिहार के सीएम के सामने राज्य की दर्जनों सीटों से चुनाव लड़ने प्रस्ताव रखा है, जिसमें से वाराणासी सबसे प्रमुख है।
उत्तर प्रदेश जेडीयू के अध्यक्ष सत्येंद्र पटेल ने पटना में ईटीवी भारत को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यूपी के लोग राज्य की दर्जनों सीटों में से किसी एक से नीतीश कुमार के चुनाव लड़ने का इंतजार कर रहे हैं।

नीतीश को पीएम पद का उम्मीदवार मान रही है जेडीयू
दरअसल, केंद्र में बीजेपी के खिलाफ 26 विपक्षी दलों का जो इंडिया ब्लॉक बना है, उसके शुरुआती मुख्य सूत्रधार जदयू सुप्रीमो ही हैं। इसलिए पार्टी उन्हें प्रधानमंत्री पद का स्वाभाविक उम्मीदवार मानकर चल रही है। पार्टी को लगता है कि ज्यादातर प्रधानमंत्री यूपी से हुए हैं, इसलिए नीतीश कुमार के लिए यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ना ही सही रहेगा।
बड़ी बात है कि बिहार की सत्ताधारी महागठबंधन और इंडिया ब्लॉक की सहयोगी आरजेडी और कांग्रेस ने भी नीतीश के यूपी से चुनाव लड़ने की वकालत की है, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प हो गया है।
वाराणसी से चुनाव जीत जाएंगे नीतीश कुमार- यूपी जेडीयू अध्यक्ष
दरअसल, जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार को यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की मांग पिछले कई महीनों से चल रही है। लेकिन, अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सत्येंद्र पटेल ने कहा है, 'एक दर्जन से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जैसे कि फूलपुर, अंबेडकर नगर, वाराणसी और अन्य जहां से बिहार के सीएम चुनाव लड़ सकते हैं।'
उन्होंने कहा 'हम उम्मीद करते हैं कि वे प्रधानमंत्री की वाराणसी लोकसभा सीट से लड़ें। वह (नीतीश) वाराणसी से लोकसभा का चुनाव जीत जाएंगे। अगर बिहार के सीएम नीतीश कुमार चुनाव मैदान में उतरते हैं तो हारने के डर से प्रधानमंत्री वाराणसी सीट के बदले दक्षिण भारत की कोई सुरक्षित सीट खोज सकते हैं।'
नीतीश को फूलपुर से चुनाव लड़ने का मिल रहा है पहले से ऑफर
दरअसल, वाराणसी छोड़ दें तो फूलपुर सीट से नीतीश के चुनाव लड़ने का ऑफ पार्टी के नेताओं की ओर से कई महीनो से दिया जा रहा है। क्योंकि, यह सीट देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का चुनाव क्षेत्र रहा है, तो इसके माध्यम से एक राजनीतिक संदेश भी दिया जा सकता है।
फूलपुर समेत पूर्वांचल की कई सीटों पर कुर्मी जाति की अच्छी-खासी आबादी
इसके अलावा फूलपुर यूपी की उन 30 लोकसभा सीटों में शामिल है, जहां कुर्मी जाति की जनसंख्या अच्छी-खासी है। बिहार के मुख्यमंत्री अबतक मूलरूप से इसी जाति की राजनीति करते आ रहे हैं और बिहार की तुलना में यूपी में कुर्मी/पटेल की जनसंख्या भी कहीं ज्यादा होने की संभावना है।
आरजेडी-बिहार कांग्रेस भी नीतीश के यूपी से चुनाव लड़ने के पक्ष में
नीतीश के फूलपुर सीट के विकल्प पर उनकी सहयोगी पार्टियां भी उत्साहित नजर आ रही हैं। जैसे राजद नेता शक्ति सिंह यादव का कहना है, 'यह बहुत ही अच्छा होगा अगर नीतीश कुमार चुनाव लड़ने के लिए फूलपुर को चुनते हैं।' वहीं बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने भी लालू यादव की पार्टी से हां में हां मिलाते हुए कहा है, 'हमें बहुत खुशी होगी यदि नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ें, जो पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा हुआ है.......'
जेडीयू को वोट बैंक समीकरण के लिए भी लग रहा है मजबूत फैसला
वहीं जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि यह पूरी तरह से नीतीश कुमार पर निर्भर है कि क्या वे यूपी या बिहार की किसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। 'लेकिन, अगर ऐसा होता है तो इसका पूरे देश में खासकर उत्तर भारत में व्यापक असर होगा।' उन्होंने कहा कि यह सामाजिक समीकरण के लिए भी अच्छा है और वोट बैंक के मामले में यह जांचे परखे मुस्लिम-यादव वोट बैंक से भी आगे निकल सकता है।
पीएम उम्मीदवार की दावेदारी पर इंडिया ब्लॉक में विरोधाभास
लेकिन, जेडीयू और इंडिया ब्लॉक के तमाम दलों के बीच इस मुद्दे पर काफी विरोधभास नजर आ रहा है; और अगर नीतीश ने अपनी पार्टी की सलाह मानी तो यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की क्या प्रतिक्रिया होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
क्योंकि, नीतीश ने अगर लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया तो यह उनके खुद के स्टैंड कि 'हम किसी पद के लिए (विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश) नहीं कर रहे' से अलग होगा। वहीं कांग्रेस के लिए राहुल गांधी के अलावा फिलहाल पीएम पद का कोई चेहरा नहीं दिखता है। जबकि, पिछले दिनों सपा की ओर से अखिलेश यादव को भी इसके लिए सक्षम दावेदार के रूप में पेश करने की भरसक कोशिश की गई है।












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