शहीद दीपक सिंह ने 15 दिन पहले ही पत्नी से कही थी कश्मीरी शॉल लाने की बात, 8 महीने पहले हुई शादी
भोपाल। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सोमवार को गलवान घाटी में चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों पर अचानक हमला कर दिया था। जिसमें हमारे 20 सैनिक शहीद हो गए। इन्हीं में से एक हैं दीपक सिंह। जो मध्य प्रदेश के रीवा के रहने वाले थे। शहीद दीपक सिंह के परिवार को सबसे पहले जो फोन आया, उसमें बताया कि दीपक का आईडी कार्ड मिला है और वह अभी एक्शन से लापता है। ये खबर सुनकर पूरा परिवार चिंता में पड़ गया। फिर उन्हें करीब दो घंटे बाद इस बात की जानकारी मिली कि दीपक उन 20 जवानों में शामिल हैं, जो लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद हो गए।
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8 महीने पहले हुई थी शादी
बिहार रेजिमेंट के दीपक की महज 8 महीने पहले ही शादी हुई थी और वो 21 साल के थे। उनकी शादी के कई निशान अब भी फरैदा गांव स्थित उनके घर में मौजूद हैं। ये गांव रीवा जिला मुख्यालय से 100 किमी और भोपाल से 550 किमी की दूरी पर है। दीपक शादी बाद होली पर अपने घर गए थे और तभी पत्नी से उनकी आखिरी बार मुलाकात हुई। क्योंकि गलवान घाटी में नेटवर्क की दिक्कत है इसलिए वह परिवार से कम ही बात कर पाते थे।

15 दिन पहले ही पत्नी से की बात
शहीद दीपक सिंह ने 15 दिन पहले अपनी पत्नी से बात की थी और वादा किया था कि इस बार घर आने पर कश्मीरी शॉल और गहने लेकर आएंगे। दीपक सिंह की पत्नी कुछ दिन पहले ही अपने माता-पिता के घर गई थीं। अब पति के शहीद होने की खबर मिलने के बाद वापस अपने ससुराल लौट आई हैं। दीपक सिंह के बड़े भाई प्रकाश भी सेना में हैं और राजस्थान में तैनात हैं। वह भी भाई के बारे में जानकारी मिलते ही तुरंत घर के लिए रवाना हो गए।

मुख्यमंत्री ने किया सलाम
दीपक के कजिन राकेश सिंह का कहना है, 'हमें जानकारी दी गई है कि उनका पार्थिव शरीर लद्दाख से सुबह 10 बजे गुरुवार को लाया जाएगा और देर रात तक हमारे गांव आ जाएगा।' मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बहादुर जवान को सलाम किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'तूने सींचा है अपने लहू से वतन की मिट्टी को, वीरों की इस मिट्टी पर हम अभिमान करते हैं। ऐ मेरे वतन के शेर तेरे जाने से चीत्कार रहा दिल तेरे लहू के हर कतरे, तेरी शहादत को सलाम करते हैं। भारत-चीन की झड़प में शहीद हुए रीवा के वीर सपूत दीपक सिंह के चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि।'
अचानक हिंसक हो गए थे चीनी सैनिक
दरअसल सोमवार की रात करीब 11.30 बजे चीनी सैनिक अचानक हिंसक हो गए थे। हमला उस समय शुरू हुआ जब गलवान घाटी में एक संकरी पहाड़ी पर बैठक चल रही थी। चीनी सैनिकों ने कील लगे डंडों से भारतीय जवानों पर हमला करना शुरू कर दिया। ठीक इसी तरह के हथियार का प्रयोग लद्दाख में 18-19 मई को भी चीनी सैनिकों ने टकराव के दौरान प्रयोग किया था। लद्दाख में हमारे 20 सैनिक शहीद हुए हैं और चीनी सैनिकों ने सारी हदें पार करते हुए हमलों के समय उनके शवों के साथ भी छेड़छाड़ की।












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