‘कच्चाथीवू द्वीप को सिरदर्द मानते थे नेहरू, इंदिरा की भी यही सोच’, एस जयशंकर ने कांग्रेस पर लगाए बड़े आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कच्चाथीवू मामले में बयान दिया है। उन्होंने सोमवार को कांग्रेस और डीएमके पर निशाना साधते हुए उन्हें इस विवाद का जिम्मेदार बताया। जयशंकर ने दावा किया कि तमिलनाडु के लोगों को लंबे समय तक इस मुद्दे को लेकर गुमराह किया जाता रहा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और DMK ऐसा जता रही हैं कि उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है और यह अभी-अभी का मसला है। जबकि, उन्होंने ही इसे अंजाम दिया था। जनता को ये जानने का अधिकार है कि 1974 में कच्चाथीवू दूसरे देश को कैसे दे दिया गया। DMK लीडर और तब के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को भी इस समझौते की पूरी जानकारी थी।

s jaishankar on Katchatheevu Island

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ये ऐसा मसला नहीं है जो अचानक उठा है। ये वो मसला है जो संसद में तमिलनाडु में लगातार उठता रहा है। इस पर कई बार बहस हो चुकी है। मेरे रिकॉर्ड बताते हैं कि इस मुद्दे पर मैंने अब तक 21 बार जवाब दिया है।

'भारतीय मछुमारों का हक छीना'

उन्होंने कहा कि 1976 में भारतीय मछुआरों का मछली पकड़ने का अधिकार भी श्रीलंका को दे दिया गया, जबकि संसद में ये गारंटी दी गई थी कि 1974 के समझौते में भारतीय मछुआरों के अधिकार सुरक्षित रखे गए हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत को श्रीलंका अधिकारियों के साथ मिल कर इसका हल निकालना चाहिए।

जयशंकर ने कहा कि, ''पिछले 20 साल में 6184 भारतीय मछुआरों को श्रीलंका ने पकड़ा है। भारत की मछली पकड़ने वाली 1175 नावें जब्त कर ली गईं। ये वो बैकग्राउंड है जिसके बारे में हम बताना चाहते हैं।'' जब भी कोई गिरफ्तारी होती है, जो ये लोग मुद्दा उठाते हैं। चेन्नई में बैठकर बयान देना आसान है, लेकिन उन मछुआरों को कैसे छुड़ाया जाता है, ये हम जानते हैं।

उन्होंने कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार ही है जो यह सुनिश्चित करने पर काम करती रही है कि भारतीय मछुआरों को रिहा किया जाए। उन्होंने कहा, ''हमें एक समाधान तलाशना होगा। हमें पड़ोसी देश के साथ बैठना और इस पर बातचीत करना होगा।''

'नेहरू का गैरजिम्मेदार रवैया'

एस जयशंकर ने इस मामले पर पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की उदासीनता को भी जिम्मेदार ठहराया। कहा कि मई 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था, 'मैं इस छोटे से द्वीप को बिल्कुल भी महत्व नहीं देता और मुझे कच्चाथीवू पर अपना दावा छोड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।' उनका रवैया ऐसा था कि जितना जल्दी कच्चाथीवू को श्रीलंका को दे दिया जाए, उतना ही ठीक होगा। यही सोच इंदिरा गांधी की भी थी।

पीएम मोदी ने मसला उठाया

आपको बता दें कि रविवार को पीएम मोदी मोदी ने एक RTI रिपोर्ट का हवाला देकर कहा था कि कांग्रेस ने भारत के रामेश्वरम के पास मौजूद कच्चाथीवू द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया था। प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि कांग्रेस पिछले 75 साल से भारत की एकता और अखंडता को कमजोर करने का काम करती आ रही है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+