भारत का वो रहस्यमयी गांव, जहां पहुंचते ही पक्षी दे देते हैं अपनी जान, आखिर क्या है वजह?

नई दिल्ली: प्रकृति अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है। अपने देश में भी कई जगहें ऐसी हैं, जहां पर कई राज छिपे हुए हैं। वैज्ञानिकों ने उनको सुलझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। आज हम आपको असम के ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। (तस्वारें-सांकेतिक)

जतिंगा की खौफनाक स्टोरी

जतिंगा की खौफनाक स्टोरी

पूर्वोत्तर के राज्य असम में बोरेल पहाड़ियों के बीच जतिंगा नाम का एक गांव बसा हुआ है। इस गांव की कहानी बेहद डरावनी है, क्योंकि यहां पर आकर चिड़ियां सुसाइड कर लेती हैं। इस वजह से इसे 'सुसाइड प्वाइंट ऑफ बर्ड' के नाम से भी जाना जाता है। यहां स्थानीय चिड़िया के साथ दूसरे देशों से आने वाले पक्षी भी आत्महत्या करते हैं। जिस वजह से इसकी पहेली का सुलझाना और भी मुश्किल हो गया है।

इस वक्त ज्यादा घटनाएं

इस वक्त ज्यादा घटनाएं

स्थानीय लोगों के मुताबिक चिड़िया के आत्महत्या करने का पैटर्न भी बहुत अजीब है। वो तेज रफ्तार से उड़ती हैं। इसके बाद किसी पेड़ या दीवार से वो टकरा जाती हैं। जिससे उनकी मौत हो जाती है। सितंबर से लेकर नवंबर तक इस तरह की घटनाओं में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। वहीं ज्यादातर मामलों में चिड़ियां शाम 7 बजे से रात 10 बजे के बीच अपनी जान देती हैं। दिन में वो सामान्य तरीके से उड़ती नजर आती हैं।

क्या बुरी शक्तियों का हाथ?

क्या बुरी शक्तियों का हाथ?

गांव वालों के मुताबिक वहां पर कुछ बुरी शक्तियां हैं, जिस वजह से चिड़ियां अपनी जान देती हैं। इंसान और अन्य जानवर यहां सामान्य रूप से रहते हैं। हालांकि पहाड़ी इलाका होने के कारण कभी-कभी यहां पर पहुंचना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। वैसे इस मामले में वैज्ञानिकों की राय अलग है।

ये हो सकती है वजह

ये हो सकती है वजह

वैज्ञानिकों के मुताबिक पक्षियों की 40 प्रजातियां यहां पर सुसाइड करती हैं। इसके पीछे की वजह यहां पर चुंबकीय शक्ति का ज्यादा होना हो सकता है। इसके अलावा यहां हवा भी बहुत तेज चलती है और घना कोहरा रहता है। ऐसे में हो सकता है कि पक्षियों को ना दिखता हो और वो दीवार या पेड़ से टकरा जाते हैं।

स्कॉटलैंड में भी ऐसी जगह

स्कॉटलैंड में भी ऐसी जगह

इसी तरह स्कॉटलैंड में एक ब्रिज है, वहां पर पहुंचकर कुत्ते सुसाइड कर लेते हैं। वैज्ञानिकों ने कई बार इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन वो नाकामयाब रहे। स्थानीय लोगों के मुताबिक 1950 के आसपास ये पुल बनकर तैयार हुआ था। जिसके बाद से यहां ऐसी घटनाएं हो रही हैं। जिन कुत्तों ने जान दी उनके मालिकों के मुताबिक जब वो वहां पर गए थे, तो उनके पालतू जानवर नॉर्मल थे, लेकिन फिर अचानक उन्होंने ऊपर से छलांग लगा दी।

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