भारतीय गृहणियों को राहत देगा जापान का फुकुशिमा न्‍यूक्लियर प्‍लांट, जानिए कैसे?

टोक्‍यो। टेलीविजन पर आपने "मेरे केजरीवाल" का विज्ञापन जरूर देखा होगा, जिसमें एक भारतीय गृहणी घर के बढ़ते बजट से चिंतित दिखाई देती है। ऐसी एक नहीं लाखों गृहणियां हैं, जो बढ़ते घर खर्च से परेशान हैं। लेकिन शायद आपको मालूम नहीं कि जापान का फुकुशि‍मा न्यूक्ल‍ियर प्लांट भारतीय परिवारों के खर्च को कम कर सकता है! यह सब कैसे होगा, चलिये हम आपको बताते हैं।

Japan's Fukushima Nuclear plant to make Indian housewives happier

10 अगस्‍त को जापान के फुकुशिमा न्‍यूक्लियर प्‍लांट को फिर से शुरू कर दिया गया। इस न्‍यूक्लियर प्‍लांट को मार्च 2011 में आई भयंकर सुनामी के बाद बंद कर दिया गया था। इस प्‍लांट के बंद होने से जापान में एक बड़े स्‍तर पर बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। सुनामी के बाद से जापान के 50 न्‍यूक्लियर पावर प्‍लांट को बंद करना पड़ गया था। फुकुशिमा प्‍लांट का फिर से शुरू होना जापान के लिए तो अच्‍छी खबर है ही, साथ-साथ भारत के लिए भी, क्योंकि इससे भारत के पर्यावरण और यहां की कई नागरिक सुविधाएं बेहतर हो सकेंगी।

कैसे पड़ेगा असर

फुकुशिमा के बाद जापान में जल्‍द ही सेंडाई में बंद पड़ा 890 मेगावॉट की क्षमता वाले न्‍यूक्लियर प्‍लांट को भी फिर से शुरू किया जा सकता है। जैसे-जैसे जापान न्‍यूक्लियर एनर्जी का प्रयोग बढ़ाएगा, फ्यूल के दूसरे विकल्‍पों पर उसकी निर्भरता कम होगी। इस कदम से लिक्विफाइड नैचुरल गैस यानी एलएनजी के दामों में कमी आएगी।

जब एलएनजी की डिमांड कम होगी तो उसका असर भारत में पड़ेगा और उसके दाम यहां कम होंगे। जापान में एलएनजी की खपत की वजह से इसके दामों में काफी इजाफा हुआ था। वहां खपत घटेगी तो भारत को इसके आयात के लिए कम पैसे देने पड़ेंगे। इससे रसोई गैस के दाम कम होंगे। और ऐसा होने पर सबसे ज्यादा खुशी उन महिलाओं को होगी, जिन्हें किचन समेटने में पूरा दिन लग जाता है।

कोयले की खपत होगी कम

नैचुरल गैस के ज्‍यादा प्रयोग की वजह से देश में कोयले की खपत कम हो सकेगी। ऐसे में पिछले कई वर्षों से नैचुरल गैस पर आधारित पावर प्‍लांट में फिर से निवेश हो सकेगा। इन सभी प्‍लांट्स में निवेश फ्यूल की कमी की वजह से रूक गया था।

भारत में 75 प्रतिशत बिजली कोयले से बनती है। नैचुरल गैस आधारित पावर प्लांट से बिजली बनेगी, तो कई राज्यों में बिजली की आपूर्ति बेहतर हो सकेगी। यानि वो महिलाएं जो बिजली कटौती की वहज से घर में पसीनें बहाती हैं, उन्हें कुछ राहत जरूर मिलेगी।

सीएनजी हो सकेगी सस्‍ती

जापान से नैचुरल गैस की मांग में कमी का असर सीएनजी पर भी पड़ेगा। सीएनजी के तौर पर इसे ज्‍यादा से ज्‍यादा प्रयोग कर हम डीजल और पेट्रोल के विकल्‍पों में इसे प्रयोग कर सकते हैं। ऐसे में लोकल बसों और ऑटो के किराये में फर्क पड़ सकता है। ऐसा होने पर घर के बजट पर उसका सकारात्मक असर पड़ेगा। इनमें से ज्‍यादातर दिल्‍ली, मुंबई और गुजरात के हैं।

प्रदूषण होगा कम तो स्वस्थ्य होगी जिंदगी

कोयले की ज्‍यादा खपत से पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा था। डीजल की वजह से होने वाले प्रदुषण पर तो रोकथाम लगेगी ही साथ ही साथ दिल्‍ली जैसे शहरों में हवा भी साफ हो सकेगी। भारत में फिलहाल 1.5 मिलियन लोग हैं जो सीएनजी का प्रयोग कर रहे हैं। यानी दवाओं पर खर्च कम होने की संभावना बढ़ेगी।

न्‍यूक्लियर प्‍लांट्स को मिलेगा बढ़ावा

फुकुशिमा और सेंदाई की वजह से भारत में जिन न्‍यूक्लियर प्‍लांट्स पर काम हो रहा था, उसके विरोधी इनका उदाहरण देकर उनके विरोध में आवाजें तेज कर देते। लेकिन अब इस नए घटनाक्रम के बाद से जिन न्‍यूक्लियर पावर प्‍लांट्स पर काम धीमी गति से हो रहा था, उनमें तेजी आएगी।

इससे देश में अगले कुछ वर्षों न्‍यूक्लियर पावर के जरिए पैदा होने वाली बिजली की दिशा में तेजी से काम हो सकेगा। यानी हम उम्‍मीद कर सकते हैं कि बिजली की कमी से निजात मिल सकती है। इससे बिजली के दाम कम हो सकते हैं। यानि कुल मिलाकर फिर से जेब पर बोझ कम होने की संभावना है। और परिवार में जब जेब पर पड़ रहा बोझ कम होता है तो कमाने वाले से ज्यादा सुकून खर्च करने वाले को होता है, क्योंकि उसी स्थ‍िति में वो भविष्य के लिये निवेश की सोच पाती/पाता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+