Batool Zehra: कौन है बतूल जहरा? जिसने राम भजन गा कर उरी को सीधे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से जोड़ा
सर्जिकल स्ट्राइक के लिए जाना जाने वाला उत्तरी कश्मीर का क्षेत्र उरी, इन दिनों भगवान राम के भजनों से गूंज रहा है। हो, भी क्यों न...जब पूरी दुनिया 22 जनवरी को अयोध्या में होने जा रहे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की बात कर रही हो। सभी की निगाहें टकटकी लगाए इस दिन का इंतजार कर रही हैं। इस बीच, हर कोई अपने-अपने तरीके से इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहता है।
जम्मू-कश्मीर के उरी में रहने वाली कॉलेज की प्रथम वर्ष की छात्रा बतूल जहरा भी अपने राम भजन को लेकर सुर्खियों में छा गई हैं। उनका 52 सेकंड का राम भजन गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसिद्धी बटोर रहा है।

छात्रा बतूल ज़हरा ने अपनी स्थानीय पहाड़ी भाषा में राम भजन गाया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को सीधे तौर पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जोड़ दिया है। सोशल मीडिया में उनका पहाड़ी भाषा में राम भजन बेहद पसंद किया जा रहा है। आइए जानते हैं क्या कहती हैं बतूल?
पहाड़ी भाषा में राम भजन गाने पर बतूल ज़हरा कहती हैं कि मैंने जुबिन नौटियाल का एक गाना सुना और मुझे यह बहुत पसंद आया। मैंने सोचा कि अगर यह हिंदी में हो सकता है, तो पहाड़ी में क्यों नहीं हो सकता? इसे पहाड़ी में लिखा और गाया। मैंने इसे रिकॉर्ड किया और अपने सर को दिखाया। उन्होंने इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और यह वायरल हो गया।
बतूल ज़हरा ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को धन्यवाद देते हुए कहा कि एलजी की वजह से लोगों के दिमाग से नकारात्मक चीजें दूर हो रही हैं। मेरे मुस्लिम भाइयों ने भी मेरी बहुत सराहना की। हमारे इमाम ने संदेश दिया कि हमें उस देश से प्यार करना चाहिए, जिसमें हम रहते हैं। श्रीराम को उनकी ईमानदारी और न्याय में विश्वास के कारण 'पुरुषोत्तम' कहा जाता है।
कौन है बतूल जहरा ?
बतूल जहरा, जम्मू कश्मीर के उरी निवासी हैं। इंटरमीडिएट परीक्षा में अच्छे नंबर लाकर मीडिया की सुर्खियों में आईं थी। बतूल जहरा, पहाड़ी जनजाति से ताल्लुक रखने वाली हैं। जहरा, एक आईएएस अफसर बनना चाहती हैं। अभी वह कॉलेज की प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। उनके पिता का नाम आरिफ हुसैन काजमी है।












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