J&K: 'घर वापसी का समय आ चुका है': कश्मीरी पंडितों से नेशनल कांफ्रेंस क्यों कर रही ये अपील?

Jammu Kashmir News: केंद्र शासित जम्मू और कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस की अगुवाई में पहली सरकार बनने से पहले पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी हिंदुओं से घर वापसी की अपील की है। उनकी यह अपील कई मायनों में अहम है। एक तो यह आर्टिकल 370 हटने के बाद की गई है, जिसकी वजह जम्मू और कश्मीर की राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल चुका है।

जम्मू और कश्मीर से 1989 के अंत और 1990 के शुरुआती दिनों में घाटी में हिंसक अलगाववाद और आतंकवाद का प्रभुत्व कायम होने की वजह से हजारों कश्मीरी हिंदू परिवारों को कश्मीर घाटी में अपना सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा था।

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फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी हिंदुओं से की घर वापसी की अपील
अब जब नेशनल कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन की केंद्र शासित प्रदेश में पहली सरकार बनने जा रही है तो पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को लगता है कि कश्मीरी हिंदुओं को घर वापस बुलाने का सही समय आ चुका है।

उन्होंने शनिवार को कहा, 'अब समय आ चुका है, उन्हें अपने घर वापस आना चाहिए। हम सिर्फ कश्मीरी पंडितों के लिए नहीं सोचते हैं, बल्कि जम्मू के लोगों के लिए भी सोचते हैं, हमें उनके साथ अच्छा बर्ताव करना चाहिए...उन्हें भी यह लगना चाहिए कि नेशनल कांफ्रेंस उनका दुश्मन नहीं है। हम भारतीय हैं और हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं।'

आर्टिकल 370 से मुक्ति के बाद नेशनल कांफ्रेंस कर सकी ये अपील
जम्मू और कश्मीर के भावी सीएम उमर अब्दुल्ला के पिता कश्मीरी हिंदुओं से तब घर वापस लौटने की अपील कर पा रहे हैं, जब प्रदेश को अनुच्छेद 370 और 35ए से मुक्ति मिल चुकी है। घाटी में आतंकवाद पर लगाम लग चुका है।

अलगाववादी चुनाव के माध्यम से मुख्यधारा की राजनीति में लौटने शुरू हो चुके हैं। चुनाव बहिष्कार का आह्वान बदले प्रशासनिक परिदृश्यों की वजह से ही इतिहास बन चुका है। पत्थरबाजों को अपना पेशा बदलने को मजबूर होना पड़ा है।

बीजेपी की लाइन पर चलने का क्यों दे रहे संकेत?
अब्दुल्ला ने भारतीयता का हवाला देकर सबको साथ लेकर चलने की बात कही है। उनकी यह लाइन उसी बीजेपी और खासकर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' और 'सबका साथ, सबका विकास' वाली लाइन से मेल खाती है।

अब्दुल्ला की पार्टी बीजेपी को ही हराकर सत्ता में वापसी कर रही है और इन्हीं नीतियों पर चलते हुए भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने खासकर बीते पांच वर्षों में विशेष रूप से घाटी में शांति का माहौल कायम किया है।

हालांकि, चुनाव जीतने के लिए नेशनल कांफ्रेंस ने अपने घोषणापत्र में आर्टिकल 370 की फिर से बहाली को मुख्य वादा बताया था। लेकिन, इस मुद्दे पर नतीजे आने के साथ ही इसके सुर नरम पड़ चुके हैं।

पहले कश्मीरी पंडितों का भरोसा जीतें उमर अब्दुल्ला, फिर करें वापसी की अपील!
नेशनल कांफ्रेंस और उसके नेता के साथ कश्मीर घाटी से हिंदुओं के पलायन को लेकर कई तथ्य जुड़े हुए हैं। कश्मीरी पंडितों को जिस भयावह मंजर से गुजरना पड़ा था, उसके लिए नेशनल कांफ्रेंस अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती। कश्मीर घाटी से हिंदुओं के पलायन के बाद भी फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला को भी वहां फिर से सरकारें बनाने का मौका मिला। लेकिन, तब तो उनमें यह साहस नहीं था कि कश्मीरी पंडितों से कह दें कि वापस आ जाओ!

बदले माहौल में वह कश्मीरी हिंदुओं का भरोसा जीतने और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि चमकाने के लिए इस तरह की अपील कर रहे हैं। अगर बीते पांच वर्षों में केंद्रीय शासन ने वहां जमीनी हालात नहीं बदले होते तो अब्दुल्ला ऐसा कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। लेकिन, आज भी कश्मीरी पंडित उनके शब्दों पर इतनी आसानी से यकीन कर लेंगे, इसकी संभावना नहीं दिखती।

यह तभी संभव है, जब दोनों पिता-पुत्र अपनी सरकार में ऐसे काम करके दिखाएं, जिससे वास्तव में भरोसे का माहौल बन सके और वाकई कश्मीरी हिंदुओं को अपना घर वापस लौटने का और ज्यादा हौसला मिल पाए। इसके लिए उमर अब्दुल्ला की सरकार को अपनी कथनी और करनी में अंतर को पाट कर दिखाना होगा और यही आने वाली नई सरकार की सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है।

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