Handwara: शहीद कर्नल आशुतोष का आखिरी व्‍हाट्स एप स्‍टेट्स, 'हिम्‍मत को परखने की गुस्‍ताखी मत करना'

हंदवाड़ा। जम्‍मू कश्‍मीर के हंदवाड़ा में कई घंटों तक एनकाउंटर चला और एनकाउंटर में 21 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा के अलावा मेजर अनुज सूद, नायक, लांस नायक दिनेश और जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के सब-इंसपेक्‍टर शकील काजी शहीद हो गए। कर्नल आशुतोष शर्मा, 19 गार्ड्स के बहादुर ऑफिसर थे और दो बार वीरता पुरस्‍कार जीत चुके थे। साल 2018 और फिर 2019 लगातार उन्‍हें दो बार सम्‍मानित किया गया था। कर्नल आशुतोष पहले भी कई काउंटर-टेरर ऑपरेशंस को सफलता पूर्वक लीड कर चुके हैं। उनकी शहादत ने हर किसी को गमगीन कर दिया है और उनके साथ सर्व कर चुके ऑफिसर्स को इस बात का यकीन नहीं हो पा रहा है कि अब 'कर्नल सर' उनके बीच नहीं हैं।

बटालियन ने 20 साल बाद खोया CO

बटालियन ने 20 साल बाद खोया CO

कर्नल आशुतोष का व्‍हाट्सएप स्‍टेटस उनकी बहादुरी को बयां करने के लिए काफी है। 11 जनवरी को उन्‍होंने व्‍हाट्एस पर जो स्‍टेटस लगाया उसमें लिखा था, 'हिम्‍मत को परखने की गुस्‍ताखी मत करना पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चुका है।' उनकी व्‍हाट्सएप डीपी एक बब्‍बर शेर की है और वह वाकई एक शेर की तरह लड़े। हंदवाड़ा के जिस घर में कर्नल और उनकी टीम आतंकियों से मोर्चा ले रही थी, वहां पर कुछ लोगों को बंधक बनाया गया था। 21 आरआर ने 20 साल के अंदर अपने दूसरे सीओ को एनकाउंटर में खो दिया है। कर्नल आशुतोष से पहले कर्नल राजिंदर चौहान भी 21 अगस्‍त 2000 में एक एनकाउंटर शहीद हो गए थे।

जूनियर्स को याद आ रहे हैं आशु सर

जूनियर्स को याद आ रहे हैं आशु सर

कर्नल आशुतोष के साथ कश्मीर में सर्व कर चुके एक ऑफिसर को इस बात पर जरा भी यकीन नहीं हैं कि अब वह कभी उनके मैसेज का जवाब देने के लिए नहीं होंगे। इस ऑफिसर ने हमें बताया, 'आशु सर को मैं जानता था और वह बहुत ही हंसमुख स्‍वभाव के थे। साल 2018 में उनसे मिला था और उनके साथ लंच किया था।' इस ऑफिसर को अपने सीनियर ऑफिसर के जाने का बेहद अफसोस है। 21 राष्‍ट्रीय राफइल्‍स (आरआर) को राजवार टाइगर्स के तौर पर भी जानते हैं क्‍योंकि इस बटालियन ने कई खतरनाक आतंकियों का सफाया हंदवाड़ा के राजवार के जंगलों में किया है।

एक घंटे तक कर्नल ने रखा धैर्य

एक घंटे तक कर्नल ने रखा धैर्य

ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स के ऑफिसर्स और जवानों के साथ तैयार की गई है 21 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स और इस बटालियन को पिछले कुछ समय में काफी लोकप्रियता हासिल हुई है। बटालियन को 'ट्रिपल सेंचुरियंस' यानी तिहरा शतक मारने वाली बटालियन कहते है क्‍योंकि इसके नाम पर 300 से ज्‍यादा आतंकियों को मारने का रिकॉर्ड है। कर्नल आशुतोष ने शनिवार की शाम तक करीब एक घंटे तक धैर्य के साथ तब तक इंतजार किया जब तक आतंकियों ने आखिरी गोली फायर नहीं कर ली। घंटे भर बाद एक घर में कुछ लोगों को बंधक बनाकर रखे आतंकियों को जवाब देने के लिए वह अपनी टीम के साथ आगे बढ़े।

घर पर पत्‍नी के साथ 12 साल की बेटी

घर पर पत्‍नी के साथ 12 साल की बेटी

कर्नल को करीब से जानने वाले एक किस्‍से के बारे में हमेशा बात करते हैं। वे याद करते हैं कि कैसे एक बार आतंकी अपने कपड़ों में ग्रेनेड छुपाकर उनके जवानों की तरफ बढ़ा थ। इस समय बहादुरी का परिचय देते हुए कर्नल आशुतोष ने उसे काफी नजदीक से गोली मारी थी। शहीद कर्नल आशुतोष को इस बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा की पत्नी और उनकी 12 साल की बेटी अब हमेशा दरवाजे पर उनकी राह देखेंगे। हंदवाड़ा, नॉर्थ कश्‍मीर के कुपवाड़ा में आता है।

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