पहलगाम में जहां बरसी थीं गोलियां, वहां हुई कैबिनेट की बैठक, जानिए उमर अब्दुल्ला का क्या है संदेश?
Pahalgam: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला(Omar Abdullah) ने मंगलवार (27 मई) को अपने कैबिनेट की बैठक पहलगाम में की। यह इस सरकार के कार्यकाल में पहली बार है जब किसी कैबिनेट बैठक का आयोजन पारंपरिक ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर या शीतकालीन राजधानी जम्मू के बाहर किया गया है। हालांकि इस विशेष बैठक के एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों ने इसके प्रतीकात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, यह बैठक उन देशविरोधी और समाजविरोधी ताकतों के लिए एक सख्त संदेश है कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।

उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी से की अपील
यह बैठक ऐसे समय पर आयोजित की गई है जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो दिन पहले ही पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए दोहरी रणनीति का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) को अपनी बैठकें कश्मीर में आयोजित करने का निर्देश दिया जाए, साथ ही संसदीय समितियों की बैठकें भी यहीं बुलाने की सिफारिश की थी।
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई विशेष कैबिनेट बैठक को लेकर उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा, पहलगाम में कैबिनेट बैठक आयोजित करके हमने दुनिया को यह संदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर शांति प्रिय है और इसे इसकी भाईचारे की भावना के लिए जाना जाता है। कुछ लोगों ने गलत संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन जम्मू-कश्मीर पहले भी मजबूत और एकजुट था, और आगे भी रहेगा। इस कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
26 लोगों की हुई थी मौत
दरअसल, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरान घाटी में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पर्यटकों के एक समूह पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस नृशंस हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के वीडियो में चारों ओर अफरा-तफरी मची हुई दिखी और हमलावर बेकाबू होकर गोलियां बरसाते नजर आए। इस भीषण आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया। इस जवाबी कार्रवाई में भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में घुसकर 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया। साथ ही कई आतंकी ठिकानों को भी पूरी तरह तबाह कर दिया गया। यह ऑपरेशन भारत की आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति का स्पष्ट संकेत था।
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