Jamia Protest: छात्रों का आरोप- हमारे साथ अपराधियों जैसा सलूक किया गया, हाथ ऊपर उठाकर बाहर लाया गया
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए 50 छात्रों को रिहा कर दिया गया है। रविवार को विरोध-प्रदर्शन के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने छात्रों को हिरासत में ले लिया था, इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने जमकर तांडव मचाते हुए 4 बसों को फूंक दिया, कई वाहनों में तोड़फोड़ की। जबकि जामिया प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने कैंपस में घुसकर छात्रों की बर्बरतापूर्वक पिटाई की। जामिया प्रशासन का कहना था कि उग्र प्रदर्शन में यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल नहीं थे। वही, कुछ छात्रों का कहना है कि उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया गया।

हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया- छात्रों का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन हिंसक होने के बाद पुलिस कैंपस में घुस आई। इन छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने छात्राओं को धक्का दिया और इस दौरान कोई महिला अधिकारी मौजूद नहीं थी। एक छात्रा ने कहा, 'हमें कैंपस खाली करने और अपने हाथ ऊपर उठाकर बाहर आने को कहा गया। हम लोग प्रोटेस्ट वाली जगह पर मौजूद भी नहीं थे और परिसर के अंदर ही थे। हमारे साथ पुलिस ने अपराधियों जैसा व्यवहार किया।'

'परिसर के अंदर मस्जिद में पुलिस ने लोगों को परेशान किया'
एक अन्य छात्र मोहम्मद कामिल ने बताया, 'पुलिस ने परिसर के अंदर मस्जिद में प्रवेश किया और नमाज अदा कर रहे लोगों को परेशान किया। उन्होंने हमारी लाइब्रेरी, कैंटीन को तहस-नहस कर दिया।' छात्रों का कहना था कि घायलों को मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए भी नहीं ले जाया जाने दिया गया।

पुलिसकर्मियों समेत कई छात्र घायल
बता दें कि जामिया के छात्रों द्वारा किए गए प्रोटेस्ट ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चार बसों को आग के हवाले कर दिया और पुलिस की दो बाइक को भी आग लगा दी। इस दौरान झड़प में 40 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई छात्र, पुलिसकर्मी और दमकल कर्मी शामिल हैं। पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया था, जिन्हें देर रात छोड़ दिया गया।












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