पूर्व सैनिक का दावा- पुलिस ने जामिया की मस्जिद में घुसकर इमाम को पीटा, रोकने पर मुझे घसीट कर मारा
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जामियानगर में रविवार को हिंसा हुई थी। इस दौरान पुलिस जामिया मिलिया इस्लामिया में घुस गई थी और कथित तौर पर छात्रों को पीटा था। जामिया के गार्ड और पूर्व सैनिक ने अब दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ना सिर्फ छात्रों को पीटा गया बल्कि मस्जिद में घुसकर इमाम को भी मारा गया।

इंडिया टुडे से बातचीत में पूर्व सैनिक और अब जामिया में गार्ड इरशाद खान ने कहा, पुलिस कैंपस में घुस आई और छात्रों पर लाठियां बरसा दीं। मैंने अपने स्तर पर छात्रों को बचाने की कोशिश की तो मुझे भी पीटा गया। कैंपस की मस्जिद में पुलिस ने एंट्री की और इमाम के साथ भी बदसलूकी की।
वहीं छात्रों ने बताया कि लाइब्रेरी में कोई 40-50 छात्र-छात्राएं बैठकर पढ़ रहे थे कि कभी पुलिस आई और लाठियां बरसा दीं। इस दौरान छात्रों को गिरा-गिराकर मारा गया। पुलिस से बचने की कोशिश में इधर-उधर बदहवास दौड़े छात्रों को भी चोटें लगीं। छात्रों ने सूजे हुए हाथ-पैर भी दिखाए।
हाल ही में संसद से पास हुए विवादित नागरिकता संशोधन कानून का देश के खिलाफ जामिया मिलिया में बीते कई दिनों से छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को ओखला क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। जामिया प्रशासन का कहना है कि परिसर में भीतर घुसकर पुलिस ने छात्रों को पीटा है। जामिया वीसी ने पुलिस के खिलाफ एफआईआर करने की भी बात कही है।
बता दें कि नागरिकता कानून के देश के तकरीबन हर हिस्से में विरोध हो रहा है। असम, त्रिपुरा और मेघालय में बीते एक हफ्ते से जनजीवन ठप है। तो दूसरे हिस्सों में भी प्रदर्शन हुए हैं। दिल्ली, बंगाल और कई हिस्सों में हिंसा भी हुई है। वहीं देश के ज्यादातर विश्वविद्यालयों के छात्र भी लगातार कानून के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं।
नागरिकता संशोधन एक्ट, 2019 बीते हफ्ते सदन से पास हुआ है। इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता का प्रस्ताव है। कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दल और कई संगठन भी इस बिल का विरोध कर रहे हैं।
नागरिकता कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी दो दर्जन से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई हैं। सर्वोच्च अदालत में अब तक पीस पार्टी, रिहाई मंच, जयराम रमेश, प्रद्योत देब बर्मन, जन अधिकार पार्टी, एमएल शर्मा, असदुद्दीन ओवैसी, महुआ मोइत्रा की ओर से याचिकाएं डाली गई हैं। इनकी मांग है कि इस कानून को रद्द कर दिया जाए।












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