'पाकिस्तान जैसा दलाल नहीं है भारत', अमेरिका-ईरान मध्यस्थता पर विपक्ष को जयशंकर का करारा जवाब
US-Iran War: पश्चिम एशिया संकट पर बुधवार को आयोजित एक सर्वदलीय बैठक में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई। केंद्र सरकार ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में इस्लामाबाद की मध्यस्थता की कथित भूमिका की विशेष रूप से आलोचना की।
पाकिस्तान के कथित मध्यस्थता प्रयासों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक कहा, "हम दलाल (Broker) राष्ट्र नहीं हैं।" पीटीआई के अनुसार, जयशंकर ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की यह भूमिका "कोई नई बात नहीं", क्योंकि अमेरिका 1981 से उसे "इस्तेमाल" करता रहा है।

विपक्ष के भारत के रुख पर सवाल उठाने के बीच, सरकार ने बैठक में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संदेश दिया था। मोदी ने कहा, युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि यह संघर्ष सभी पक्षों को प्रभावित कर रहा है।
विपक्ष के आरोपों को विदेश मंत्री ने किया खारिज
सरकार ने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि नई दिल्ली इस संकट पर चुप्पी साधे हुए है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने जोर देकर कहा कि "हम टिप्पणी और प्रतिक्रिया कर रहे हैं।" ईरान में हुए घटनाक्रमों पर, सरकार ने बताया कि उचित प्रोटोकॉल का पालन हुआ।
विदेश सचिव ने ईरान दूतावास खुलने पर तुरंत दौरा कर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए, जिससे अमेरिका-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या पर विलंबित प्रतिक्रिया के आरोपों का खंडन हुआ।
विपक्ष बोला- हम अभी भी मूकदर्शक बने हुए हैं
हालांकि, विपक्ष के नेता सरकार द्वारा बैठक में दिए गए जवाबों से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने सरकार की प्रतिक्रिया को "असंतोषजनक" बताया और संसद में इस मुद्दे पर पूर्ण चर्चा की मांग की ।कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि "हम अभी भी मूकदर्शक बने हुए हैं।" उन्होंने इस मुद्दे पर लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत बहस की मांग की।
सरकार ने विपक्ष को ऊर्जा, तेज और गैस को लेकर दिया आश्वासन
सरकार ने लगभग डेढ़ घंटे चली इस बैठक में विपक्ष को आश्वस्त किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है, और पर्याप्त तेल व गैस मौजूद है। यह भी बताया गया कि अतिरिक्त आपूर्ति रास्ते में है और पहले ही एडवांस बुकिंग पूरी हो चुकी है।
आपूर्ति में संभावित बाधा से बचने के लिए, सरकार विभिन्न देशों और स्रोतों से बातचीत कर रही है। स्थिति नियंत्रण में है; अगले चार से पांच दिनों में चार जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं, जिससे एलपीजी उपलब्धता की चिंताएं दूर होंगी। सरकार ने किसी भी कमी से इनकार किया और पर्याप्त भंडार की पुष्टि की।
उच्च-स्तरीय बैठक में ये दिग्गज नेता हुए शामिल
गौरतलब है कि संसद परिसर में आयोजित इस उच्च-स्तरीय बैठक में मंत्रिमंडल सुरक्षा समिति के प्रमुख सदस्य शामिल थे। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल थे। स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद रहे। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नेताओं को विस्तृत प्रस्तुति दी। विपक्षी दल से कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव तथा बीजद के सस्मित पात्रा ने इन चर्चाओं में भाग लिया।












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