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हर महीने 2.87 लाख की पेंशन, क्या है जगदीप धनखड़ पर पैसों की बारिश का कारण? कहां-कहां से आएगी ये मोटी रकम?

Jagdeep Dhankhar: राजनीति की दुनिया में नेता अक्सर अपने कार्यकाल और फैसलों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन कई बार पद छोड़ने के बाद उनकी पेंशन और सुविधाएं भी चर्चा का विषय बन जाती हैं। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इन दिनों इन्हीं वजहों से खबरों में हैं।

धनखड़ ने हाल ही में राजस्थान विधानसभा से पूर्व विधायक पेंशन के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। इससे पहले ही वह पूर्व सांसद और राज्यसभा के पूर्व सभापति के तौर पर पेंशन के हकदार हैं। अब सवाल यह है कि तीन अलग-अलग पदों से उन्हें हर महीने कितनी पेंशन मिलने वाली है? आइए जानते हैं इसका पूरा हिसाब...

Jagdeep Dhankhar

राजनीति में लंबा सफर

जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर काफी लंबा और अहम रहा है। वह 1989 से 1991 तक झुंझुनू से सांसद रहे। 1993 से 1998 तक किशनगढ़ से विधायक चुने गए और 2022 से 2025 तक देश के उपराष्ट्रपति पद पर रहे। इन जिम्मेदारियों के आधार पर उन्हें अब पेंशन मिलनी तय है।
ये भी पढ़ें: Jagdeep Dhankhar: इस्तीफे के 53 दिन बाद सामने आए जगदीप धनखड़, कब, कहां और किससे मिले पूर्व उपराष्ट्रपति?

इस्तीफे के 53 दिन बाद सार्वजनिक मंच पर आए नजर

जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद किसी भी सार्वजनिक स्थान पर वो नजर नहीं आए थे। मानों इस्तीफे के बाद वो गायब ही हो गए हों। कार्यकाल के बीच में पद छोड़ने के कारण विपक्ष और जनता कई तरह के सवाल उठा रहे थे।

आखिरकार इस्तीफा देने के 53 दिन बाद वो लोगों के सामने आए। दरअसल, जगदीप धनखड़ 12 सितंबर को नए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। यहां वो वेंकेटैया नायडू से बातचीत करते नजर आए।

छत्तरपुर में रह रहे हैं धनखड़

जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद सरकारी आवास छोड़ दिया है। इन दिनों वो साउथ-वेस्ट दिल्ली के छत्तरपुर में रह रहे हैं। नया आवास आवंटित होने तक वो गडैपुर स्थित अभय सिंह चौटाला के फार्महाउस पर रुके हुए हैं। बता दें, अभय सिंह चौटाला इंडियन नेशनल लोकदल के प्रेसिडेंट हैं।

पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन

राजस्थान विधानसभा के नियमों के मुताबिक, एक बार विधायक बनने पर 35 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलती है। 70 साल से अधिक उम्र होने पर इसमें 20% की बढ़ोतरी भी जुड़ती है। धनखड़ की उम्र 74 साल है, ऐसे में उन्हें 42 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। इसके साथ मुफ्त इलाज, रोडवेज बसों में यात्रा और विदेश यात्रा के लिए सालाना 1 लाख रुपये की सुविधा भी शामिल है।

पूर्व सांसद की पेंशन

धनखड़ 1989 में झुंझुनू से सांसद बने थे। संसद के नियमों के अनुसार, पूर्व सांसदों को 45 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। इस पर कोई अतिरिक्त भत्ता नहीं जुड़ता।

राज्यसभा के पूर्व सभापति की पेंशन

उपराष्ट्रपति पद पर पेंशन का प्रावधान नहीं है, लेकिन राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्हें 2 लाख रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगी। इसके अलावा, उन्हें टाइप-8 बंगला, निजी सचिव, सहायक और चिकित्सक समेत अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

कुल पेंशन का हिसाब

  • पूर्व विधायक: 42,000 रुपये
  • पूर्व सांसद: 45,000 रुपये
  • राज्यसभा के सभापति: 2,00,000 रुपये
  • कुल मासिक पेंशन: 2,87,000 रुपये
  • साल भर में कितना पेंशन: 34,44,000 रुपये

राज्यपाल पद से पेंशन नहीं

धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं, लेकिन इस पद से कोई पेंशन नहीं मिलती।

इस्तीफे के बाद मिली मंजूरी

धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद अगस्त 2025 के अंतिम सप्ताह में उन्होंने राजस्थान विधानसभा सचिवालय में पूर्व विधायक पेंशन का आवेदन किया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मंजूरी दे दी। यह पेंशन उनकी इस्तीफे की तारीख से लागू कर दी गई है।
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