जगदीप धनखड़ का 'इस्तीफा दांव' पड़ गया उलट! 'PM मोदी से तनातनी, मर्सिडीज की मांग', क्या थी पद त्यागने की वजह?
Jagdeep Dhankhar Resigns: जगदीप धनखड़ के अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। 21 जुलाई 2025 को, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार और धनखड़ के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी का नतीजा था।
इस तनाव का चरम तब देखने को मिला, जब धनखड़ ने विपक्ष के एक प्रस्ताव को स्वीकार कर सरकार की योजना को अनजाने में चुनौती दे दी। उनकी मर्सिडीज बेड़े की मांग और अन्य मुद्दों ने भी इस दरार को और गहरा किया।

क्या थी इस्तीफे की असल वजह?
सूत्रों के मुताबिक, धनखड़ का इस्तीफा अचानक नहीं था, बल्कि यह सरकार के साथ उनके कई मुद्दों पर मतभेदों का परिणाम था। सबसे बड़ा विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष समर्थित महाभियोग प्रस्ताव को लेकर हुआ। इस साल मार्च में जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद विपक्ष ने उनके खिलाफ महाभियोग की मांग की थी।
धनखड़ ने 21 जुलाई को 63 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और इसे जांच के लिए आगे बढ़ाने का ऐलान किया। लेकिन, यह कदम सरकार की योजना के खिलाफ था। सरकार चाहती थी कि यह प्रस्ताव लोकसभा से शुरू हो और दोनों सदनों में सर्वसम्मति से आए। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने धनखड़ को तीन बार समझाने की कोशिश की। पहले, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राज्यसभा के नेता जेपी नड्डा ने उनसे मुलाकात की।
दूसरी बार रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने बात की। तीसरी बार, अकेले मेघवाल ने धनखड़ से कहा कि सत्तारूढ़ दल के सांसदों के हस्ताक्षर भी जरूरी हैं, क्योंकि यह एक सहमति वाला एजेंडा था। लेकिन धनखड़ ने सरकार की सलाह को अनदेखा कर विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसे सरकार ने 'असहमति का दुर्लभ कदम' माना।
'मर्सिडीज और PM मोदी-राष्ट्रपति की तस्वीरों के साथ जगह की मांग'
धनखड़ और सरकार के बीच तनाव का यह पहला मौका नहीं था। इंडिया टुडे टीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि धनखड़ की कुछ मांगों ने भी सरकार को असहज किया। मसलन, उन्होंने कथित तौर पर मांग की थी कि उनके बेड़े की सभी गाड़ियों को मर्सिडीज-बेंज कारों में अपग्रेड किया जाए। इसके अलावा, वे चाहते थे कि मंत्रियों के कार्यालयों में उनकी तस्वीरें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ लगाई जाएं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भारत यात्रा से पहले धनखड़ ने यह भी कहा था, 'मैं भी उपराष्ट्रपति हूं और उनका समकक्ष हूं, इसलिए मैं उनके साथ मुख्य बैठक करूंगा।' इस पर एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने उन्हें फोन कर समझाया कि वेंस अमेरिकी राष्ट्रपति का संदेश लेकर आ रहे हैं, जो प्रधानमंत्री के लिए है। इन मांगों और बयानों ने सरकार के साथ उनके रिश्तों में खटास पैदा की।
अपमान के बाद 21 जुलाई का वह निर्णायक दिन
बीती, 21 जुलाई को धनखड़ ने दिन की शुरुआत सामान्य रूप से की। उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता की, नए सांसदों को शपथ दिलाई और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक बुलाई। दोपहर 12:30 बजे हुई पहली BAC बैठक में जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू मौजूद थे। लेकिन दूसरी बैठक, जो 4:30 बजे होनी थी, में दोनों मंत्री नहीं आए। सूत्रों के मुताबिक, धनखड़ को उनकी अनुपस्थिति की पहले से सूचना नहीं दी गई थी, जिसे उन्होंने अपमान के रूप में लिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, '1 बजे से 4:30 बजे के बीच कुछ बहुत गंभीर हुआ, जिसके कारण नड्डा और रिजिजू ने जानबूझकर बैठक में हिस्सा नहीं लिया।' धनखड़ ने इस अपमान के बाद BAC की बैठक को अगले दिन 1 बजे के लिए टाल दिया। लेकिन उसी शाम 9:25 बजे, उन्होंने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंप दिया।
'इस्तीफा वापस लेने की उम्मीद टूटी'
सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा सौंपने के बाद धनखड़ को उम्मीद थी कि सरकार उनसे संपर्क कर उन्हें मनाएगी या उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 22 जुलाई को दोपहर 12:13 बजे, राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संक्षिप्त पोस्ट में लिखा, 'जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।' यह संदेश अपनी संक्षिप्तता और औपचारिकता के लिए चर्चा में रहा। कांग्रेस ने इसे 'गैर-भावनात्मक' और 'रहस्यमयी' करार दिया, यह कहते हुए कि 'किसान पुत्र को सम्मानजनक विदाई भी नहीं मिली।'
क्या कहते हैं विपक्ष और सरकार?
कांग्रेस के जयराम रमेश ने धनखड़ की तारीफ करते हुए कहा, 'वह नियमों और प्रोटोकॉल के पक्के थे। उन्होंने किसानों के लिए आवाज उठाई और अहंकार के खिलाफ बोला।' उन्होंने पीएम से धनखड़ को मनाने की अपील की, ताकि वह अपना इस्तीफा वापस लें। वहीं, शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा, 'उनकी सेहत इतनी खराब नहीं थी कि इस्तीफा देना पड़े। शायद किसी ने उनकी सेहत खराब की।' दूसरी ओर, सरकार की तरफ से कोई विस्तृत बयान नहीं आया। जेपी नड्डा ने सिर्फ इतना कहा कि BAC बैठक में उनकी अनुपस्थिति की सूचना पहले दी गई थी।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा सिर्फ एक स्वास्थ्य कारण नहीं, बल्कि सरकार के साथ गहरे मतभेदों और उनकी मांगों का परिणाम माना जा रहा है। मर्सिडीज बेड़े से लेकर जस्टिस वर्मा के महाभियोग तक, कई मुद्दों ने इस तनाव को बढ़ाया। अब सवाल यह है कि क्या यह इस्तीफा भारतीय राजनीति में एक नए तूफान का संकेत है? अगले कुछ दिन शायद इस रहस्य को और सुलझाएंगे।
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