जादवपुर यूनिवर्सिटी की छात्रा ने मंच पर क्यों फाड़ी CAA की कॉपी, अब किया खुलासा

जादवपुर यूनिवर्सिटी की छात्रा देबस्मिता चौधरी ने अब इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने मंच पर CAA की कॉपी क्यों फाड़ी...

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई शहरों में अभी भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध मार्च निकाला। ममता बनर्जी ने कहा कि छात्र-छात्राएं अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीकों से ही इस कानून का विरोध करना जारी रखें। इससे पहले जादवपुर यूनिवर्सिटी में देबस्मिता चौधरी नामक छात्रा ने दीक्षांत समारोह में अपनी एमए की डिग्री लेते समय नागरिकता संशोधन कानून की प्रति फाड़कर इस कानून के प्रति अपना विरोध जताया था। अब देबस्मिता ने बताया है कि उन्होंने दीक्षांत समारोह जैसे मौके पर ऐसा कदम क्यों उठाया।

'आपने दीक्षांत के दिन मुझे ऐसा करने के लिए क्यों मजबूर किया'

'आपने दीक्षांत के दिन मुझे ऐसा करने के लिए क्यों मजबूर किया'

इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में देबस्मिता चौधरी ने बताया, 'मैंने जो कुछ किया, उसे लेकर मुझे कोई पछतावा नहीं है। ये सब करने के लिए मुझे मजबूर किया गया। कई लोगों ने मुझसे पूछा कि मैंने नागरिकता संशोधन कानून की कॉपी क्यों फाड़ी। मैं उन लोगों से पूछना चाहती हूं कि आपने मुझे मेरे दीक्षांत समारोह के दिन ऐसा करने के लिए क्यों मजबूर किया, जो दिन हर छात्र या छात्रा के लिए बेहद खास होता है। छात्र-छात्राएं इस कानून का विरोध जताने के लिए अपने दीक्षांत समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं और दीक्षांत समारोह किसी भी छात्र के लिए बहुत कीमती होता है।'

दीक्षांत समारोह का दिन ही क्यों चुना?

दीक्षांत समारोह का दिन ही क्यों चुना?

देबस्मिता से जब पूछा गया कि उन्होंने अपना विरोध जताने के लिए जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह का दिन ही क्यों चुना तो देबस्मिता ने बताया, 'दीक्षांत समारोह एक पवित्र दिन होता है। एक गोल्ड मेडलिस्ट होने के नाते मुझे मंच पर बाकी छात्र-छात्राओं के मुकाबले ज्यादा समय दिया गया था। मुझे ज्यादा समय मिला, इसलिए मैंने उसका इस्तेमाल इस मानवता विरोधी कानून के खिलाफ आवाज उठाने के लिए किया।' इंटरव्यू में देबस्मिता ने यह भी बताया कि नागरिकता संशोधन कानून कैसे मानवता और संविधान के खिलाफ है, जिसके विरोध में अभी आवाज उठाना बहुत जरूरी है।

संविधान के खिलाफ है ये कानून

देबस्मिता चौधरी ने आगे बताया, 'मैं कभी किसी राजनीति या पार्टी से जुड़ी नहीं रही हूं, बल्कि मैं हमेशा एक बहुत शर्मीली लड़की रही हूं। मैंने नागरिकता संशोधन कानून को पढ़ा और पाया कि यह कानून संविधान का उल्लंघन करता है। संविधान का अनुच्छेद 14 सभी लोगों को ना केवल नागरिकता बल्कि समानता का अधिकार देने का वादा करता है, लेकिन यह कानून उस अधिकार को नकार रहा है। संविधान कहता है कि आप कानून के मुताबिक किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे, लेकिन ये कानून सिर्फ यही करता है।'

'अंतर्राष्ट्रीय संबंध' विषय पर एमए की टॉपर हैं देबस्मिता

'अंतर्राष्ट्रीय संबंध' विषय पर एमए की टॉपर हैं देबस्मिता

जादपपुर यूनिवर्सिटी से 'अंतर्राष्ट्रीय संबंध' विषय पर एमए में टॉप करने वाली देबस्मिता चौधरी ने आगे कहा, 'केंद्र सरकार नागरिकता का टेस्ट पास करने के लिए हमसे हमारे दादाजी की मौजूदगी के दस्तावेज मांग रही है। ये कागजात 1950-60 के दशक के हैं। एक गरीब आदमी ये कागजात आज कैसे दिखा पाएगा। ये नागरिकता कानून ना केवल मानवता के खिलाफ है, बल्कि ये गरीबों के भी खिलाफ है।'

'अपना विरोध जताने के लिए इस मंच को चुना'

'अपना विरोध जताने के लिए इस मंच को चुना'

आपको बता दें कि देबस्मिता चौधरी ने बीते मंगलवार को जादवपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में अपनी एमए की डिग्री लेते समय मंच पर ही नागरिकता संशोधन कानून की प्रति फाड़कर अपना विरोध जताया। देबस्मिता चौधरी ने कहा, 'मैंने इस कानून की प्रति को फाड़कर कूड़े में इसलिए डाला क्योंकि ये कानून एक सच्चे नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बाध्य करता है। किसी तरह का कोई भ्रम मत रखिए। मैं जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रति कोई असम्मान नहीं दिखा रही हूं। अपने पसंदीदा संस्थान में इस डिग्री से सम्मानित होने पर मुझे गर्व है। लेकिन, मैंने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए इस मंच को चुना...क्योंकि मेरे दोस्त इस दीक्षांत समारोह के पास ही गेट पर धरने पर बैठे हैं।'

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