J&K elections: कैसे जम्मू-कश्मीर को मिल सकता है पहला हिंदू मुख्यमंत्री? बीजेपी की रणनीति समझिए
Jammu Kashmir Chunav: 2014 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर बीजेपी ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया था। 10 साल बाद केंद्र शासित प्रदेश में आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद पहला चुनाव हो रहा है। इतने वर्षों में यहां काफी कुछ बदल चुका है और कई वजहें हैं, जिससे लगता है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार यहां दूसरे नंबर से पहले नंबर की पार्टी बन सकती है।
इसकी वजह ये है कि जम्मू-कश्मीर में 2022 के परिसीमन के बाद सीटों की संख्या 83 से 7 बढ़कर 90 हो चुकी है। जो 7 नई सीटें हैं, उनमें से 6 जम्मू क्षेत्र में हैं, जहां भाजपा बहुत बड़ी ताकत के तौर पर स्थापित हो चुकी है। कश्मीर क्षेत्र में सिर्फ एक सीट बढ़ी है।

सरकार के गठन कै फैसला जम्मू करेगा- अमित शाह
जम्मू-कश्मीर को लेकर बीजेपी की रणनीति समझने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जम्मू में शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं की रैली में दिए गए एक बयान पर गौर करना जरूरी है। उन्होंने कहा है, 'सरकार के गठन कै फैसला जम्मू करेगा।' उन्होंने ये भी कहा है कि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन 'कभी भी सरकार बनाने में सक्षम नहीं होगा।'
परिसीमन के बाद जम्मू क्षेत्र का भी बढ़ा दबदबा
परिसीमन के बाद जम्मू में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 37 से 43 हो चुकी है और कश्मीर में यह 46 से बढ़कर 47 हुई है। जम्मू में बढ़ी हुई सीटें निश्चित तौर पर भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। यहां सरकार बनाने के लिए अब 46 सीटों की दरकार है। यानी अब इस पर कश्मीर क्षेत्र का पहले जैसा वर्चस्व नहीं रह गया है।
इनके अलावा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को पांच लोगों को विधानसभा में मनोनीत करने का भी अधिकार होगा, जिनमें दो कश्मीरी पंडित, एक महिला और एक पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मताधिकार प्राप्त शरणार्थी भी शामिल हैं।
जम्मू में 30 से 35 और कश्मीर में 10 से ज्यादा सीट जीतने का भाजपा का लक्ष्य!
पिछले तीन लोकसभा और एक विधानसभा चुनाव में जम्मू इलाके में भाजपा का जिस तरह से प्रदर्शन रहा है, उस हिसाब से अगर पार्टी 43 सीटों में से 30 से 35 सीट भी जीत लेती है, तो सरकार बनाने का उसका आधार काफी मजबूत हो सकता है।
इसलिए, कहा जा रहा है पार्टी कश्मीर क्षेत्र में निर्दलीयों पर ज्यादा भरोसा कर रही है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा फिर भी जम्मू में अपने लिए 30 से 35 और कश्मीर में कम से कम 10 सीटें जीतने की उम्मीद लेकर चल रही है।
कैसे जम्मू-कश्मीर को मिल सकता है पहला हिंदू मुख्यमंत्री?
अगर सबकुछ इसी रणनीति के अनुसार रहा तो संभव है कि जम्मू और कश्मीर को पहला हिंदू मुख्यमंत्री मिल सकता है। क्योंकि, तब इसके लिए बीजेपी को किसी क्षेत्रीय पार्टी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जम्मू क्षेत्र से ज्यादा विधायक होने की वजह से निश्चित तौर पर यहीं से सीएम होने की संभावना रहेगी, जो कि हिंदू बहुल इलाका है।
लेकिन, कश्मीर घाटी में भाजपा की सीमित मौजदूगी की वजह से अभी भी 10 सीटों का लक्ष्य बहुत ही मुश्किल दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी कश्मीर की तीनों सीटों पर कहीं भी खुद चुनाव भी नहीं लड़ी। अलबत्ता कुछ सीटों पर कुछ दलों या निर्दलीय प्रत्याशियों का उसके मौन समर्थन होने की बात जरूर कही जाती रही है।
एक दशक से बीजेपी और पीएम मोदी का जम्मू-कश्मीर पर रहा है खास फोकस
जबकि, 2014 में जबसे केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार बनी है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के विकास से लेकर यहां व्यवस्था परिवर्तन तक पर काफी जोर दिया है और खुद हर कदम पर इससे जुड़े रहे हैं। खासकर आर्टिकल 370 हटने के बाद तो केंद्र ने यहां की समस्याएं दूर करने और इसे आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
2019 के बाद काफी बदल चुका है कश्मीर
चाहे आतंकवाद पर लगाम लगाना हो या अलगवावादियों की ओर आए दिन अपनाए जाने वाले पाकिस्तान के हित वाले एजेंडे को रोकना, केंद्र को इसमें काफी कामयाबी मिली है। पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी हैं और आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं के शामिल होने के मामले में लगभग खत्म हो चुके हैं।
इस चुनाव में भी भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने, रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध करवाने, समाज कल्याण के कार्यक्रमों और महिलाओं और किसानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर जोर देने का वादा किया है। लेकिन, कश्मीर में यह वादे और जमीनी स्तर पर सही मायने में बदले हालात भी भाजपा की योजना में मदद कर पाएंगे, यह अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है।












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