J&K:गुपकार गठबंधन पर दिल्ली से श्रीनगर तक उलझन में क्यों है कांग्रेस
नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर में हो रहे डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव में कांग्रेस गुपकार गठबंधन का हिस्सा है या नहीं इसको लेकर पार्टी खुद फैसला नहीं कर पा रही है। दिल्ली में आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन चुनाव में उसने गुपकार गठबंधन की पार्टियों के साथ कई सीटों पर तालमेल भी किया है। असल में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व तब तक इस मसले पर स्पष्ट लाइन नहीं ले रहा था, जब तक कि भारतीय जनता पार्टी उसपर हमलावर नहीं हुई। जैसे ही गृहमंत्री अमित शाह ने तिरंगे के अपमान और आर्टिकल-370 की फिर से बहाली को लेकर गुपकार दलों के मंसूबों पर उससे सीधा जवाब मांगा, पार्टी आनन-फानन में यह साबित करने में जुट गई कि वह गुपकार गठबंधन का हिस्सा नहीं है। लेकिन, जम्मू-कश्मीर की जमीन पर कुछ दूसरी ही कहानी दिखाई दे रही है।
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बीजेपी के हमले से असहज कांग्रेस ने मंगलवार को दिल्ली में कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) का हिस्सा नहीं थी। जबकि, श्रीनगर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा है कि पार्टी ने जिलास्तर पर कई दलों के साथ सीटों पर तालमेल किए हैं, जिनमें नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि ये दोनों ही पार्टियां पीएजीडी की अगुवा हैं और डीडीसी का चुनाव जम्मू-कश्मीर का विशेषाधिकार वापस दिलाने के एजेंडे के साथ ही मिलकर लड़ रही हैं। गौरतलब है कि ये पार्टियां जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल-370 और आर्टिकल-35ए की फिर से बहाली की वकालत कर रही हैं। यही वजह है कि जब गृहमंत्री ने कांग्रेस पर इसको लेकर हमला बोला तो कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को बयान देकर दावा करना पड़ा कि, 'कांग्रेस गुपकार एलायंस या पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन का हिस्सा नहीं है।'
ताज्जुब की बात ये है कि उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से यह भी दावा किया है कि उनकी पार्टी गुपकार गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही है। उन्होंने कहा है, 'गुपकार गठबंधन के साथ कोई चुनावी समझौता नहीं हुआ है.....हम अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।' इनके ठीक उलट गुलाम अहमद मीर ने कहा है कि कांग्रेस का 'जिलास्तर पर पार्टियों के साथ एक गठबंधन है।' उन्होंने कहा है कि 'हमारा गठबंधन गुपकार के साथ नहीं है। हमारा गठबंधन जिलास्तर पर है और वहां जिन पार्टियों का प्रभाव है उनके साथ है.....यह सिर्फ नेशनल कांफ्रेंस या पीडीपी तक सीमित नहीं है। स्टेट में डेढ़ दर्जन पार्टियां हैं।' अब उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनकी पार्टी गुपकार गठबंधन की किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुई है तो वह गठबंधन का हिस्सा कैसे हो सकती है।
लेकिन, गुपकार गठबंधन ने उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उससे भी कांग्रेस के दावों पर सवाल उठते हैं। पीएजीडी की पहली 17 उम्मीदवारों की लिस्ट में कांग्रेस उम्मीदवारों का नाम नहीं था। लेकिन, 15 नवंबर को जारी हुई 27 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट में कांग्रेस के 3 प्रत्याशी शामिल थे। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने तीसरे फेज में भी अनंतनाग की हिल्लर सीट पर दावा किया था। दरअसल अगस्त में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के साथ हाल मिला लिया था और उस ज्वाइंट स्टेटमेंट में पार्टी बन गए थे, जिसमें आर्टिकल-370 और 35ए की फिर से बहाली की मांग की गई थी।
लेकिन, जब से फारूक अब्दुल्ला ने कथित तौर पर चीन की मदद से इन विवादित धाराओं की वापसी की उम्मीद जताई है और महबूबा मुफ्ती ने तिरंगे को लेकर बहुत ही आपत्तिजनक बयान दिया है, तब से कांग्रेस को आगे कुआं पीछे खाई नजर आनी शुरू हो गई है। मुफ्ती ने कहा था कि जब उनके राज्य का झंडा बहाल होगा तभी तिरंगा उठाएंगी। दरअसल, आर्टिकल-370 को लेकर कांग्रेस शुरू से ही कंफ्यूज्ड रही है। उसने संसद में इसे हटाए जाने का विरोध किया था, लेकिन सीडब्ल्यूसी में अपने कदम पीछे खींच लिए थे।












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