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गलत संगत में पड़ ड्रग्स लेने लगी थीं इवांका, ट्रंप स्कूल में ही बनवाना चाहते थे हैलीपेड

इवांका ट्रंप

नई दिल्ली। अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने दिल्ली के हैप्पीनेस स्कूल में दिलचस्पी दिखायी। उन्होंने देखा कि इस स्कूल में घर और बाहर के तनावों से मुक्त हो कर बच्चे कैसे खुशी-खुशी पढ़ाई करते हैं। दरअसल मेलानिया ट्रंप 'बी बेस्ट’ ( BE BEST) अभियान से जुड़ी हैं। 'बी बेस्ट’ अभियान बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए है। आमतौर पर मेलानिया की चर्चा फैशन और डिजाइनर ड्रेसों के लिए ही होती है। लेकिन इससे अलग भी उनकी एक छवि है। वे अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी हैं। इस हैसियत से वे भी सामाजिक योगदान करना चाहती हैं। मेलानिया ट्रंप ने बच्चों की पढ़ाई को हर दबावों से मुक्त बनाने का बीड़ा उठा रखा है। खुद डोनाल्ड ट्रंप के बच्चों ने इस मुश्किल को झेला है। अमेरिकी पत्रकार और लेखिका एमिली जेन फॉक्स ने एक किताब लिखी है- बोर्न ट्रंप : इनसाइड अमेरिकाज फर्स्ट फैमिली। एमिली ने इस किताब में लिखा है कि कैसे परिवार टूटने की वजह से इवांका अकेला महसूस कर रही थीं। कैसे डोनाल्ड ट्रंप इवांका को वीकेन्ड में घर आने के लिए स्कूल में हेलीपैड बनवाना चाहते थे। कैसे इवांका ने गलत शोहबत में पड़ कर स्कूल के दिनों में ड्रग लिया था। इसलिए मेलानिया चाहती हैं बच्चे बेहतर माहौल में पढ़ें और बेहतर इंसान बनें। अब दिल्ली के स्कूल को देख कर मेलानिया अपने अभियान को एक नयी दिशा देंगी।

ट्रंप ने कहा था, मेरी बेटी के लिए स्कूल में हेलीपैड बनाओ

ट्रंप ने कहा था, मेरी बेटी के लिए स्कूल में हेलीपैड बनाओ

इवांका ट्रंप जब दस साल की थीं तब उनकी मां इवाना का पिता डोनाल्ड ट्रंप से तलाक हो गया था। इवाना ने ट्रंप पर धोखा देने का आरोप लगाया था। ट्रंप और मॉडल मार्ला की बढ़ती नजदीकियों से इवाना नाराज थीं। माता-पिता के अलगाव का इवांका पर असर पड़ा। हालांकि ट्रंप ने इवांका को अपने पास रखा और भरपूर प्यार देने की कोशिश की। लेकिन इवांका पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकीं। पत्रकार एमिली जेन फॉक्स के मुताबिक, एक बार डोनाल्ड ट्रंप इवांका के स्कूल में गये थे। उस समय ट्रंप अमेरिका के सफल कारोबारी थे। अफरात पैसा था। इवांका बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी इसलिए ट्रंप की अपनी बेटी से कम मुलाकात हो पाती थी। जब ट्रंप इवांका के स्कूल में पहुंचे तो उन्होंने प्रबंधकों से कहा था कि यहां एक हेलीपैड बनवा लीजिए ताकि उनकी बेटी वीकेंड पर चॉपर से न्यूयॉर्क (घर) आ जा सके।

जब इवांका ने ली थी ड्रग

जब इवांका ने ली थी ड्रग

एमिली के मुताबिक इवांका बोर्डिंग स्कूल को जेल मानती थी जहां उन्हें घुटन महसूस होती थी। उनका मानना था कि बोर्डिंग स्कूल बच्चों को अपने परिवार से दूर कर देते हैं। इस कारण उन्होंने कई बार स्कूल बदले। मानसिक रूप से अस्थिर रहने के कारण इवांका गलत संगत में भी पड़ गयीं। एक बार जब वे कॉएजुकेशन वाले स्कूल में पढ़ रही थीं तब उन्होंने एक पार्टी में ड्रग ली थी। इसकी वजह से उन्हें कुछ दिनों तक स्कूल आने पर प्रतिबंधित कर दिया गया था। एमिली की किताब में इस बात का भी जिक्र है कि इवांका क्लास से निकल सिगरेट भी पीती थीं। बाद में इन बातों को भुला कर इवांका ने अपना कायाकल्प किया। उन्होंने इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और खुद को एक समझदार इंसान के रूप में स्थापित किया। आज इवांका डोनाल्ड ट्रंप की सबसे निकट और भरोसेमंद सलाहकार हैं।

मेलानिया का BE BEST अभियान

मेलानिया का BE BEST अभियान

मेलानिया ने मॉडलिंग के लिए खुद अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। उन्हें हमेशा इसका अफसोस रहा। इस वजह से भी वे ‘बी बेस्ट' अभियान के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। BE BESTअभियान का सूत्र वाक्य है- बेस्ट फॉर फैमिली, बेस्ट पर कम्यूनिटी और बेस्ट फॉर नेशन। यानी बच्चों की ऐसी पढ़ाई और परवरिश हो कि वे परिवार, समुदाय और देश के लिए सबसे अच्छा बन सकें। आधुनिक जीवन में बच्चे कई दबावों से गुजर रहे हैं। टूटते परिवार, साइबर बुलिंग (गंदी भाषा या चित्रों से इंटरनेट पर तंग करना) जैसी समस्याएं बच्चों के विकास में बाधक बन रही हैं। मेलानिया ट्रंप बच्चों की बेहतरी के लिए न केवल अमेरिका में बल्कि पूरी दुनिया में अभियान चला रही हैं। उन्होंने दुनिया के नौ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की पत्नियों से इसके लिए हाथ मिलाया है। 30 से अधिक देशों के राजनयिकों से इस अभियान के विस्तार पर बात की है। अब जब वे भारत के दौरे पर आयी तो वे दिल्ली के स्कूलों में चल रहे हैप्पीनेस करिकुलम को जाना और समझा।

दिल्ली का हैप्पीनेस करिकुलम

दिल्ली का हैप्पीनेस करिकुलम

दिल्ली के सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए केजरीवाल सरकार ने डेढ़ साल पहले हैप्पीनेस करिकुलम लागू किया था। इस योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए फर्स्ट पीरियड में हैप्पीनेस सब्जेक्ट की पढ़ाई होती है। यानी पढ़ाई की शुरुआत खुशियों वाली कक्षा से शुरू होती है। 40 मिनट की पहली घंटी में ध्यान कराया जाता है, नैतिकता से जुड़ी कहानियां सुनायी जाती हैं। ज्ञान के साथ बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे बच्चे तनाव मुक्त हो कर अपना ध्य़ान पढ़ाई पर लगा पाते हैं। ऐसे स्कूलों की चर्चा जब मेलानिया ट्रंप ने सुनी तो उन्होंने भी इसे देखने का इच्छा जाहिर की। वे हर उस प्रयोग को समझना-बूझना चाहती हैं जो बच्चों की बेहतरी से जुड़ा है।

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