'पेंडिंग बूस्टर डोज लेने का यही सही वक्त है', त्योहारी सीजन के बीच NTAGI चीफ ने लोगों को किया आगाह

नई दिल्ली, 10 सितंबर। कोरोना वायरस संक्रमण अब कमजोर हो चुका है। भारत में इससे संक्रमितों मरीजों की संख्या पहले से कम हो गई है। लेकिन त्योहारी सीजन शुरू होने की वजह से एक बार फिर लोगों से एहतियात बरतने की अपील की जा रही है। इसी क्रम में एनटीएजीआई प्रमुख एनके अरोड़ा ने लोगों से पेंडिग बूस्टर डोज लेने की अपील की। न्यूज-18 को दिए एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अगले चार महीने कम से कम लोगों से एहतियात बरतने की अपील की।

corona vaccination

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अगले चार महीने एहतियात बरतने की जरूरत

अगले चार महीने एहतियात बरतने की जरूरत

अरोड़ा ने कहा कि अगले चार महीने के बाद हम पहले की कंडीशन में होंगे। इसलिए जितना हो सकें इन चार महीनों के दौरान उतना एहतियात बरतें। इससे कोरोना के नए स्ट्रेन को भी आने से रोका जा सकेगा। अरोड़ा, टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख है। यह समूह एक शीर्ष पैनल है जो भारत में कोरोनावायरस टीकों के उपयोग और तैनाती पर महत्वपूर्ण निर्णय लेता है, ने न्यूज-18 को इंटरव्यू में बताया कि देश में अधिकर लोगों ने शुरू में बूस्टर डोज लगवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों पर केंद्र सरकार की फ्री में वैक्सीन देने की पहल से इसमें तेजी जरूर आई है।

केंद्र सरकार की पहल को सराहा

केंद्र सरकार की पहल को सराहा

अरोड़ा ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर फ्री में उपलब्ध कराए जाने के बाद बूस्टर खुराक की मांग बढ़ गई है। पहले औसतन प्रतिदिन लगभग दो लाख खुराक दी जाती थी, जबकि अब यह प्रतिदिन 25-40 लाख खुराक के बीच हो गई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि एक ओर जहां कीमत लोगों को बूस्टर लेने के लिए राजी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहीं दूसरा महत्वपूर्ण कारण लोगों की सुविधा है। जब पहुंच सुविधाजनक हो जाती है, तो लोगों को बिना किसी कीमत के इसे लगवाने के लिए प्रेरित करना आसान होता है। उदाहरण के लिए केवल 1,000-2,000 निजी केंद्र थे, जहां ये बूस्टर मुफ्त होने से पहले दिए गए थे।

आसान पहुंच से बढ़ी बूस्टर डोज की मांग

आसान पहुंच से बढ़ी बूस्टर डोज की मांग

उन्होंने आगे बताया कि जुलाई में जब सरकार ने सभी के लिए मुफ्त बूस्टर की घोषणा की और उन्हें केंद्र सरकार द्वारा संचालित सभी टीकाकरण केंद्रों में उपलब्ध कराया तो 40,000 से अधिक केंद्रों ने इसे देना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की भूमिका महत्वपूर्ण है। क्योंकि इससे लोगों तक पहुंच आसान हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस तथ्य को हम इस बात से समझ सकते हैं देश में प्रशासित सभी कोविड -19 वैक्सीन खुराक का केवल छह प्रतिशत निजी क्षेत्र द्वारा प्रशासित किया गया था।

माइल्ड सिम्टम की खबर से लोग नहीं लगवा रहे बूस्टर डोज

माइल्ड सिम्टम की खबर से लोग नहीं लगवा रहे बूस्टर डोज

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी देश में बूस्टर डोज की प्रक्रिया बहुत धीमी है, इसमें और तेजी लाने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने सरकार की शालीनता को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि शालीनता की वजह से लोग तीसरी डोज लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि लोग इसलिए भी बूस्टर डोज नहीं लगवा रहे हैं, क्योंकि अभी उन्हें अभी सिर्फ कोरोना के माइल्ड सिम्टम वाले केस ही सुनने को मिल रहे हैं। अगर कोरोना का कोई नया स्ट्रेन आता है, तो लोग फिर बूस्टर डोज को तेजी के साथ लगवाएंगे।

आगे भी बूस्टर डोज लगवाने की बात पर अरोड़ा ने कही ये बात

आगे भी बूस्टर डोज लगवाने की बात पर अरोड़ा ने कही ये बात

अरोड़ा ने कहा कि भारत सीवेज निगरानी सहित कई तकनीकों द्वारा वेरिएंट के संचलन का सक्रिय रूप से मैपिंग कर रहा है। हम भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी बनाने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। अरोड़ा के मुताबिक जेनोवा द्वारा बीबी इंट्रानैसल और एमआरएनए सहित सभी आने वाले टीकों का उपयोग बूस्टर खुराक में किया जा सकता है। क्योंकि भारत में प्राथमिक टीकाकरण पहले ही हो चुका है। आगे भी बूस्टर डोज को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तक कोई संकेत नहीं है कि क्या कोविड-19 बूस्टर शॉट आगे भी लेना जरूरी होगा या फिर यही बूस्टर डोज काफी है।

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