Changing Wave: अब मौन नहीं रहे मनमोहन सिंह

Its amazing- Former PM Manmohan singh is now not a silent man
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अब संसद में पूर्व प्रधानमंत्री बदले-बदले से नजर आते हैं। वे पहले की तरह से मौन नहीं रहते। प्रधानमंत्रित्वकाल के दौरान वे आमतौर पर मौन रहना पसंद करते थे। हां, संसद में बीच-बीच में हस्तक्षेप कर देते थे जरूरत पड़ने पर। इसके अलावा वे बिना किसी भाव के संसद में विराजमान रहते थे। उऩके सीधे हाथ में पेन या पेंसिल होता था नोट्स लेने के लिए। वह अब भी रहता है।

सहजे लगते मनमोहन

पर प्रधानमंत्री पद से मुक्त होने के बाद वे ज्यादा सहज दिखने लगे हैं। संसद को कवर करने वाले कुछ पत्रकार कहते हैं कि मौन पसंद मनमोहन सिंह अब संसद के सेंट्रल ह़ॉल में पत्रकारों से भी बात करने लगते हैं। उनके सवालों के जवाब देते हैं। हां.जवाब संक्षिप्त होते हैं। टीवी पत्रकारों को बाइट भी दे देते हैं। यानी कि उनकी पूरी शख्सियत में खास बदलाव महसूस होता है।

मनमोहन सिंह का नया रूप

लंबे समय तक संसद में मनमोहन सिंह को देखते रहे वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार कहते हैं कि यह मनमोहन सिंह का नया रूप है। साफतौर पर लगता है कि अब उनके ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं है। मनमोहन सिंह सभी दलों के नेताओं से बात करते हुए या उनका अभिवादन स्वीकार करते हुए देखे जा सकते हैं। वे लाल कृष्ण आडवाणी, शरद यादव और अपनी पार्टी के सभी नेताओं से बात करते हुए दिख जाते हैं।

संसद की लाइब्रेयरी में

जानकारों ने बताया कि वे बीच-बीच में संसद की लाइब्रेयरी में भी चले जाते हैं पुस्तकें पढ़ने के लिए। वे पुस्तकालय में आने वाली नई पुस्तकों की भी जानकारी लेते हैं। क्या उन्होंने हाल के दौर में कोई किताब इशु करवाई, यह तो नहीं पता चल पाया। जाहिर है,वे जब प्रधानमंत्री थे तब लाइब्रेयरी में नहीं जा पाते थे। लाइब्रेयरी में वे बिना वहां के कर्मियों को बिना सूचना दिए पहुंच जाते हैं।

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