15 जून की उस रात में गलवान घाटी में क्या हुआ? ITBP ने बताई पूरी कहानी
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून के महीने में चीनी सैनिकों और इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के जवानों के बीच हुई हिंसक झड़प के बारे में शुक्रवार को आईटीबीपी ने जानकारी दी। आईटीबीपी ने कहा है कि गलवान हिंसक झड़प के दौरान उसके सैनिक 17 से 20 घंटे तक चीनियों (पीएलए) से लोहा लेते रहे थे। चीनी सैनिकों को आईटीबीपी के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आईटीबीपी ने चीनी सेना के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प के दौरान जवानों के पराक्रम के बारे में देश को बताया। इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि गलवान में जब चीनी सैनिकों ने पत्थरों से हमला किया तब हमारे जवान 'पूरी रात लड़े' और माकूल जवाब दिया। कुछ जगहों पर आईटीबीपी जवान 17-20 घंटे तक चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ाते रहे।
आईटीबीपी ने बताया कि, उनके जवानों ने न सिर्फ शील्ड का प्रभावी रूप से इस्तेमाल खुद को बचाने में किया बल्कि चीन की आगे बढ़ रही सेना को जवाब भी दिया। प्रोफेशनल स्किल्स दिखाते हुए आईटीबीपी के जवान भारतीय सेना के साथ खड़े रहे और उनके घायल जवानों को लाने में भी मदद की। आईटीबीपी ने शुक्रवार को बताया कि इस इलाके में तैनात 21 जवानों को वीरता पदक देने की सिफारिश सरकार से की गई है।
वहीं 294 जवानों को उनकी बहादुरी के लिए डायरेक्टर जनरल कमेंडेशन (महानिदेशक प्रशस्ति) से सम्मानित किया गया है। आईटीबीपी के जवानों ने उच्चस्तरीय पेशेवर कौशल दिखाया और 'करारा जवाब दिया व भारतीय सेना के जख्मी जवानों को वापस लेकर लौटे। इसके साथ ही 318 आईटीबीपी के जवानों और 40 सीएपीएफ के जवानों के नाम गृह मंत्री स्पेशल ऑपरेशन्स मेडल के लिए भी भेजा गया है। ये नाम कोरोना महामारी के खिलाफ जवानों के योगदान को लेकर भेजे गए हैं।












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