कोहरे के वक्त मौत का रास्ता बन जाता है यमुना एक्सप्रेस वे

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। ठंड और कोहरे में यमुना एक्सप्रेस वे मौत की सड़क प्रतीत होती है। बहुत कम जगहों पर आपको लाइटें जलती हुई मिलेंगी। इस पर उधर अपना वाहन चलाना वास्तव में चुनौती है। यही नहीं,इधर सफर करना भयानक अनुभव से कम नहीं होता रात के वक्त तो। यह छह लेन का है और ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है।

It is dangerous to drive on Yamuna express way. specially in winters

इस पूरी सड़क की यात्रा में 320 रुपये टोल तो सिर्फ चार पहिया वाहनों से ही लेते हैं लेकिन रखरखाव ऐसा है कि न तो कभी वे ओवरस्पीडिंग के लिए वाहन चालकों को रोकते हैं न उस बाड़ को दुरुस्त करते हैं जिसे फांदकर अक्सर कुत्ते, बिल्लियां, लोमड़ी, सियार और नीलगाय सड़क पर आ जाती हैं और दुर्घटनाएं घटती हैं।

बाधाएं दूर हों

अब इसकी तर्ज पर बन रही गंगा एक्सप्रेस वे पर इन सब बाधाओं को दूर करना होगा। हालांकि गंगा एक्सप्रेस वे शासन बनवा रहा है और शासन के अधिकारियों की देखरेख में यह बन रही है इसलिए निश्चय ही यह बेहतर होगी।

अंधेरे का कुंआ

वरिष्ठ लेखक शंभूनाथ शुक्ल ने ठीक ही कहा कि इतनी शानदार सड़क को किस तरह इस अंधेरे कुएं से निकाला जाए इसकी बजाय इसके निर्माता और प्रबंध कार्य देख रहे जेपी समूह के लोग इसे लावारिस छोड़े हैं। सवाल पूछा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कोहरे की काट के लिए कोई पुख्ता प्रबंध कब होंगे। योरोपीय मुल्कों में कोहरे की काट के लिए कई तरह की तकनीक प्रयोग में लाई जाती हैं। बेहतर होगा कि वे इस हाई वे पर वैसी ही तकनीक को अमल में लाया जाए। जानकारों ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस में सही रख-रखाव ना होने के कारण लगातार हादसे होते रहते हैं।

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